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World Hemophilia Day: जन्म के 18 महीनों बाद दिख सकते हैं बच्चें में हीमोफीलिया के लक्षण, ऐसे करें देखभाल
हीमोफीलिया एक तरह का जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिससे हमारे शरीर का खून प्रभावित होता है। इस हेल्थ कंडीशन में खून पतला हो जाता है। हीमोफिलिया की स्थिति में शरीर में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसकी वजह से चोट लगने पर ब्लीडिंग कहीं भी और कभी भी शुरु हो सकती है।
शरीर से बह रहा खून जल्दी से रुकना बंद नहीं होता है। हीमोफिलिया का सबसे आम लक्षण अनियंत्रित खून का बहना है। बच्चे की माता या पिता को हीमोफीलिया है, तो बच्चे को यह बीमारी है या नहीं इस बात की जांच नहीं की जा सकती है और प्रेगनेंसी के दौरान भी मालूम करना मुश्किल होता है। बच्चें में जन्म के 18 महीनें बाद ही हीमोफीलिया के लक्षण सामने आ सकते हैं।

इस रोग के लक्षण
* शरीर पर नीले निशान बन जाते हैं
* जोड़ों में सूजन और खून बहना
* ऐंठन होना
* मस्तिष्क में रक्तस्राव
* अचानक कमजोरी और चलने में कठिनाई
* आंख के अंदर खून बहना और नाक से अचानक खून बहना
* घाव से खून कुछ देर के लिए रुक जाता है और फिर से बहने लगता है
* काटने या दांत खराब होने के कारण मुंह के अंदर खून बहना।
दो तरह का होता है हीमोफीलिया
हीमोफीलिया टाइप ए : इस प्रकार के हीमोफीलिया को क्लासिक हीमोफीलिया के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर VIII की कमी के कारण होता है।
हीमोफीलिया टाइप बी : जिसे क्रिसमस डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। यह क्लॉटिंग फैक्टर IX के उत्पादन में कमी के कारण होता है।

कैसे बच्चें का ध्यान रखें?
जयपुर स्थित इंटरनल हॉस्पिटल के सीनियर चाइल्ड स्पेशलिस्ट विवेक शर्मा
बताते हैं कि अगर बच्चा हीमोफीलिया है, तो माता-पिता को ज्यादा सर्तक रहने की जरुरत होती है, जैसे बच्चें को अपनी निगरानी में रखें, उसे अकेले न खेलने भेजें और उसके लिए ऐसे खिलौने न चुनें जिससे चोट लग सकती हैं और ब्लीडिंग हो सकती है। इसके अलावा आपको कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखने की जरूरत होती है...
* बच्चे को समय-समय पर डॉक्टर के पास लेकर जाएं और नियमित चेकअप कराएं।
* डॉक्टर ने जो भी दवाईयां बताई है, वो बच्चे को समय पर दें, डॉक्टर बताएं दिशा-निर्देशों का पालन करें।
* घर में हमेशा फर्स्ट एड बॉक्स रखें।
* डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ से सीखें अगर बच्चे को चोट लग जाए, तो बच्चें को तुरंत कैसे देखभाल करनी हैं।
* बच्चें किस तरह के खेल और गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं और किसमें नहीं, ये डॉक्टर से जरुर पूछें।
* डेंटिस्ट से जरुर पूछें कि बच्चे को दांतों को ब्रश किस तरह करना चाहिए, जिससे कि ब्लीडिंग न हो।
* किसी भी तरह की सर्जरी से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



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