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बच्चे की अच्छी परवरिश के लिए दुनियाभर के इन पेरेंटिंग टिप्स से लें मदद
माता-पिता बनना कोई बच्चों का खेल नहीं है। बच्चे के रातभर जागकर खेलने पर पैरेंट्स को भी उसके साथ जागना पड़ता है। पहली बार मां-बाप बने लोगों को ये बात बहुत अच्छी तरह से समझ आ गई होगी कि बच्चे को पालना सबसे चुनौतीपूर्ण काम है।
परफेक्ट पैरेंट बनने का कोई फुल प्रूफ प्लान नहीं होता है और हर कोई अपने आप सीखता जाता है। हम गलतियां करते हैं, उन पर हंसते हैं, रोते हैं और फिर काम में लग जाते हैं, बस यही है पति-पत्नी से माता-पिता बनने का सफर। आज हम आपको दुनियाभर के कुछ मजेदार पेरेंटिंग टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं।

फ्रेंच तरीका
फ्रांस की महिलाएं बचपन से ही अपने बच्चों को सीमा में रहना सिखा देती हैं। उन्हें खाना खाने के दौरान धैर्य रखने और रात में जंक फूड ना खाने को बोला जाता है। दूसरी बात, बच्चे के रोने या चिल्लाने पर फ्रेंच पैरेंट्स दौड़ते-भागते नहीं आते हैं बल्कि वो अपने बच्चों को ध्यान से सुनने की कोशिश करते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि बच्चे को पूरी रात रोने के लिए छोड़ दिया जाए।

बच्चे को खुश करना
जब बच्चे को आपकी जरूरत हो तभी उसके पास जाएं। ऐसा करने पर बच्चा अपने आप सब करना सीख जाएगा। अगर उसके सोने के दौरान आप ज्यादा दखलअंदाजी नहीं करते हैं तो धीरे-धीरे वो खुद ही सोने लगेगा और ज्यादा समय तक सोएगा।

दानिश तरीका
दुनियाभर में सबसे ज्यादा खुश दानिश बच्चे ही रहते होंगे क्योंकि यहां पैरेंटिंग का तरीका सबसे अनोखा है। यहां पैरेंटिंग का मतलब है बच्चों के साथ खेलना, उन पर भरोसा करना, डांटना नहीं और उनके साथ रहना। यहां पर परिवार के साथ समय बिताने और एक-दूसरे पर निर्भर रहने पर जोर दिया जाता है। ये अपने ऊपर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर ध्यान देना सिखाते हैं।

जापानी तरीका
पैरेंटिंग का जापानी तरीका इस दुनिया में सबसे अलग है। यहां पर बच्चों का इतना ध्यान नहीं रखा जाता कि वो मां-बाप से ही तंग आ जाएं। यहां पर कम उम्र में ही बच्चों को आत्मनिर्भर बनना सिखाया जाता है। दूसरी बात, यहां पर माता-पिता अपने बच्चे की उपलब्धियों का दिखावा नहीं करते हैं और ना ही पब्लिक का ध्यान खींचने के लिए कहते हैं। कम उम्र में ही जापानी अपने बच्चों को अनुशासन में रहना सिखा देते हैं।

चीनी तरीका
चीनी तरीके के अनुसार बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है लेकिन उसके साथ ही उसके फैसलों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा भी बने रहना चाहिए। यहां बच्चों को बहुत पहले से ही बड़ों का आदर करना सिखाया जाता है। चीनी अपने बच्चों से जुड़े रहते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वो अपने बच्चों की गलतियों की जिम्मेदारी नहीं लेते हैं।

क्या है निष्कर्ष
अगर आप भी माता पिता बन गए हैं तो इस बात को जरूर समझ लें कि परफेक्ट पैरेंटिंग की कोई परिभाषा नहीं है। हम खुद अपनी गलतियों से सीखते हैं। टूटना, टूटकर बिखरना, रोना और फिर खड़ा होना, जिंदगी में आम है। मां-बाप बनने के बाद अपने लिए समय निकालने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप अच्छी मां या अच्छे पिता नहीं हैं।



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