Latest Updates
-
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष का पहला दिन आज या कल? जानें किस दिन किस पितर का करें श्राद्ध -
World Contraception Day 2026: गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं? जानें इसके फायदे और नुकसान -
Pitru Paksha 2026: बेटा न हो तो क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान? अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दिया जवाब -
World Lung Day 2026: शरीर में दिखें ये 7 लक्षण तो समझ जानें आपके फेफड़े हो रहे हैं खराब -
Anant Chaturdashi 2026: अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों बांधी जाती हैं? जानें इसका धार्मिक महत्व -
Mushtaq Khan Family: 'वेलकम' फेम मुश्ताक खान ने दुनिया को कहा अलविदा, जानिए एक्टर के परिवार में कौन-कौन? -
डायबिटीज में चावल और रोटी खाने का सही समय क्या है? जानें कब खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
Anant Chaturdashi Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट -
Anant Chaturdashi 2026 Wishes: श्री हरि का आशीष...इन संदेशों के साथ अपनों को दें अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं -
Hurun India Rich List 2026: ये हैं भारत के टॉप 10 सबसे अमीर लोग, जानिए किसके पास है कितनी दौलत
क्या आईवीएफ बच्चे दूसरे बच्चों की तरह बुद्धिमान होते हैं?
अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों में समय से पहले पैदा होने का रिस्क होता है, पर शोध से पता चलता है कि वह भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण के बाद हुए बच्चों की तरह ही बुद्धिमान हो सकते हैं।
ह्यूमन रिप्रोडक्शन पत्रिका में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि उन लोगों की तुलना में जो लोग प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करते हैं, वह लोग जो यह ट्रीटमेंट करवाते हैं, ज़्यादातर ज़्यादा उम्र के, ज़्यादा पढ़े लिखे और अच्छे स्टेटस के होते हैं।
"शोध से पता चलता है कि अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों के संज्ञानात्मक क्षमता के खराब होने के रिस्क को रद्द करती है", ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के मेलिंडा मिल्स का कहना है।

"अप्राकृतिक रूप से पैदा हुई बच्चों में समय से पहले पैदा होने का ख़तरा होता है पर यह देखा गया है कि ऐसे बच्चों के माता पिता ज़्यादा उम्र के, ज़्यादा पढ़े लिखे और अच्छी कमाई वाले होते हैं", मिल्स ने कहा। यह सब कारण ऐसे बच्चों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह सकारात्मक प्रभाव 11 साल की उम्र तक रहता है। शोध से यह भी पता चलता है कि अप्राकृतिक रूप से जन्म लेने से इन बच्चों की सोचने की क्षमता में कमी नहीं आती," मिल्स ने कहा।

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने यूके मिलेनियम कोहोर्ट स्टडी से डाटा लिया, जिसमें करीबन 18,522 परिवार का समूह है।
साल 2000 से 2001 के बीच अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए 15,281 बच्चों में से 8000 से ज्यादा बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता को जांचने के लिए 2003, 2005, 2007 और 2012 में जांच किये गए।

हर स्टेज पर स्टैण्डर्ड जांच किये गए ताकि बच्चों के शब्दकोश (तीन और पांच साल में), सात साल में पढने की क्षमता और 11 साल में क्रिया के इस्तमाल की क्षमता के स्कोर को उन बच्चों से मिलाया गया जो प्राकृतिक रूप से पैदा हुए थे।

अप्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चों में पांच साल तक संज्ञानात्मक विकास का उन्नत मापन रिकॉर्ड किया गया, जो 11 साल तक कमज़ोर होता गया, यह पाया गया कि अप्राक्रितिक रूप से पैदा हुए बच्चे कई मापदंड पर उन बच्चों से आगे थे जिनका जन्म प्राकृतिक रूप से हुआ था।



Click it and Unblock the Notifications
