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कोडिपेंडेंट पेरेंटिंग बच्चे के लिए हो सकती है नुकसानदेह
सभी माता-पिता अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं लेकिन कई बार उनकी छोटी सी गलती या आदत भी बच्चे को प्रभावित कर देती है। जी हां, पेरेंटिग के कई तरीके हैं जिनमें बच्चे का अपने हर निर्णय या स्थिति के लिए मां-बाप पर निर्भर रहना भी शामिल है। इसे कोडिपेंडेंट पेरेंटिंग कहते हैं।

इसका मतलब है किसी रिश्ते में भावनात्मक रूप से एक-दूसरे पर निर्भर रहना। ये बच्चे और पेरेंट्स के रिश्ते को भी प्रभावित करता है। जैसे कि जब मां-बाप बच्चे की पर्सनल लाइफ या आदतों में दखल देने लगें तो इससे बच्चा प्रभावित होने लगता है।
मां-बाप के सपने बच्चे पर क्या असर डालते हैं?
बच्चों का माता-पिता और माता-पिता का कुछ कामों के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना सामान्य बात है लेकिन कई बार ये स्थिति तब गंभीर रूप ले लेती है जब बच्चे माता-पिता की खुशी के लिए अपनी इच्छाओं की कुर्बानी देने लगते हैं। हालांकि, इसकी वजह से बच्चों की खुद की खुशी, लक्ष्य और पहचान पीछे छूट जाती है। नीचे हम आपको इस स्थिति के कुछ लक्षण बता रहे हैं।
मैं कभी गलत नहीं हूं

अमूमन हर बच्चे को यही सुनने को मिलता है कि उसके मां-बाप सही हैं और वो गलत है। वो जो भी करेंगे अपने बच्चे की भलाई के लिए ही करेंगें। किसी भी तरह की असहमति को मां-बाप के खिलाफ समझा जाता है।
बच्चे को कंट्रोल करना
कई स्थितियों या बहस के दौरान कंट्रोल खोने के डर से माता-पिता रोने या चिल्लाने लगते हैं ताकि बच्चा उनसे कुछ ना कहे।
इसमें बच्चे को अपने कंट्रोल में रखना जरूरत होता है। ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चे को कंट्रोल में रखना चाहते हैं। ऐसे पेरेंट्स तब तक गुस्सा करते हैं जब तक कि उनका बच्चा हां ना कर दे।
अकसर मां-बाप अपने बच्चे को कंट्रोल करने के लिए उस पर चिल्लाते हैं या उससे बात करना बंद कर देते हैं। ये स्थिति बच्चों पर गलत असर डालती है लेकिन पेरेंट्स को तो अपने बच्चे को कंट्रोल करना होता है जिसके चक्कर में वो बच्चों को डांटते या अन्य तरह से हैंडल करते हैं।



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