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सरोगेसी और टेस्ट ट्यूब बेबी में अंतर: कौनसा फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है ज्‍यादा बेहतर

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विज्ञान की प्रगति और बांझपन के इलाज ने बच्‍चें के ल‍िए तरस रहे निसंतानता की समस्‍या से जूझ रहें लोगों के लिए माता-पिता बनने का रास्‍ता आसान कर दिया है। इस पीढ़ी की तेज जीवनशैली और अस्वस्थ दिनचर्या ने बांझपन की दर को बढ़ा दिया है।

प्राचीन भारतीय समाज में बांझपन शर्मिंदा कर देना वाला मुद्दा था और लोग इस बारे में बात करने से बचते थे लेकिन अगर 'महाभारत' जैसे धार्मिक महाकाव्यों को देखें तो इसमें बांझपन से जुड़े कुछ दिलचस्प कहानियां सुनने को मिलेंगी और उस समय के लोगों ने वैज्ञानिक पद्धति और विश्लेषण के साथ इस समस्या का सामना कैसे किया। तो, ऐसे उदाहरण होने के बाद भी कुछ लोग निराश हो जाते हैं और बच्चा न होने की अपनी अक्षमता के बारे में दुखी महसूस करते हैं। हर किसी को अपने माता-पिता का आनंद लेने और खुद का बच्चा होने की खुशी महसूस करने का अधिकार है। इसल‍िए बांझपन या इंफर्टिल‍िटी की समस्‍या से जूझ रहे दंपति माता-पिता बनने के ल‍िए टेस्‍ट ट्यूब बेबी और सेरोगेसी जैसी ट्रीटमेंट का सहारा ले रहे हैं। यहां आज हम टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी के बीच अंतर पर बात करेंगे और जानेंगे क‍ि दोनों ही विकल्‍प में कौनसा ज्‍यादा अच्‍छा है?

टेस्‍ट ट्यूब क्‍या है ?

टेस्‍ट ट्यूब क्‍या है ?

आईवीएफ का मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन है जिसका वास्तव में मतलब ग्लास ट्यूब के अंदर फर्टिलाइजेशन करना है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर 'टेस्ट ट्यूब बेबी' के रूप में जाना जाता है, जहां एक बांझ महिला को परिपक्व अंडे देने तक उचित दवा के साथ निगरानी में रखा जाता है। फिर अंडे को हटाने की प्रक्रिया के माध्यम से डॉक्टर अंडे को हटाते हैं और शरीर के बाहर एक आदमी (पिता या डोनर) के शुक्राणु के साथ मिलाते हैं। आईवीएफ विशेषज्ञ शुक्राणु और अंडों को एक विशेष कंटेनर में कुछ दिनों के लिए एक प्रयोगशाला में रखते है।

जब विकसित भ्रूण नियमित निरीक्षण के बाद बाहर आते हैं, तो भ्रूण को 'भ्रूण स्थानांतरण' प्रक्रिया के माध्यम से एक महिला फैलोपियन ट्यूब में रखा जाता है। यदि ये प्रकिया सही ढंग से की जाती है और फैलोपियन ट्यूब भ्रूण से जुड़ जाती है तो गर्भ ठहर जाता है। यह विधि किसी भी माता-पिता के लिए जटिल और भावनात्मक है, पॉजिटिव रहने से इस ट्रीटमेंट का रिजल्‍ट पॉजिटिव मिलता है।

सरोगेसी क्‍या है?

सरोगेसी क्‍या है?

सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक बांझ दंपति जो अपने बच्चे को पालने के लिए तैयार हैं, एक सरोगेट मां को किराए पर लेते हैं। सरोगेसी से बच्चा पैदा करने के पीछे कई वजहें हैं. जैसे कि अगर कपल के अपने बच्चे नहीं हो पा रहे हों, महिला की जान को खतरा है या फिर कोई महिला खुद बच्चा पैदा नहीं करना चाहती हो। जो औरत अपनी कोख में दूसरे का बच्चा पालती है, वो सरोगेट मदर कहलाती है। मूल मां के अंडे सही समय पर निकाले जाते हैं और पिता या दाता से लिए गए उच्च गतिशीलता वाले शुक्राणु के साथ रखे जाते हैं। कभी-कभी पुरुष बांझपन या कम गतिशीलता वाले शुक्राणुओं की संख्या हो सकती है जो सरोगेसी की प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए एक शुक्राणु दाता का स्वागत करती है।

जब परिपक्व अंडाणु और शुक्राणु भ्रूण बनाने में सफल हो जाते हैं, तो अंतिम चरण प्रजनन की आगे की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जाइगोट स्थिति में भ्रूण को सरोगेट मदर की फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय में स्थानांतरित करने के साथ शुरू होता है। एक बार जब सरोगेट मां एक बच्चे को जन्म देती है, तो दंपति परिवार में नए सदस्य का स्वागत करेंगे। बच्चा आनुवंशिक रूप से मूल माता-पिता की संतान रहता है।

बुनियादी अंतर

बुनियादी अंतर

आईवीएफ और सरोगेसी के बीच मूल अंतर यह है कि आईवीएफ में अंडे को महिला के शरीर के बाहर निषेचित किया जाता है जबकि सरोगेसी में, अंडा दूसरी महिला के गर्भ में लगाया जाता है और वह नौ महीने तक बच्चे को पालती है। अगर हम दोनों ही प्रक्रिया की लागत की बात करें तो आईवीएफ की औसत लागत लगभग जहां भारत में 1से लेकर 3 लाख तक है वहीं सरोगेसी की लागत कहीं न कहीं 15 से 20 लाख रुपए तक है।

खतरा या साइडइफेक्‍ट

खतरा या साइडइफेक्‍ट

आईवीएफ: आईवीएफ प्रमुख चिकित्सा प्रक्रियाओं द्वारा क‍िया जाता है, इसलिए इसके कुछ साइडइफेक्‍ट स्वाभाविक है। जैसे सूजन, रक्तस्राव, स्तन कोमलता, ऐंठन, दवाओं के कारण एलर्जी की प्रतिक्रिया, सिरदर्द, मिजाज, सूजन और दर्दनाक अंडाशय और संक्रमण हैं। कभी-कभी आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान लोग अवसाद और चिंता से ग्रस्त हो जाते हैं।

सरोगेसी: इस प्रक्रिया में आईवीएफ के दुष्प्रभाव शामिल हैं यदि कोई जोड़ा इस तरह से बच्चा पैदा करने का विकल्प चुनता है। अन्यथा, सरोगेट मां को कुछ सामान्य जोखिम जो क‍ि एक जैविक मां गर्भवती होने के दौरान महसूस करने पड़ते है।

इसके अलावा, एक भावनात्मक जोखिम भी हो सकता है जो आपके बच्चे को गर्भ में पाल रहा है ये जानने के बावजूद क‍ि ये बच्चा उसका नहीं है और वह केवल बच्चे को सिर्फ गर्भ में पालने के ल‍िए जिम्मेदार है।

क्‍या है बेहतर ?

क्‍या है बेहतर ?

दोनों ही इंफर्टिल‍िटी ट्रीटमेंट से जुड़े सभी कारक जाने के बाद, आप अपनी स्थिति के अनुसार सरोगेसी या आईवीएफ चुन सकते हैं। सोचें और उसी के अनुसार खुद को तैयार करें। आपके धैर्य, भावनात्मक समर्थन और बजट को देखते हुए आपको यह कदम उठाने का फैसला करना चाह‍िए। ट्रीटमेंट पर जाने से पहले जानकारी इकट्ठा करें, अपने डॉक्टरों से सलाह लें, उन लोगों से पूछें जिन्होंने पहले ऐसा किया है और इस तरह आप हर तरह की स्थिति के लिए तैयार हो सकते हैं।

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English summary

Difference Between Surrogacy And Test Tube Baby: Which Is Better Option in Hindi?

Infertility is more common in India than people think. But there are solutions like surrogacy and test-tube baby that can help infertile couples. Here we explain the Difference Between Surrogacy And Test Tube Baby: Which Is Better Option?.