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गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क से तेज होती है मां की स्मृति
(आईएएनएस)| महिलाओं के साथ गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में या बच्चे के जन्म के तुरंत बाद के दिनों में अक्सर यह समस्या आती है कि वे भुलक्कड़पन से जूझ रही होती हैं या चीजें ठीक से याद नहीं रख पाती हैं। इस स्थिति को 'बेबी ब्रेन' कहते हैं। एक शोध में पता चला है कि 'बेबी ब्रेन' की यह स्थिति स्थाई नहीं होती और कालांतर में इसका प्रभाव महिलाओं के पक्ष में होता है। समय के साथ साथ महिलाओं की यादाश्त तेज करने में सहायक होता है, जो एक अच्छी खबर है।
बच्चे के जन्म के छह महीने बाद मां का दिमाग अपने वास्तविक आकार को प्राप्त कर लेता है।

अध्ययन में पता चला है कि मां बन चुकी महिलाएं, बिना बाल बच्चे वाली महिलाओं की अपेक्षा यादाश्त परीक्षण और दूसरे कार्यो में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। प्रसव पीड़ा के दौरान महिला से न कहें ये 5 बातें
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में न्यूरोसाइंटिस्ट लीजा गेलिया ने कहा, "गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद के दिनों में मां के मस्तिष्क में काफी सारे बदलाव आते हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि गर्भावस्था के दौरान दिमाग पर भी प्रभाव पड़ता है और इससे शारीरिक क्रिया विज्ञान में कई सारे नाटकीय परिवर्तन होते हैं।"
गेलिया ने कहा कि एक महिला का मस्तिष्क गर्भावस्था के दौरान चार से आठ प्रतिशत तक सिकुड़ जाता है और ऐसा गर्भवती महिला के शरीर में नौ महीनों के दौरान स्रावित होने वाले हार्मोनों के कारण होता है।
शोध के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान यादाश्त और दिमाग से जुड़ी दूसरी छोटी मोटी मुश्किलों का कारण मस्तिष्क में होने वाला परिवर्तन है, जो आने वाले बच्चे के लिए तैयार हो रहा होता है।



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