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5 साल से कम बच्चों को HMPV से क्यों ज्यादा खतरा? डॉक्टर ने बताया पैरेंट्स क्या बरते सावधानियां
चीन में तबाही मचा रहे HMPV वायरस के भारत में 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें 6 एक साल से कम उम्र के शिशु और 2 बच्चे (7 और 13 साल) शामिल हैं। यह वायरस सामान्य सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण देता है, लेकिन गंभीर मामलों में ब्रोंकाइटिस और निमोनिया का रूप ले सकता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा शिशुओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को है। अब
चीन में बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने HMPV वायरस की समीक्षा कर राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं और इंफ्लुएंजा व रेस्पिरेटरी डिजीज पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। डॉ. अशोक गुप्ता प्रोफेसर और हेड डिपार्टमेंट ऑफ नियोनेटोलॉजी, महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर से जानेंगे कि HMPV वायरस बच्चों के लिए खतरनाक है और पेरेंट्स को क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

4 से 6 महीने के बच्चों को ज्यादा खतरा
नवजात शिशुओं को HMPV वायरस का अधिक खतरा है। नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अशोक गुप्ता के अनुसार, 4 से 6 महीने के बच्चों में इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। भारत में भी अधिकतर मामले 1 साल से कम उम्र के शिशुओं में देखे गए हैं। कमजोर इम्यूनिटी वयस्कों में भी संक्रमण का बड़ा कारण है।
बच्चों में इन लक्षणों को न करें इग्नोर
HMPV वायरस के संक्रमण में सामान्य वायरल जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे जुकाम और बुखार। छोटे बच्चों में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। अगर सांस लेने में कठिनाई हो रही हो या घरघराहट सुनाई दे रही हो, तो यह HMPV संक्रमण का संकेत हो सकता है। समय पर उपचार से संक्रमण को गंभीर स्थिति में बदलने से रोका जा सकता है।
घबराने की जरुरत नहीं
डॉक्टर का कहना है HMPV वायरस को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। जब तक यह साबित नहीं होता कि वायरस म्यूटेट हुआ है और इसका नया रूप खतरनाक है, तब तक पैनिक न करें। भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि HMPV कोई नया वायरस नहीं है; यह वर्षों से भारत और अन्य देशों में मौजूद है। अभी तक इसके कारण गंभीर स्थितियां देखने को नहीं मिली हैं।
हालांकि, चीन से आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां HMPV का नया म्यूटेंट अधिक संक्रामक और खतरनाक हो सकता है। फिर भी भारत में वर्तमान स्थिति नियंत्रण में है। सतर्क रहें, लेकिन अनावश्यक घबराहट से बचें।
ठंड में बढ़ जाते हैं मामले
'जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी' में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, ठंड के मौसम में श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। इस दौरान रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन अधिक होते हैं, जो सामान्य फ्लू जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकते हैं, जैसे HMPV। हालांकि, इन लक्षणों पर पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन इन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। बेहतर होगा कि डॉक्टर से एक बार परामर्श लिया जाए और इसके प्रभावी बचाव के उपाय किए जाएं।
साफ सफाई का रखें ध्यान
HMPV (ह्यूमन मेटापनेमोवायरस) वायरस से लड़ने के लिए अभी तक कोई एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा तैयार नहीं की गई है, और न ही इसके लिए कोई वैक्सीन विकसित की गई है। इस वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी और साफ-सफाई है। खासकर अगर घर में छोटा बच्चा है, तो हमें अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए। HMPV वायरस, कोरोना वायरस की तरह, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। यह संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने, उसकी खांसी या छींक से भी फैल सकता है। इसलिए, कोरोना की तरह, HMPV से बचाव के लिए बार-बार हाथ धोना और सतहों की सफाई रखना जरूरी है।
छोटे बच्चों के लिए क्यों है खतरनाक?
नहीं, सभी बच्चों को HMPV वायरस से गंभीर समस्याएं नहीं हो रही हैं। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए उनमें इन्फेक्शन के मामले अधिक होते हैं। हालांकि, गंभीर कॉम्प्लिकेशन उन बच्चों में हो रहे हैं जिनके लंग्स पहले से कमजोर हैं। बाकी संक्रमित बच्चों में सामान्य कोल्ड जैसे लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं।
बुजुर्गों को भी ध्यान रखने की है आवश्यकता
HMPV वायरस से सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत एक साल से कम उम्र के बच्चों और बुजुर्गों को है। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जबकि बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर हो रही होती है। इसके कारण इन दोनों समूहों में HMPV वायरस से इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए इन दोनों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे हाथों की सफाई और संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना।



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