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जेनिटल हर्पीस का प्रेगनेंसी और बच्चे पर क्या पड़ता है असर
जेनिटल हर्पीस एक आम यौन संचारित संक्रमण है जो स्त्री और पुरुष दोनों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसके कारण महिलाओं को गर्भधारण करने में कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जेनिटल हर्पीस का असर न सिर्फ प्रेगनेंसी पर पड़ता है बल्कि यह डिलीवरी को भी प्रभावित करता है। आइए जेनिटल हर्पीस के बारे में और भी विस्तार से जानते हैं।

जेनिटल हर्पीस क्या है?
यह एक यौन संचारित रोग (एसटीडी) है जो कि हर्पिस सिम्प्लेक्स नामक विषाणु प्रकार - 1 (एच एस वी-1) और टाइप - 2 (एच एस वी-2) से पैदा होता है। किसी भी संक्रमित व्यक्ति से संबंध बनाने से यह बीमारी हो सकती है। यह बहुत आसानी से होने वाला संक्रमण है। ये योनि, गुदा या मुख मैथुन के माध्यम से आसानी से संचारित हो जाता है।
एचएसवी-1 से होने वाले हर्पस में संक्रमण होठ, मुंह और चेहरे पर बहुत ही तेज़ी से फैलता है, जबकि एचएसवी-2 से होने वाला संक्रमण गुप्तांगों को प्रभावित करता है।

जेनिटल हर्पीस का प्रेगनेंसी और नवजात शिशु पर प्रभाव
हालांकि जेनिटल हर्पीस बहुत ही आम यौन संचारित संक्रमण है लेकिन आंकड़ों के अनुसार सही समय पर इलाज हो जाने के कारण दस हज़ार में से सिर्फ एक बच्चे पर इसका प्रभाव पड़ता है। लेकिन फिर भी डॉक्टर्स के लिए यह चिंता का विषय बना रहता है। सबसे पहले इस बात की जानकारी बहुत ही ज़रूरी है कि गर्भवती स्त्री को किस स्टेज में यह इन्फेक्शन हुआ है। यदि यह इन्फेक्शन माँ को शुरूआती दौर में हुआ है तो ऐसे में बच्चे को इसका खतरा नहीं होता लेकिन अगर माँ को यह गर्भावस्था के तीसरे तिमाही में होता है तो बच्चे को भी यह इन्फेक्शन होने का डर बना रहता है। ऐसे में नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती।
यदि महिला को गर्भधारण करने से पहले हर्पीस है तो इस अवस्था में उसका शरीर कुछ एंटीबाडीज का उत्पादन करता है जो इस इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है और ऐसा ही बच्चे के साथ भी होता है।
निओनेटल हर्पीस से पीड़ित बच्चे को अंधेपन, ब्रेन डैमेज यहां तक की मृत्यु का भी खतरा रहता है।

क्या जेनिटल हर्पीस में नेचुरल बर्थ संभव है?
जी हाँ, यह बिल्कुल संभव है लेकिन कुछ शर्तों के अंतर्गत जैसे प्रसव के समय माँ के अंदर सक्रिय इन्फेक्शन का कोई लक्षण न दिखाई दे। उदाहरण के तौर पर ताज़े घाव, खुजली, पस का स्राव। इसके अलावा यदि माँ समय से अपना इलाज करवा रही है तो नेचुरल बर्थ संभव है।

बच्चे को स्तनपान
अगर आप जेनिटल हर्पीस से पीड़ित हैं तो अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं। बस आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपके स्टोनों पर किसी तरह का घाव न हो।

जेनिटल हर्पीस का इलाज
हालांकि इसका पूरा इलाज संभव नहीं है। इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है और यह जीवन में दोबारा भी हो सकता है। फिर भी डॉक्टर से उचित सलाह लेकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि आपको हर्पीस की शिकायत प्रेगनेंसी से पहले कभी भी थी और प्रेगनेंसी के दौरान आपको इसका कोई भी लक्षण न दिखाई पड़े तब भी यह यह इन्फेक्शन आपके होने वाले बच्चे को हो सकता है इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपने डॉक्टर को सारी जानकारी ठीक से दें।



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