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गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान रखें कुछ सावधानियां : क्या करें और क्या नहीं करें
क्या आप जानना चाहती हैं कि गर्भावस्था के पहले महीने में क्या सावधानियां ली जाएं? एक सरल सूची बनाएं और इसे किसी ऐसी जगह पर रखें जहां आप इसे अक्सर देख सके।
एक महिला के लिए गर्भावस्था सबसे भ्रामक समय है, खासकर अगर वह पहली बार गर्भवती है। फार्मास्यूटिकल स्टोर में उपलब्ध परीक्षण किट का उपयोग करके घर पर गर्भावस्था परीक्षण करना ठीक है, लेकिन फिर भी आपको डॉक्टर से मिलने और गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए सलाह दी जाती है। यह सुनिश्चित करें कि आपमें दिखाई देने वाले लक्षण झूठे न हो!
क्या आप जानना चाहती हैं कि गर्भावस्था के पहले महीने में क्या सावधानियां ली जाएं? एक सरल सूची बनाएं और इसे किसी ऐसी जगह पर रखें जहां आप इसे अक्सर देख सके।
निम्नलिखित को मोटे अक्षरों में लिखें और इसे जितना संभव हो उतना ही पालन करें, पैदल चलें, कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं, ताजे फल और सब्जियां खाएं, सकारात्मक रहें।

1. नियमित व्यायाम:
नियमित व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण है जो आपको थकाए नहीं बल्कि आपके सिस्टम को सामान्य रूप से काम करना में मदद करें। इसलिए, चलना काफी मददगार माना जाता हैए बस इस बात का ध्यान रखें कि यह आपको तनाव न दें। आजकल होने वाली माताओं के लिए विशेष योग कक्षाएं आयोजित की जाती हैं प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ के साथ चर्चा करें और उसके बाद इनका विकल्प चुनें। हमेशा अपने प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ को आपकी गतिविधियों के बारे में सूचित करें, जो आपको बेहतर मार्गदर्शन करने में उसे मदद कर सकता है।

2. फाइबर रिच फूड्स:
फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे फल कब्ज की समस्याओं को कम करने में आपकी मदद करेंगे और अापके पेट के कार्यों को नियमित कर सकते हैं। इस समय संतुलित आहार बहुत महत्वपूर्ण है। अधिक खाने की कोशिश न करें, यहां तक कि अपने सबसे पसंदीदा भोजन को भी सही मात्रा में ही लिया जाना चाहिए। स्ट्रॉबेरी जैसे फल फोलिक एसिड में समृद्ध होते हैं, और उनका सेवन करना उचित है। आप अपने आहार में स्प्राउट्स, अनाज, पालक और फलियां भी ले सकते हैं गर्भावस्था के दौरान दिन में कई बार थोड़ा- थोड़ा भोजन करना हमेशा बेहतर होता है चूंकि यह आपको भरपेट महसूस करने, फिट और स्वस्थ रहने में मदद करेगा।

3. स्वस्थ मन:
मानें या न मानें, मां की भावनाओं और मनोदशा का बच्चे की भावनात्मक परवरिश पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, अपने आप को शांत, सकारात्मक और खुश रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह की सकारात्मकता को अपने भीतर लाने के लिए ध्यान सबसे अच्छा तरीका है। आप किसी भी प्रकार के मेडिटेशन कर सकते हैं और इसे कम से कम एक घंटे के लिए दैनिक आधार पर अभ्यास करने का प्रयास कर सकते हैं।

क्या नहीं करना है?
अब तक हमने जाना कि क्या करना चाहिए, और अब समय इस पर ध्यान देने का है कि गर्भधारण के पहले महीने में क्या नहीं करना चाहिए।

1. डरें नहीं:
क्या आपने बच्चे के लिए इतनी जल्दी योजना नहीं बनाई है? या क्या आप चिंतित हैं कि आपके बच्चे के पास कुछ असामान्यता है? ऐसे सभी विचार और भय एक होने वाली माँ के लिए आम हैं, लेकिन आपको इस तरह के विचार न करने का एकमात्र कारण याद रखना चाहिए कि ये आपके बच्चे को सीधे प्रभावित करेगे। यदि आप पहले से ही ध्यान और योग कक्षाएं शुरू कर चुकी हैं या समाधान के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श लें चुकी हैं तो डरना छोड़ दें।

2. कॉफी से बचेंः
कैफीन को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है जो कि आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है . पहले महीने से ही कॉफी से बचने की कोशिश करें। कॉफी से एसिडिटी बढ़ जाती है और यह दिल में जलन कारण बनता है।

3. जंक फ़ूड से बचें:
जंक फूड वजन में वृद्धि करता है और चूंकि आप बच्चे के विकास के कारण स्वाभाविक रूप से आपका वजन बढेगा, तो अवांछित वसा आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। याद रखें कि गर्भावस्था के दौरान वज़न का बढ़ना रक्तचाप और मधुमेह से सीधे संबंधित है। हमेशा हाइड्रेटेड रहें। यकीनन आप IV के कारण अस्पताल में नहीं जाना चाहेंगी।

4. तंग कपड़े और ऊँची एड़ी से बचें:
आपके शरीर में परिवर्तन हो रहा है और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए श्वास लेने की जगह आवश्यक है। इसलिए कुछ समय के लिए सभी तंग फिटिंग वाले कपड़े एक तरफ रख दें। आरामदायक फ्लैट जूते पहनें। इस तरह आप अकस्मात ट्रिपिंग से भी बच जाएंगी और अापके पैरों में सही जगह दबाव भी पड़ेगा।

5. नींद का समय बढ़ाएंः
आपका शरीर कई भौतिक और हार्मोनल परिवर्तनों से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों को बिना किसी समस्या के होने के लिए और आप पर इन बदलती परिस्थितियों का अचानक प्रभाव न होने के लिए, पर्याप्त नींद लें।

6. खमीर संक्रमण:
योनि कैंडिडिआसिस गर्भवती माताओं में बहुत आम संक्रमण है। यह एस्ट्रोजन के उच्च स्तर और योनि में ग्लाइकोजन स्राव की मात्रा में वृद्धि के कारण होता है। योनि को स्वच्छ बनाए रखना और चिकित्सक के परामर्श के अनुसार प्रोबायोटिक्स जैसे लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलसलेना उचित होगा। मातृत्व में पहला महीना पहला कदम है।



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