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दूसरा बच्चा होने पर ये आसान तरीके कर सकते हैं पेरेंटिंग में मदद
घर में बच्चे के जन्म के बाद जैसे रौनक आ जाती है। शिशु का चेहरा देखते ही जैसे सारी थकान और दुख-तकलीफें दूर हो जाती हैं। शिशु के साथ यादें बनाना और अच्छा समय बिताना मां-बाप का सपना होता है। अगर पहले से ही घर में एक छोटा बच्चा हो तो दूसरे बच्चे के आ जाने पर माता-पिता की मेहनत थोड़ी बढ़ जाती है। आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि दूसरा बच्चा होने पर बड़े बच्चे को कैसे संभालना चाहिए ताकि उसे ऐसा न लगे कि उसके माता-पिता उस पर ध्यान नहीं देते।

दूसरे बच्चे के बारे में बताएं
अपने बच्चे को ये जरूर बताएं कि अब घर में एक नन्हा मेहमान आने वाला है। उसे समझाएं कि अब उसे भी उस नन्हे मेहमान की देखभाल में मदद करनी है और उसे ढेर सारा प्यार देना है। उसे ये भी बताएं कि नए मेहमान को उसके प्यार और देखभाल की बहुत जरूरत है।

रूटीन बनाकर चलें
शुरुआत में आपको बच्चों और काम के बीच तालमेल बैठाने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है। आपको काम के साथ-साथ अपने दोनों बच्चों को बराबर समय देना है। शुरुआत में दिक्कतें आएंगी लेकिन समय के साथ आप सीख जाएंगे।

बच्चे की हर बात सुनें
नवजात शिशु को बस दूध पिलाने और कपड़े बदलने आदि की जरूरत होती है लेकिन टॉडलर्स के तो सवाल ही इतने होते हैं कि जवाब देते-देते पूरा दिन निकल जाए। नवजात शिशु की देखभाल में टॉडलर की मदद भी लें। अगर बच्चा आपको गाना गाने या उसके साथ किताब पढ़ने के लिए कहता है तो उसे न बिल्कुल ना कहें।

बच्चे को भी एक्टिविटी करवाएं
नवजात शिशु की जिंदगी में आपके पहले बच्चे की जगह आपको ही बनानी है। उसे शिशु का डायपर बदलने, दूध की बोतल लाने, नैपी, बेबी पाउडर आदि लाने के लिए कहें। इससे उसका मन भी शिशु में लगा रहेगा। जब आप कुछ काम कर रहे हों तो बच्चे को शिशु के पास बैठाकर जाएं।
अगर आप अपना ज्यादातर समय नवजात शिशु के साथ बिता रहे हैं तो कोई बात नहीं है। नवजात शिशु को देखभाल की ज्यादा जरूरत होती है। इसके साथ ही अपने बड़े बच्चे की भी जरूरतों को समझें। धैर्य के साथ दोनों बच्चों को हैंडल करें। ज्यादा चिंता न करें।



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