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क्या आप जानते हैं प्रेग्नेंसी ब्रेन के बारे में?
प्रेगनेंसी ब्रेन को कई नामों से जाना जाता है जैसे बेबी ब्रेन, मॉमी ब्रेन, मॉमनेसिआ या प्रेग्नेसिआ। ये परेशानी गर्भवती महिलाओं में ज़्यादा देखी जाती है। इसमें महिलाओं की याद्दाश्त कमज़ोर होने लगती है और वो कई बातें भूलने लगती हैं। जैसे कि कमरे में जाकर वो भूल जाती हैं कि वो यहां क्या करने आई थीं।
कभी अपने ही पसंदीदा गाने के बोल भूल जाती हैं और कई बार वो ही शब्द भूल जाती हैं जो हर वक्त उनकी जुबां पर रहा करता था। माना कि इस तरह की परेशानी हर किसी इंसान को अपनी ज़िंदगी में कभी ना कभी होती है लेकिन अगर गर्भवती महिला में ऐसा रोज़ हो तो ये चिंता की बात हो सकती है। इसमें प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ-साथ हालत और खराब होती चली जाती है और बच्चे के जन्म लेने के बाद भी महिलाएं इससे ग्रस्त रहती हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि ऐसी कोई भी चीज़ या बीमारी नहीं है और प्रेग्नेंसी में खाई जाने वाली दवाओं और स्ट्रेस की वजह से ही महिलाओं को ऐसा महसूस होने लगता है। साथ ही वो ये भी कहते हैं कि चीज़ों को अपने आसपास रखने और रोज़मर्रा के कामों पर ध्यान देने से इस समस्या से निपटा जा सकता है। लेकिन हर गर्भवती महिला इस बात को समझ सकती है, प्रेग्नेंसी ब्रेन कोई भ्रम नहीं है और असल ज़िंदगी में इसके साथ जीना बहुत मुश्किल है।
आज हम प्रेग्नेंसी में होने वाले प्रेग्नेंसी ब्रेन के बारे में ही बात करने जा रहे हैं। अगर आप गर्भवती हैं तो इसके बारे में सब कुछ जान लें ताकि अगर आपके साथ ऐसा हुआ तो इसके बारे में जानकारी हो। अगर आपकी पत्नी, कोई नज़दीकी महिला गर्भवती है तो आप इस लेख के ज़रिये उनकी स्थिति को समझ सकते हैं और उनका सहयोग कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में...
सबूत हैं मौजूद
अगर आपको गर्भवती महिलाओं की बेबी ब्रेन की कहानियों पर विश्वास नहीं है तो आपको बता दें कि इस बात पर साइंस भी अपनी मुहर लगा चुकी है। स्टडी की मानें तो प्रेग्नेंसी के दौरान दिमाग शारीरिक और रासायनिक रूप से बदलने लगता है। गर्भावस्था में हार्मोंस के प्रति मस्तिष्क की प्रतिक्रिया करने का तरीका बदल जाता है। इस वजह से महिलाओं में बेबी ब्रेन के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
बेबी ब्रेन वाले हार्मोंस ये भी करते हैं
ऑक्सिटोसिन, प्रोजेस्टेरॉन और ग्रोथ हार्मोन को ही प्रेग्नेंसी ब्रेन का कारक माना जाता है। ये हार्मोन यूट्रस में शिशु के विकास में मदद करते हैं। ऑक्सिटोसिन दूध बनाने में मदद करता है। ऐसा कहा जाता है कि ये चीज़ें बच्चे में उससे संबंधित चीज़ों को और अधिक तेज़ बना सकती है।
ये गर्भवती महिलाओं को बना सकता है नासमझ
कहते हैं कि गर्भवती महिलाएं और नई माएं नासमझ हो जाती हैं। बेबी बंप, जोड़ों के लूज़ होने और नींद की कमी की वजह से वो कई चीज़ें भूलने लगती हैं। बेबी ब्रेन का बेबी फॉग मदद नहीं कर पाता है। गर्भावस्था के दौरान ऐसी किसी भी मुश्किल को नज़रअंदाज़ ना करें।
पहले से ज्यादा चीज़ें करने लगती हैं परेशान
गर्भावस्था के दौरान एक महिला के दिमाग में एकसाथ हज़ारों चीज़ें चलती रहती हैं। उसे अपनी डाइट, डॉक्टर से अपॉइंटमेंट और एक्सरसाइज़ की फिक्र रहती है। वो बच्चे के आने पर सभी ज़रूरी चीज़ों के बारे में सोचने लगती हैं और अपनी जिंदगी के इस नए आयाम के लिए तैयारी करने में व्यस्त रहती हैं। ये स्वाभाविक है उनका ध्यान एक साथ कई चीज़ों पर रहता है।
हर चीज़ के लिए बेबी ब्रेन नहीं है जिम्मेदार
प्रेग्नेंसी ब्रेन के बारे में जानकारी रखना अच्छी बात है लेकिन आप अपनी हर गलती के लिए इसे जिम्मेदार नहीं मान सकती हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को खराब महसूस हो सकता है।
एवॉलूशन है प्रेग्नेंसी ब्रेन का ज़िम्मेदार
जानवरों के बच्चों की तुलना में इंसान के बच्चों को ज़्यादा प्यार और देखभाल की ज़रूरत होती है। मनुष्य के बच्चे जब पैदा होते हैं तो वो कुछ भी नहीं कर सकते हैं। ना तो वो बात कर सकते हैं और ना ही खुद को किसी खतरे से बचा सकते हैं। उन्हें भरपूर प्यार और देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए महिलाओं को अपने बच्चे पर पूरा ध्यान देना चाहिए और बाकी चीज़ों को वरीयता कम देनी चाहिए।
नींद की कमी भी बनती है वजह
नींद की कमी की वजह से हर किसी को चीज़ें याद रखने में दिक्कत आती है। नींद से मस्तिष्क को ऊर्जा मिलती है और जगने पर वो सतर्क हो जाती है। गर्भवती महिलाओं और नई माओं में नींद की कमी होना सामान्य बात है। प्रेग्नेंसी में पेट की वजह से सोने में दिक्कत आती है और शरीर में कई जगहों पर दर्द भी रहता है। वहीं जब बच्चा पैदा हो जाता है तो उसे पालने में कई रातें निकल जाती हैं। स्टडी की मानें तो बच्चे के जन्म लेने के पहले साल में महिलाएं 2 घंटे से भी कम नींद ले पाती हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने 700 घंटों की नींद नहीं ली है। यही प्रेग्नेंसी ब्रेन का कारण भी हो सकता है।



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