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मां बनना हर महिला का सपना होता है, लेकिन कई बार होता है कि घर में नन्हीं किलकारियां गूंजने से पहले कुछ महिलाओं को गर्भपात जैसी स्थिति से गुजरना पड़ता है। गर्भपात के बाद महिलाएं शारीरिक रुप से कमजोर तो होती है लेकिन उससे ज्यादा वो मानसिक रुप से आहत हो जाती है। क्योंकि गर्भवती होते ही महिलाएं इमोशनली तौर से गर्भ में पल रहे बच्चें से अटैच हो जाती है। ऐसे में गर्भपात की स्थिति महिलाओं को मानसिक और शारीरिक तौर पर कमजोर कर देती है।
गर्भपात शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर बेहद मुश्किल होता है। गर्भपात के समय और बाद में शरीर को भयानक दर्द सहन करना पड़ता है। इस दौरान महिला का शरीर कई बदलावों से गुजरता है। ऐसे में महिलाओं को ज्यादा केयर की जरुरत होती है।
गर्भपात के बाद महिलाओं को इस दर्द से उबरने में काफी समय लग जाता है। इस समय उसे सबसे ज्यादा जिस चीज की जरुरत होती है वो है भावानात्मक सहारे की।
गर्भपात के कारण शारीरिक और मानसिक तकलीफ बहुत अधिक होती है। बच्चे के जन्म के पहले ही उसे खो देने पर बहुत अधिक दर्द और तनाव का सामना करना पड़ता है। अत: ऐसा महिला जिसका गर्भपात हुआ हो उसे बहुत अधिक भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो सके। आज यहां हम कुछ ऐसे टिप्स दे रहें है जिसे फॉलो करते हुए महिलाएं गर्भपात के दर्द से जल्द ही बाहर निकल सकती है।

गर्भपात की बात को स्वीकारें
सबसे पहले आवश्यक है कि आप इस दुर्घटना को स्वीकार करें और यह इस सत्य को मान लें कि आपका गर्भपात हुआ है। स्वीकार करने से चीज़ें आसान हो जाती हैं। इस दौरान जितना हो सकें सकारात्मक रहें, तनावमुक्त होकर आप जल्द इस स्थिति को खुद को उबार सकेंगी।
करीबियों के साथ बिताएं समय
गर्भपात के बाद परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताएं क्योंकि इस दौरान मानसिक सहारे की आवश्यकता बहुत अधिक होती है।
चिकित्सकों से मिलें
यदि आप ऐसा महसूस करती हैं कि बच्चे को खोने के बाद बहुत अधिक तनाव महसूस कर रही हैं तो पेशेवर चिकित्सकों की सहायता लें।
स्वस्थ भोजन खाएं
एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भपात के बाद आप स्वस्थ आहार लें जिसमें आयरन युक्त आहार जैसे पालक, सब्जियां, बिना चर्बी वाला मांस आदि शामिल हैं क्योंकि गर्भपात में शरीर से बहुत अधिक मात्रा में खून निकल जाता है।
3 हफ्ते संबंध बनाने से बचें
यह बहुत महत्वपूर्ण है कि गर्भपात के बाद लगभग 3 सप्ताह तक आप यौन संबंध न बनाएं क्योंकि इस समय महिलाओं के योनि में बहुत अधिक दर्द होता है और संक्रमण की संभावना भी अधिक होती है।
नियमित जांच कराएं
गर्भपात के बाद आपको यह सलाह दी जाती है कि आप अपने गाइनेकोलॉजिस्ट के पास नियमित तौर पर जाएँ ताकि संभावित स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता चल सके।
दोबारा गर्भधारण करने से पहले मिले डॉक्टर से
यदि आप गर्भपात के बाद पुन: बच्चे के लिए प्रयत्न करना चाहती हैं तो पहले अपने डॉक्टर से बात करें ताकि आपको पता चल सके कि आप पुन: गर्भवती होने हेतु स्वस्थ हैं अथवा नहीं।
एक्सरसाइज की आदत डाले
अच्छा होगा कि आप कम से कम दो सप्ताह तक कसरत न करें और अल्कोहल का सेवन न करें क्योंकि आपके शरीर में सुधार होता रहता है।
संक्रमण होने से खुद को बचाएं
गर्भपात के बाद अपने गर्भाशय की ग्रीवा आंशिक रूप से खुली रह सकती है, जिसकी वजह से मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है। इससे बचने के लिये रूई का फाहों का इस्तेमाल करने, सार्वजनिक पूल (तालाब आदि), बाथ टब का इस्तेमाल और संभोग (सेक्सुअल इंटरकोर्स) से बचना चाहिये। ऐसे में सामान्य से अधिक दर्द हो तो गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर व्यवस्थित चैकअप कराना चाहिये।



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