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लिक्विड सोने से कम नहीं है मां का दूध, दूध दान करके भी बचा सकते नवजात की जान
दुनियाभर में मांओं में स्तनपान और शिशुओं के स्वास्थय में सुधार को देखते हुए हर साल 'ब्रेस्टफीडिंग वीक' मनाया जाता है। इसके बावजूद प्रतिवर्ष मां का दूध न मिलने के कारण कई नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार 100 में से 16 बच्चों की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्हें जन्म के बाद मां का पहला दूध नहीं मिल पाता है।
शिशु के जन्म से लेकर छह माह तक स्तनपान कराने से शिशु मृत्यु दर काफी हद तक कम की जा सकती है। इसकी पहल देश के कई हिस्सों में हो चुकी है। देश के विभिन्न राज्यों में मदर मिल्क बैंक खोले गए हैं, जो बच्चों के लिए मां के दूध को स्टोर करते हैं। इसके बाद जरूरतमंद बच्चों तक यह दूध पहुंचाया जाता है।

कैसे सुरक्षित रखा जाता है दूध?
सबसे पहले मदर मिल्क बैंक में दूध डोनेट करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की पूरी जांच की जाती है। इस जांच में यह पता लगाया जाता है कि कहीं संबंधित महिला को कोई बीमारी तो नहीं है। इसके बाद दूध को माइनस 20 डिग्री पर रखा जाता है, जिससे यह दूध करीब छह माह तक खराब नहीं होता है।

कौन से राज्य हैं आगे?
साल 2018 में जारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में सबसे ज्यादा (13) मदर मिल्क बैंक बनाए गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में (12), तमिलनाडु में (10) मदर मिल्क बैंक हैं।इन राज्यों के बाद इस लिस्ट में चेन्नई का नाम आता है। दिल्ली में भी ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने की सेवाएं दी जा रही है।

शिशु के लिए क्यों जरूरी मां का दूध?
मां का दूध एक संपूर्ण आहार है जिसमें बच्चे की जरूरत के सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें शिशु आसानी से हजम कर लेता है। मां के दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट गाय के दूध की तुलना में भी अधिक आसानी से पच जाते हैं। इससे शिशु के पेट में गैस, कब्ज, दस्त आदि की समस्या नहीं होती है और बच्चे की दूध उलटने की संभावना भी बहुत कम होती है।

माएं बच सकती है ब्रेस्ट कैंसर से
जहां एक तरफ ब्रेस्ट मिल्क बच्चों के लिए रक्षा कवच बनकर काम करती है वहीं मां की भी ये बीमारियों से बचाती है। ब्रेस्ट मिल्क दान करने से माएं शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहती है। इसके अलावा स्तनपान करवाने और दूध दान से माएं ब्रेस्ट कैंसर से सुरक्षित रहती है।



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