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प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में होते हैं ये हॉर्मोनल बदलाव, शरीर में सूजन आने की होती है ये वजह
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भ में बच्चें के शरीर का विकास लगभग पूरा हो चुका होता है। आप इसे प्रग्नेंसी का होम स्ट्रेच कह सकते हैं। ये 28वें हफ्ते से शुरू हो जाता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में आपका शरीर भारी हो जाएगा। आपको रोजमर्रा के काम जैसे बैठना, उठना, खड़े होना या फिर चलने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान शरीर में हॉर्मोन के बदलाव के कारण पेट खिंचा हुआ सा महसूस हो सकता है। जिस वजह से शरीर में काफी बदलाव आते हैं। आइए जानते हैं कि तीसरी त्रिमाही में गर्भावस्था के दौरान शरीर में क्या-क्या हार्मोनल बदलाव होते हैं?

प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन की बढ़ जाती है अधिकता
प्रेग्नेंसी के 32 सप्ताह में शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का लेवल हाई हो जाता है। इस समय एस्ट्रोजन अपने हाई लेवल पर होता है। प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में एस्ट्रोजन का लेवल पहली तिमाही की अपेक्षा छह गुना बढ़ जाता है। हार्मोनल बदलाव के चलते पैरों के आसपास अधिक सूजन दिखाई देने लगती है। इसे लिम्फेटिक सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। एस्ट्रोजन को अप्रत्यक्ष रूप से पानी और नमक के साथ भी जोड़ा जा सकता है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही आते-आते शरीर में फ्लूइड रिटेंशन की वजह से पांव के अलावा हाथ, कलाई और उंगलियों में भी सूजन दिखने लगती है।

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में एसिड रिफ्लक्स की समस्या
प्रेग्नेंसी के आखिरी चरण में, महिलाएं एसिड रिफ्लक्स या हार्टबर्न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं। एस्ट्रोजन के कारण इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। रिलैक्सिन की हेल्प से डिलिवरी के समय मांसपेशियों को ढीला करने में मदद मिलती है। प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में एसिड रिफ्लक्स की समस्या से बचने के लिए खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

प्रोलेक्टिन हॉर्मोन की अधिकता
प्रोलेक्टिन हॉर्मोन स्तनदुग्ध को बढ़ावा देने वाले ऊतक को उत्तेजित करने का काम करता है। प्रोलेक्टिन का स्तर गर्भावस्था के अंतिम चरण में बढ़ जाता है। ये करीब 10 गुना तक बढ़ जाता है। ये कोलोस्ट्रम को तैयार करने का काम करता है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध यही होता है। इसकी वजह से कभी जन्म से पहले दुग्धस्त्राव भी होने लगता है।

प्रसव के बाद शरीर में होता है ये हॉर्मोनल बदलाव
डिलीवरी के फौरन बाद शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्त्राव होता है। ये डिलिवरी के दौरान होने वाले दर्द को सही करता है। ये हॉर्मोन 24 घंटे के लिए काम करता है। प्लासेंटा के शरीर से बाहर निकलने के बाद एस्ट्रोजन, रिलैक्सिन, एचसीजी और एचपीएल जैसे हॉर्मोन का लेवल कम हो जाता है।
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में होते हैं
ये बदलाव
पीठ या कूल्हे में दर्द
पेट में दर्द
सांस लेने में तकलीफ महसूस होना
स्तन का बढ़ा हुआ महसूस होना
वजन अधिक बढ़ जाना
तरल पदार्थ का योनी से लीक होना
पेट में खिचांव स्ट्रेच मार्क्स के निशान आ जाना
पेट में बच्चे का अधिक मूमेंट फील होना
सोते समय स्थिति बदलने में परेशानी होना

प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में मूड स्विंग
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में हार्मोन के बदलाव के कारण महिलाओं में मूड स्विंग की समस्या बहुत ही सामान्य हैं। ऐसे में अक्सर महिलाएं मूडी हो जाती हैं। कभी-कभी गर्भावस्था में होने वाले मूड स्विंग्स महिला के साथ पार्टनर और परिवार के सामने समस्या खड़ी कर देते हैं। गर्भावस्था के दौरान 20 प्रतिशत महिलाएं इन मूड बदलाव के कारण चिड़चिड़ी और परेशान रहती हैं। इस दौरान आपको लगातार चिंताएं होती हैं जो गर्भावस्था में मूड में बदलाव को बढ़ावा देती हैं। पार्टनर को ऐसे समय में महिला का साथ देना चाहिए और उसे समझना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग के लक्षणों में शामिल हैं,
लगातार एंग्जाइटी और बढ़ता चिड़चिड़ापन
नींद संबंधी परेशानियां
खाने की आदतों में बदलाव
बहुत लंबे समय तक किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता
शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस

नींद न आने की समस्या
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में हार्मोनल बदलाव के कारण जो समस्या सबसे समस्या होती है वो हैं नींद न आना। इस समय में अधिकतर महिलाओं को सोते समय बेचैनी महसूस हो सकती है। कई बार लेट जाने के बाद भी बड़े पेट के कारण महिलाओं को करवट लेने में समस्या महसूस होती है, और वे सो नहीं पाती। इस बारे में एक बार डॉक्टर से बात करें।

हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण होने वाली हाइपरपिग्मेंटेशन से मोल्स और फ्रीकल्स के रंग में बदलाव हो सकता है। हार्मोनल बदलाव की वजह से आपको शरीर में कुछ बदलाव जरुर होंगे। प्रेग्नेंसी में हार्मोन के बदलाव के कारण काले पैच भी बन सकते हैं। स्किन पिगमंटेशन अक्सर गायब हो सकते हैं। बेहतर होगा कि चेंज दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।



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