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विश्व स्तनपान दिवस 2019: पहली बार मां बनने पर स्तनपान में आती हैं ये समस्याएं
मां बनने के बाद सबसे जरूरी और मुश्किल काम होता है ब्रेस्टफीडिंग। नई माओं को अपने बच्चे को दूध पिलाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासतौर पर पहले सप्ताह में। यहां हम आपको बता रहे हैं कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान किस तरह की समस्याएं आती हैं। यहां कुछ उपाय बताने की भी कोशिश की गयी है ताकि इस दर्द में थोड़ी राहत मिल सके।

पहली समस्या: दर्द होता है
पहली बार मां बनी हैं तो आपको अपने शिशु को दूध पिलाने के दौरान दर्द महसूस होगा। शिशु को हर दो घंटे में दूध पिलाना पड़ता है। अगर निपल्लस पर घाव या अकड़न हो तो उसमें दर्द और बढ़ सकता है।
उपाय
इस बात का ध्यान रखें कि शिशु स्तनों से दूध को ठीक तरह से खींच पा रहा है। ऐसा ना कर पाने की स्थिति में भी स्तनपान के दौरान दर्द महसूस होता है।
पोजीशन बदलें: रोज बच्चे को एक ही पोजीशन में दूध ना पिलाएं। अलग-अलग पोजीशन जैसे कि आलथी-पालथी कर के बैठना, लेटकर या कमर के सहारे बैठकर दूध पिलाएं जिससे दर्द कम होगा।
निप्पल की ठंडी सिकाई: निप्पल पर ठंडा हाइड्रोजैल लगाने से भी राहत मिलती है। निप्पल को ठीक करने के लिए भी ये अच्छा तरीका है।

दूसरी समस्या: शिशु दूध नहीं खींच पा रहा
आमतौर पर ये समस्या प्रीमैच्योर शिशु या जिन माओं के निप्पल मुड़े हुए या समतल होते हैं, उनमें आती है।
उपाय
अपनी और शिशु की जांच ब्रेस्टफीडिंग स्पेशलिस्ट से करवाएं। डॉक्टर आपकी सही जांच करके आपको इसकी वजह और उपचार दोनों के बारे में बताएंगे।
समलत या मुड़े हुए निप्पल को ठीक करने के लिए निप्पल फॉर्मर का इस्तेमाल करें।
शिशु को स्तन तक पहुंचने और दूध खींचने के लिए आपको आराम की मुद्रा में बैठना होगा। बच्चे को भी रिलैक्स होकर पकड़ें।

तीसरी समस्या: दूध कम आना
डिलीवरी के बाद शुरुआती हफ्तों में हार्मोनल बदलाव की वजह से स्तनों में दूध बनने में समय लगता है। घबराने की जरूरत नहीं है, दूध धीरे-धीरे बढ़ जाएगा।
उपाय
शिशु को भूख लगने पर ही दूध पिलाएं और कोई शेड्यूल तैयार करने की जरूरत नहीं है। पहले कुछ हफ्तों में शिशु को हर दो घंटे में दूध पिलाएं। इससे भी स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ता है।
प्रसव के बाद शुरुआती हफ्तों में अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है। संतुलित आहार लें और समय पर खाएं। भोजन करना ना भूलें वरना आपके शिशु को भी जरूरी पोषण नहीं मिल पाएगा।

चौथी समस्या: दूध का अधिक उत्पादन
कुछ मामलों में महिलाओं को स्तनों में दूध अधिक बनने की शिकायत रहती है। इसकी वजह से भी ब्रेस्ट में दर्द और घाव हो सकता है। हालांकि, हार्मोंस के संतुलित होने के बाद ये समस्या अपने आप चली जाती है।
उपाय
बेहतर होगा कि आप बच्चे को लेटकर या आलथी-पालथी की पोजीशन में बैठकर दूध पिलाएं। इससे दूध का स्राव कंट्रोल होता है और बच्चा ठीक तरह से दूध पीता है।
आप स्तनों से आ रहे अतिरिक्त दूध को कांच की किसी बोतल में भर कर भी रख सकते हैं।
अगर आपको कुछ हफ्तों के बाद भी ये समस्या बनी हुई है तो लैक्टेशन विशेषज्ञ से सलाह लें।



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