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Rose Day Urdu Shayari: रोज डे पर महबूब को भेजें ये गुलाब सी महकती हुई शायरियां, खिल उठेगा चेहरा
Rose Day Urdu Shayari : कुदरत ने हर चीज़ को खूबसूरती बख्शी, मगर गुलाब इश्क़ का सबसे हसीन बिम्ब बन गया। इसकी लाल रंगत महबूब के गालों की लाली से मिलती है, और इसकी खुशबू मोहब्बत का पैगाम देती है। वैसे तो वैलेंटाइन डे को इश्क का दिन माना जाता है लेकिन इसकी शुरुआत 7 फरवरी से रोज डे से शुरू हो जाता है।
इश्क़ और गुलाब का रिश्ता पुराना है, जिसका जादू बॉलीवुड की फ़िल्मों और शायरों की ग़ज़लों में हमेशा जिंदा रहेगा। रोज़ डे 2024 के मौके पर, आइए उर्दू शायरी के उन अनमोल नगीनों पर नज़र डालें, जिन्होंने गुलाब को इश्क़ की जुबान बनाया।

रोज डे पर उर्दू शायरी|Rose Day Urdu Shayari
1. मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी
2. कभी गुलाब से आने लगी महक उस की
कभी वो अंजुम ओ महताब से निकल आया
- महबूब ज़फ़र
3. सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
- जावेद अनवर
4. बिछे थे राहों में फूल कितने
जो भा गया वो गुलाब हो तुम
- साइमा नसीम बानो
5. फिर याद आ गए वही कॉलेज के दिन मुझे
सूखे गुलाब निकले पुरानी किताब से
- शायान क़ुरैशी
6. दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब
7. निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन
मैं भागता हूं तिरे पीछे और तू जुगनू बन
- जावेद अनवर
8. मैं ने भेजी थी गुलाबों की बशारत उस को
तोहफ़तन उस ने भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा भेजी है
- हामिद सरोश
9. भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
- अहमद फ़राज़
10. आप छू देखें किसी ग़ुंचे को अपने हाथ से
ग़ुंचा गुल हो जाएगा और गुल चमन हो जाएगा
11. नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
- बशीर बद्र
12. सी है सूखे गुलाबों की बात सांसों में
कोई ख़याल किसी याद के हिसार में है
- ख़ालिदा उज़्मा



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