Latest Updates
-
इस कथा के बिना अधूरा है योगिनी एकादशी व्रत, मिलता है 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य -
Yogini Ekadashi 2026 Wishes: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें शुभकामनाएं -
बारिश का पानी स्किन के लिए अच्छा या खराब, जानें मानसून में इसके फायदे और नुकसान -
AC कोच बना 'हनीमून सुइट', फूलों-गुब्बारों से सजाया ट्रेन का डिब्बा, वायरल हुआ वीडियो, जानें रेवले के नियम -
Kiara Advani ने यश संग 'तबाही' में दिए दिए इंटीमेट सीन, जानें कैसे शूट किए जाते हैं बोल्ड सीन? -
एक्टर राजेश शर्मा को जहरीले कीड़े ने काटा, हालत नाजुक, जानें मानसून में क्यों बढ़ता है सांप कीड़ों का खतरा -
Yogini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम -
Varalakshmi Vrat 2026: सावन के आखिरी शुक्रवार को करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी बरसाएंगी धन-दौलत -
पंजाब की पहली महिला ड्राइवर और पायलट थीं शेफ विकास खन्ना की मां बिंदु खन्ना, राजीव गांधी के साथ ली थी ट्रेनिंग -
बारिश के मौसम में भूलकर भी फ्रिज में न रखें ये 5 फल, सेहत को हो सकता है नुकसान
क्या आईवीएफ बच्चे दूसरे बच्चों की तरह बुद्धिमान होते हैं?
अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों में समय से पहले पैदा होने का रिस्क होता है, पर शोध से पता चलता है कि वह भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण के बाद हुए बच्चों की तरह ही बुद्धिमान हो सकते हैं।
ह्यूमन रिप्रोडक्शन पत्रिका में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि उन लोगों की तुलना में जो लोग प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करते हैं, वह लोग जो यह ट्रीटमेंट करवाते हैं, ज़्यादातर ज़्यादा उम्र के, ज़्यादा पढ़े लिखे और अच्छे स्टेटस के होते हैं।
"शोध से पता चलता है कि अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों के संज्ञानात्मक क्षमता के खराब होने के रिस्क को रद्द करती है", ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के मेलिंडा मिल्स का कहना है।

"अप्राकृतिक रूप से पैदा हुई बच्चों में समय से पहले पैदा होने का ख़तरा होता है पर यह देखा गया है कि ऐसे बच्चों के माता पिता ज़्यादा उम्र के, ज़्यादा पढ़े लिखे और अच्छी कमाई वाले होते हैं", मिल्स ने कहा। यह सब कारण ऐसे बच्चों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह सकारात्मक प्रभाव 11 साल की उम्र तक रहता है। शोध से यह भी पता चलता है कि अप्राकृतिक रूप से जन्म लेने से इन बच्चों की सोचने की क्षमता में कमी नहीं आती," मिल्स ने कहा।

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने यूके मिलेनियम कोहोर्ट स्टडी से डाटा लिया, जिसमें करीबन 18,522 परिवार का समूह है।
साल 2000 से 2001 के बीच अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए 15,281 बच्चों में से 8000 से ज्यादा बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता को जांचने के लिए 2003, 2005, 2007 और 2012 में जांच किये गए।

हर स्टेज पर स्टैण्डर्ड जांच किये गए ताकि बच्चों के शब्दकोश (तीन और पांच साल में), सात साल में पढने की क्षमता और 11 साल में क्रिया के इस्तमाल की क्षमता के स्कोर को उन बच्चों से मिलाया गया जो प्राकृतिक रूप से पैदा हुए थे।

अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों में पांच साल तक संज्ञानात्मक विकास का उन्नत मापन रिकॉर्ड किया गया, जो 11 साल तक कमज़ोर होता गया, यह पाया गया कि अप्राक्रितिक रूप से पैदा हुए बच्चे कई मापदंड पर उन बच्चों से आगे थे जिनका जन्म प्राकृतिक रूप से हुआ था।



Click it and Unblock the Notifications