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इकलौते बच्चे के बारे में 8 आम भ्रांतियां
आज का समय एकल परिवार का है। महानगरों में ज्यादातर घरों में बच्चे इकलौते होने लगे हैं। महानगरीय सभ्यता के फ्लैट सिस्टम ने बहुत कुछ बदल डाला है। कमरतोड़ महँगाई, बढ़ती जनसंख्या, भौतिकतावाद और माता-पिता की अति महत्वकाँक्षाओं ने उन्हें अकेला कर दिया है।
अकेला बच्चा होना कई बार इतना आसान या इतना मुश्किल नहीं होता जैसा देखने में लगता है। सच्चाई यह है कि एक अकेले बच्चे का बचपन भी वैसा ही होता है जैसा उस बच्चे का होता है जिसके भाई बहन होते हैं। हम आपको कुछ ऐसी भ्रांतियों के बारे में बताना चाहते हैं जो लोगों को अकेले बच्चे के लिए होती हैं:

1. वह स्वार्थी होते हैं
कई लोग यह मानते हैं कि अकेला बच्चा अपने सामान, वक़्त और अपने माँ बाप के ध्यान को लेकर काफी सजग रहता है और उसे किसी के साथ बांटना नहीं चाहता। हालांकि, यह बात सही नहीं है और देखा गया है कि अकेला बच्चा नहीं होते हुए भी स्वार्थ भाव बच्चे में पाया गया है। बच्चा बड़ा होकर स्वार्थी बनता है या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसको क्या सीख दी जा रही है।

2. वह अकेले होते हैं
यह एक जानी मानी भ्रान्ति है कि अकेला बच्चा किसी का साथ खोजता है और इसलिए उसे अकेलापन महसूस होता है। यह पूरी तरह से सच नहीं है। इसके विपरीत, एक अकेला बच्चा आसानी से अपने आप को व्यस्त रख सकता है। अकेला बच्चा अपने आप का मनोरंजन अच्छी तरह से कर सकता है और वह अपनी कंपनी पसंद करता है।

3. वह सामाजिक रूप से अयोग्य होते हैं
कई लोग सोचते हैं कि अकेला बच्चा समाज में तकलीफदेह परिस्थिति से गुज़रता है। पर यह गलत है। वह इस बात के लिए ज़रूर चूजी हो सकते हैं कि वह अपना समय किसके साथ बिताना चाहते हैं। वह बहुत ज़्यादा सामाजिक नहीं हो सकते हैं पर एक फैमिली और अच्छे दोस्तों की कल्पना उन्हें पसंद होते हैं। सिर्फ इस बात से कि वह सबके साथ समय नहीं बिताना चाहते उन्हें सामाजिक रूप से अयोग्य नहीं बनाता।

4. वह बिगड़े हुए होते हैं
कई लोग सोचते हैं की एक अकेला बच्चा बिगड़ा हुआ होता है क्योंकि उसको अपने माँ बाप से काफी लाड प्यार मिलता है। यह एक भ्रम है। सच्चाई यह है कि माँ बाप पर निर्भर करता है कि बच्चा बिगड़ा हुआ होगा या नहीं। अकेला बच्चा होने का इस बात से कोई ताल्लुक नहीं है। कई ऐसे केस हैं जहाँ दो बच्चों में एक बच्चा दुसरे से कहीं ज्यादा बिगड़ा हुआ होता है।

5. उनकी ख़ास देख रेख की जाती है
ऐसे कई अकेले बच्चे हैं जिन्हें अपने माँ बाप की देख रेख इसलिए नहीं मिल पाती क्योंकि उनके माँ बाप रोजगार वाले हैं और उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं। ऐसे केस में यह सम्भव है कि अकेला बच्चा देख रेख के अभाव में बुरी तरह प्रभावित हो क्योंकि उनके पास तो कंपनी देने के लिए भाई बहन भी नहीं हैं।

6. वह ध्यान के लिए तरसते हैं
इस बात को भी सब के साथ नहीं कहा जा सकता। अगर बच्चा ध्यान के लिए तरसता है तो यह व्यक्तित्व की एक विशेषता है और कुछ नहीं। इससे इस बात का सम्बन्ध बिलकुल भी नहीं है कि वह अकेला बच्चा है। सच्चाई में ऐसे कई केस हैं जहाँ दुसरे बच्चे के जन्म के बाद पहला बच्चा ध्यान के लिए तरसने लगता है।

7. वह बहुत आत्मनिर्भर होते हैं
कई ऐसे लोग हैं जिनके मन में यह भ्रान्ति है कि एक अकेला बच्चा आत्मनिर्भर होता है और कई बार महापुरुष की श्रेणी में आ खड़े होते हैं। उन्हें उन बच्चों की तुलना में ज्यादा आत्मनिर्भर माना जाता है जिनके भाई बहन होते हैं। यह भी हर केस में सही नहीं होता। ऐसे कई अकेले बच्चे हैं जो हर चीज़ के लिए अपने माँ बाप पर निर्भर होते हैं।

8. वह भौतिकवादी होते हैं
लोग ऐसा सोचते हैं कि अकेले बच्चे की सारे मांगें पूरी की जाती हैं। इस बात से यह निष्कर्ष निकाल जाता है कि वह भौतिकवादी होते हैं। हालांकि, हर अकेले बच्चे के माँ बाप इतने अमीर नहीं होते कि वह उनको बिगाड़ सकें। और हर अकेले बच्चे के माँ बाप उनकी हर मांग पूरी कर उन्हें बिगाड़ नहीं देते।



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