Latest Updates
-
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व -
National Parents Day 2026 Wishes: आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा...पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश -
Kargil Vijay Diwas 2026 Wishes: तिरंगे की शान...कारगिल विजय दिवस के मौके पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश
सर्दी में बच्चों को डायपर पहनाते हुए न करें ये गलती, वरना बच्चे को पकड़ सकता है निमोनिया
Diapering Mistake to Prevent Pneumonia: ठंड के मौसम में बदलते तापमान के कारण बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, खासतौर पर निमोनिया जैसी गंभीर समस्याएं। यदि आपके बच्चे को खांसी, जुकाम, या बुखार के लक्षण नजर आएं, तो सतर्क रहें। ठंड से बचाने के लिए बच्चों को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढककर रखें और उन्हें ठंडी हवाओं से दूर रखें।
ठंड के मौसम में बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि निमोनिया का मुख्य कारण ठंड ही है। छोटे बच्चों को हमेशा गर्म कपड़ों में ढककर रखें। सलाह दी जाती है कि वे अलाव का इस्तेमाल करें ताकि उनके बच्चों को ठंड से सुरक्षा मिल सके। मगर ठंड में छोटी-छोटी गलती बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। अक्सर पेरेंट्स बच्चों को गीला होने से बचाने के लिए डायपर पहना देते हैं, मगर इससे जुडी एक गलती सेहत पर भारी पड सकती हैं। आइए जानते ठंड में डायपर पहनाते हुए क्या गलती नहीं करनी चाहिए।

हर दो घंटे में चेक करें
ठंड के मौसम में बच्चों का डायपर हर दो घंटे में चेक करना जरूरी है। अगर डायपर गीला हो तो तुरंत उसे बदलें। बच्चों के शरीर को ज्यादा पानी से न पोछें, बल्कि कपड़े से हल्का सा पोछें। यदि समस्या बढ़े या दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें ताकि किसी गंभीर समस्या से बचा जा सके।
त्वचा की सफाई का ध्यान रखें
हर बार डायपर बदलते समय बच्चे की त्वचा को हल्के गुनगुने पानी और साफ कपड़े से साफ करें। त्वचा को अच्छी तरह सुखाएं और फिर ही नया डायपर पहनाएं।
डायपर फ्री टाइम भी दें
दिन में कम से कम 1-2 घंटे बच्चों को बिना डायपर के रखें, ताकि उनकी त्वचा को सांस लेने का मौका मिले। इससे रैशेज और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।
बच्चों में निमोनिया के मुख्य लक्षण
निमोनिया के प्रमुख लक्षणों में तेज सांस लेना, कफ की आवाज आना, और सांस लेने में कठिनाई होना शामिल हैं। खांसी के साथ पीले, हरे या जंग जैसे रंग का बलगम आना, बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, और शरीर में दर्द भी निमोनिया के संकेत हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सांस लेते या खांसते समय छाती में दर्द, उल्टी, पेट या सीने के निचले हिस्से में दर्द, और होंठ या नाखून का नीला पड़ना भी गंभीर लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सा सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications