Latest Updates
-
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में कौन करता है सबसे पहले शाही स्नान? आम जनता को कब मिलता है मौका
Maha Kumbh 2025: जनवरी 2025 में होने जा रहा महा कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और विश्वास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है।
यह मेला आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और इसका उल्लेख भारतीय महाकाव्यों में भी मिलता है। यह पर्व पौष माह की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है और महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होता है। यानी, 13 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ मेला शुरू होगा और इसका समापन 26 फरवरी 2025 को होगा।

हर बार 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस महाकुंभ का महत्व इस बार और भी अधिक बढ़ जाता है। शाही स्नान का इस मेले में विशेष स्थान है, क्योंकि इसे अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि बिना शाही स्नान किए महाकुंभ के सभी लाभ प्राप्त नहीं हो पाते।
कौन करता है महाकुम्भ का सबसे पहला शाही स्नान?
महाकुंभ मेला एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है, जो भारतीयों की गहरी आस्था का प्रतीक भी है। इस भव्य मेले का मुख्य आकर्षण शाही स्नान होता है, जिसमें सबसे पहले स्नान करने का विशेष अधिकार नागा साधुओं को प्राप्त होता है। इसके पीछे धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कारण निहित हैं। शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महाकुंभ के शाही स्नान का पहला अवसर केवल नागा साधुओं को ही प्राप्त होता है। नागाओं का विशेष स्नान एक धार्मिक, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक परंपराओं का मिलन होता है।
शाही स्नान में अगला क्रम
महाकुंभ में नागा साधुओं के बाद स्नान करने का अधिकार संत समाज को होता है। संत समाज के स्नान के बाद ही सामान्य गृहस्थों को संगम नदी में स्नान करना चाहिए। यह जरूरी है कि किसी भी स्थिति में नागा साधुओं या संतों से पहले स्नान नहीं किया जाए।
गृहस्थ लोगों को शाही स्नान के समय यह ध्यान देना चाहिए कि वे किसी भी अशुद्ध चीज़ का प्रयोग ना करें। साबुन या शैम्पू का उपयोग ना करें, और ना ही इसे नदी में डालें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
