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क्या करें जब आपका बच्चा पहली बार बोले झूंठ?
अगर आपने भी अपने 3-5 की उम्र के बच्चे को छोटी छोटी बातों के लिये झूंठ बोलते हुए पकड़ा है तो, इसे हल्के में ना लें।
छोटे बच्चे जब खुद को मम्मी की डांट से बचाना चाहते हैं तो अक्सर झूंठ बोलना शुरु कर देते हैं। शुरु-शुरु में तो यह मां-बाप इन बातों को नज़रअंदाज कर देते हैं लेकिन बाद में यही झूंठ बोलना बच्चों की आदत बन जाती है।
अगर आपने भी अपने 3-5 की उम्र के बच्चे को छोटी छोटी बातों के लिये झूंठ बोलते हुए पकड़ा है तो, इसे हल्के में ना लें। इससे पहले की झूंठ बोलना बच्चे की आदत बन जाए, आइये जानते हैं कि इसको कैसे रोका जा सकता है।

अपने व्यवहार को देखिये:
बिना सोचे समझे हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ढेर सारे झूंठ बोलते हैं। और हम भूल जाते हैं कि कहीं पास में बैठे हमारे बच्चे, यही झूंठ सुन रहे होते हैं। जब भी काम पर झूंठ, ट्रैफिक सिगनल तोड़ने के बाद झूंठ या फिर दूसरो से गॉसिप करते समय झूंठ बोलते होंगे तो क्या आपका बच्चा आपको नहीं देखता होगा। इसलिये बच्चे को वही सिखाएं जो आप खुद हैं।
अपनी प्रतिक्रियाओं को मॉनिटर काीजिये:
कई बार बच्चे खुद का मजाक बनने से रोकने के लिए या फिर आपके गुस्से से खुद को बचाने के लिये झूंठ बोलते हैं। अगर आप उसकी बातों का खराब से रीएक्ट करेंगे या फिर तेजी से उस पर चिल्लाएंगे, तो वह दूसरी बार जरुर झूंठ बोलेगा। तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिये? यह आपको अगले प्वाइंट में पता चलेगा।
अपनी बात को प्यार से समझाएं:
आप अपनी बात पर अड़े रहिये मगर बच्चे से प्यार से बात कीजिये। बच्चे से प्यार से बात कर के उन्हें गले लगाइये और उन्हें बताइये कि वह आपसे किस तरह से व्यवहार करें।



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