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महिलाओं पर क्या असर डालता है टूटा हुआ रिश्ता
जब कोई लड़की किसी से प्यार करती है तो उस रिश्ते में खुशियां भरने के लिए हर मुश्किल को पार कर लेती है। ऐसा वो अपने पार्टनर के लिए अपने प्यार और विश्वास को साबित करने के लिए भी करती है। जब किसी पुरुष की वजह से रिलेशिनशिप खत्म होता है तो कई बार महिलाओं को तकलीफ होती है। ऐसे कुछ सवाल होते हैं जिनका जवाब अधूरा रह जाता है। इन्हीं में से एक सवाल ये भी है कि रिलेशनशिप का खत्म होना महिलाओं को किस तरह प्रभावित करता है।
रिश्ते को सफल बनाने के लिए बहुत समर्पण की ज़रूरत होती है और महिलाओं से भी इसी की अपेक्षा की जाती है। इस वजह से भी रिश्ते के खत्म होने पर महिलाओं को सबसे ज़्यादा दर्द होता है।
रिलेशनशिप के खत्म होने का महिलाओं पर क्या असर पड़ता है?

दिमाग पर हावी हो जाता है डिप्रेशन
रिलेशनशिप के खत्म होने का दुख दिमाग में लंबे समय तक रहता है। हर महिला इस परिस्थिति से गुज़रती है। टूटे हुए सपनों और भावनाओं का दर्द दिमाग पर हावी होने लगता है। महिलाएं बहुत इमोशनल होती हैं और ये सामान्य भी है क्योंकि महिलाओं को बनाया ही इस तरह से गया है। वो हर काम को अपने दिल की गहराई से करती हैं और प्यार में भी ऐसा ही होता है। अगर वो किसी से सच्चे दिल से प्यार करती हैं तो दर्द सहने के लिए भी तैयार रहती हैं। ब्रेकअप के बाद दिमाग में आक्रोश, क्रोध, निराशा, ईर्ष्या, उदासी और अकेले होने का भय, सब एकसाथ उबाल लेने लगता है। ये वो समय होता है जब महिलाओं का अपने विचारों, कामों और भावनाओं पर कोई नियंत्रण नहीं होता है। उन्हें अपने रिलेशिनशिप का हर एक पल और लम्हा याद आने लगता है।
ये डिप्रेशन तब और भी ज़्यादा भयंकर रूप ले लेता है जब उनका एक्स पार्टनर अपनी ज़िंदगी में खुश रहता है जबकि उन्हें इस रिश्ते के टूटने से दुख होता है। इससे महिलाएं और भी ज़्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। जैसे-जैसे दिन बीतते जाते हैं उन्हें अपने पार्टनर की और ज़्यादा याद सताने लगती है। वो किसी भी तरह से उस रिश्ते को दोबारा से पाने के ख्वाब देखने लगती हैं।
सुस्त हो जाती हैं
महिलाओं के लिए ब्रेकअप का ये हिस्सा भी बहुत दुखद होता है। इस परिस्थिति में महिलाओं को असल में ब्रेकअप का अहसास होता है और उन्हें ये बहुत दर्द देता है। इस दर्द को सहते-सहते वो सुस्त और उदास रहने लगती हैं। उन्हें बात-बात पर गुस्सा आने लगता है और उनके पास अपने लिए कुछ नहीं बचता है। ये उनके लिए और भी ज़्यादा दुखदायी होता है क्योंकि उन्हें अपने दिल का दर्द चेहरे की मुस्कान से छिपाना होता है।
सोच में डूबे रहने की आदत हो जाती है और ऐसे में उन्हें खाने की सुध भी नहीं रहती है। कुछ भी काम करने की ताकत ही नहीं बचती है। ये उदासी कुछ पलों से लेकर कुछ महीनों तक या सालों तक रह सकती है। इसकी अवधि महिलाओं के व्यवहार और उनके आसपास के लोगों पर निर्भर करता है।
मुश्किलों का दौर
सुस्त रहने की वजह से वो बाहरी दुनिया से खुद को अलग कर लेती हैं और इससे उन्हें सब कुछ मुश्किल लगने लगता है। ये कई मुश्किलें कई तरह की हो सकती हैं। जैसे कि कई बार महिलाएं फिर कभी प्यार ना करने का फैसला ले लेती हैं और कई बार खुद को लोगों से दूर रखती हैं, खासतौर पर मर्दों से। इस वजह से महिलाएं खुद को भी नुकसान पहुंचाती हैं। आखिरकार ये सब महिलाओं के मान को ही ठेस पहुंचाता है।
ब्रेकअप के बाद ऐसे हालात में महिलाओं को हर रिश्ता ऐसा ही लगने लगता है। उन्हें लगता है कि हर मर्द ऐसा ही होता है, चाहे फिर वो सच हो या ना हो। रिश्ते के खत्म हो जाने से प्यार से उनका भरोसा ही उठ जाता है।
आदतों को बदलना
कई बार रिश्ते के टूटने पर महिलाएं खुद को वो बनाने लगती हैं जो असल में वो नहीं हैं। अपने अतीत से बाहर निकलने के लिए महिलाएं खुद को उदासी की दुनिया से दूर रखने की कोशिश करती हैं। ये सब करके वो अपनी उदासी को खत्म कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के बारे में सोचती हैं।
रिलेशनशिप के खत्म होने के बाद महिलाओं को इन चार पड़ावों से होकर गुज़रना पड़ता है। इस दर्दभरे पड़ाव से गुज़रने के बाद महिलाएं फिर से मुस्कुराने लगती हैं और अपने अतीत को लेकर कोई पछतावा नहीं रखती।
स्त्री, ईश्वर की सबसे खूबसूरत और जटिल कृति है। उन्हें किसी भी तरह का दर्द ना दें।
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