वजाइना में खुद से कैसे करें गर्भनिरोधक आई यू डी स्ट्रिंग्स की जांच

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महिलाओं के लिए गर्भ निरोध के कई तरीके हैं लेकिन उनमें साइड इफेक्ट्स का खतरा भी बना रहता है इसलिए आजकल औरतें आई यू डी को लंबे समय तक चलने वाला और सबसे सुरक्षित तरीका मानती हैं।

आई यू डी एक इंट्रायूटेरिन डिवाइस है जो अनचाहे गर्भ से बचाता है। ये टी शेप डिवाइस गर्भाशय में डाल दिया जाता है ताकि आप गर्भधारण न कर सकें। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह बारह सालों तक चलता है और पूरी तरह से प्रतिवर्ती होता है यानी इसे हटाकर आप आसानी से गर्भधारण कर सकती हैं।

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हालांकि इसे डालना बहुत ही आसान होता है लेकिन कई बार ये अपने स्थान से हट जाता है या फिर वजाइना से स्लिप होकर बाहर भी निकल जाता है। यही कारण होता है कि आपके डॉक्टर आपको समय समय पर आई यू डी स्ट्रिंग्स की जांच करते रहने की सलाह देते हैं।

स्ट्रिंग्स की मदद से इसे डालना और निकालना दोनों ही आसान हो जाता है। इसी स्ट्रिंग्स की सहायता से आप अपने आई यू डी के सही पोजीशन का पता लगा सकती हैं।

अपने आई यू डी स्ट्रिंग्स के लिए जांच कैसे करें?

अपने आई यू डी स्ट्रिंग्स के लिए जांच कैसे करें?

आई यू डी को बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के 99.9 प्रतिशत असरदार माना गया है लेकिन असर करने के लिए इसका अपनी सही जगह पर होना बहुत ज़रूरी है। आई यू डी को एक स्पेशल इनसॉर्टर की मदद से गर्भाशय में डाला जाता है और यह स्वाभाविक रूप से अपनी स्थिति को बनाए रखने में सक्षम होना चाहिए लेकिन कई बार यह अपनी जगह से फिसल या सरक जाता है। ऐसे में आपके डॉक्टर आपको अपने आई यू डी स्ट्रिंग्स की सही पोजीशन को जांचते रहने की सलाह देंगे।

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ऐसे करें अपने आई यू डी स्ट्रिंग्स की जांच

ऐसे करें अपने आई यू डी स्ट्रिंग्स की जांच

1. हाथों को साफ सुथरा रखें।

2. ऐसे पोजीशन में बैठें जिसमें आप सहज महसूस करें। आप ज़मीन पर भी बैठ सकती हैं।

3. अपनी तर्जनी ऊंगली या फिर मध्यम ऊंगली को अपने वजाइना में तब तक डालते रहें जब तक आप सर्विक्स को छू न लें। छूने पर आपको अपने नाक की नोक की तरह महसूस होगा। स्ट्रिंग्स वहीं पर स्थित होना चाहिए।

4. भविष्य के संदर्भ के लिए स्ट्रिंग्स की लंबाई और पोजीशन को ध्यान में रखें। स्ट्रिंग्स इन्सर्ट कराने के फौरन बाद भी आप इसकी पोजीशन की जांच कर सकते हैं ताकि जब आप दोबारा चेक करें तो आपको इसके सही पोजीशन के बारे में पता हो।

कितनी बार और कब आई यू डी की जांच करें

कितनी बार और कब आई यू डी की जांच करें

इन्सर्ट कराने के बाद आपको कुछ कुछ हफ़्तों के अंदर ही इसकी जांच करते रहना चाहिए क्योंकि इसके अपनी जगह से हटने की संभावना ज़्यादा रहती है। आमतौर पर इन्सर्ट कराने के बाद आप अपने आई यू डी की जांच हफ्ते में दो से तीन बार कर सकती हैं। ऐसा आप लगातार तीन महीनों तक करें। पीरियड्स के दौरान भी आप इसकी जांच कर सकती हैं क्योंकि इस समय इसके फिसलने की संभावना ज़्यादा रहती है। शुरुआत में केवल पीरियड्स के समय ही इसकी जांच करना पर्याप्त है।

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क्या आई यू डी गिर सकता है?

क्या आई यू डी गिर सकता है?

आई यू डी एक छोटा सा डिवाइस होता है जो आसानी से फिसल सकता है। कई महिलाओं को आई यू डी के गिरने का पता भी नहीं चल पाता जिसके कारण वो गर्भवती हो जाती हैं। ऐसी स्थिति को एक्सपल्शन कहते है। हालांकि डॉक्टर्स इसके गिरने का सही कारण नहीं बता पाते फिर भी पीरियड्स के दौरान इसके गिरने की संभावना ज़्यादा रहती है। अगर आपको अपने आई यू डी के स्ट्रिंग्स महसूस न हो रहे हों या फिर आपको लगे कि वह बहुत छोटे या लंबे हैं तो इसका मतलब वह अपनी जगह पर नहीं है।

एक्सपल्शन के लक्षण क्या हैं?

एक्सपल्शन के लक्षण क्या हैं?

हालांकि आई यू डी के स्लिप होने का आपको पता नहीं चल पाता लेकिन आपका शरीर कुछ ऐसे संकेत दे सकता है जिससे आप यह जान सकते हैं कि आई यू डी अपनी जगह पर नहीं है, जैसे

तेज़ ऐंठन

असामान्य डिस्चार्ज

भारी रक्तस्राव

इन लक्षणों के साथ आपको तेज़ बुखार भी आ सकता है जो इस बात का संकेत देता है की आपका शरीर किसी इंफेक्शन से जूझ रहा है।

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जब आई यू डी गिर जाए

जब आई यू डी गिर जाए

जब आपको स्ट्रिंग्स महसूस न हो या फिर वह आपको ज़्यादा छोटा या लम्बा लगने लगे तो बेहतर होगा आप अपने डॉक्टर से एक बार जांच करवा लें। खुद से उसे अंदर की तरफ धकलने या बाहर खींचने की कोशिश भूकलर भी न करें। ऐसे में आपको सेक्स से भी परहेज़ करना चाहिए।

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    English summary

    how to check iud strings

    Intrauterine devices, commonly known as IUDs are T shaped devices that are inserted into the uterus to prevent pregnancy. It is advised to check for IUD two-three times a week for at least three months after insertion and before the periods as well.
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