क्‍या आपका बच्‍चा भी दांत काटता या नोचता है?

By Lekhaka

बच्‍चे एक अवस्‍था के बाद बहुत ही चंचल और नटखट हो जाते हैं, और वो उसे अपने अंदाज से व्‍यक्‍त करते हैं। कई बार वो अपनी मम्‍मी को ही मारने या काटने लग जाते हैं। मारना या नोंचना, बच्‍चों का सामान्‍य व्‍यवहार होता है, और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

गुस्‍सा एक प्रकार का भाव होता है जो कि अक्‍सर शिशु व्‍यक्‍त करते हैं। वो मां या अपनी केयरटेकर को भी परेशान करते हैं और ऐसे में उनके साथ डील करना मुश्किल होता है। कई बार ऐसा बहुत शर्मनाक होता है और मदर्स को दर्द भी होता है।

इस बारे में मनोवैज्ञानिक का कहना है कि बच्‍चों को बहुत ही सावधानी से डील करना होता है और उनके इस व्‍यवहार को समझना होता है। ऐसे में आपको निम्‍न बातों का ध्‍यान रखना होता है -

शांत और नियंत्रित रहें:

शांत और नियंत्रित रहें:

जब भी आपका बेबी गुस्‍सा करें या आपको मारने की कोशिश करें तो आप उस पर चिल्‍लाएं नहीं और न ही मारें। आप बिल्‍कुल शांत रहें और खुद को कंट्रोल रखें।

व्‍यवहार को रोक दें:

व्‍यवहार को रोक दें:

अगर आपका बच्‍चा शांत है तो आप लकी हैं। लेकिन अगर वो गुस्‍सैल है तो आप उसे कड़ी आवाज में चुप हो जाने को कहें और शांत कर दें।

गुस्‍सा निकालने का माध्‍यम दें:

गुस्‍सा निकालने का माध्‍यम दें:

अगर बच्‍चा एकदम से खिसिया जाता है तो आप उसे गुस्‍सा दूर करने में मदद करें। उसका मन भटका दें और उसे गहरी सांस लेने व छोड़ने को कहें। आप चाहें तो बच्‍चे को एक तकिया दे दें और उससे उस पर गुस्‍सा निकालने को कहें। साथ ही आप उसे कोई चुटकुला या कविता आदि भी सुना सकते हैं।

उसके अच्‍छे व्‍यवहार को सराहें:

उसके अच्‍छे व्‍यवहार को सराहें:

जब भी आपका बच्‍चा शैतानी दें तो आप उसे बताएं कि वो कितना अच्‍छा बच्‍चा है और बिल्‍कुल भी ऐसे व्‍यवहार नहीं करता है। अपनी तारीफ सुनकर बच्‍चे अक्‍सर गलती करना बंद कर देते हैं।

ध्‍यान हटा दें:

ध्‍यान हटा दें:

जब भी बच्‍चे जिद्द करें तो उनका ध्‍यान हटा दें और उनका मन किसी और काम में लगा दें। इससे वो कूल हो जाएंगे।

 उसके गुस्‍से का कारण पूछें

उसके गुस्‍से का कारण पूछें

इसके अलावा, जब भी बच्‍चा मारें या नोंचे तो उससे उसके गुस्‍से का कारण पूछें, उसकी बात को सही से सुनें और अगर आपको किसी टाइम पर सख्‍त होना पड़ें तो सख्‍त भी हो जाएं। एक बात आपको समझनी होगी कि बहुत ज्‍यादा गुस्‍सा दिखाकर आप कभी बच्‍चे को डील नहीं कर सकते हैं, बच्‍चे नाज़ुक होते हैं उन्‍हें प्‍यार से ही समझाना होता है।


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