Latest Updates
-
April Fool's Day 2026: लंगोटिया यारों की 'बत्ती गुल' कर देंगे ये फनी मैसेजेस, हंसी रोकना होगा मुश्किल -
Lucky Signs: घर से निकलते समय इन 5 चीजों का दिखना माना जाता है बेहद शुभ, समझ जाएं जल्द बदल सकती है किस्मत -
Mysterious Temples Of India: भारत के 5 रहस्यमयी मंदिर, जहां का प्रसाद घर ले जाना होता है मना -
नारियल या सरसों का तेल? बालों की ग्रोथ के लिए कौन है नंबर-1, जानें सफेद बालों का पक्का इलाज -
April Fool's Pranks: अपनों को बनाना चाहते हैं अप्रैल फूल? ट्राई करें ये प्रैंक्स, हंस-हंसकर हो जाएंगे लोटपोट -
Mahavir Jayanti 2026: अपने बेटे के लिए चुनें भगवान महावीर के ये 50+ यूनीक नाम, जिनका अर्थ है बेहद खास -
डायबिटीज के मरीज ब्रेकफास्ट में खाएं ये 5 चीजें, पूरे दिन कंट्रोल रहेगा ब्लड शुगर लेवल -
Today Bank Holiday: क्या आज बंद रहेंगे बैंक, स्कूल और शेयर बाजार; जानें आपके शहर का क्या है हाल -
Mahavir Jayanti 2026 Wishes:अहिंसा का दीप जलाएं…इन संदेशों के साथ अपनों को दें महावीर जयंती की शुभकामनाएं -
Mahavir Jayanti Quotes 2026: 'जियो और जीने दो', महावीर जयंती पर अपनों को शेयर करें उनके अनमोल विचार
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में कौन करता है सबसे पहले शाही स्नान? आम जनता को कब मिलता है मौका
Maha Kumbh 2025: जनवरी 2025 में होने जा रहा महा कुंभ मेला भारतीय संस्कृति और विश्वास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है।
यह मेला आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और इसका उल्लेख भारतीय महाकाव्यों में भी मिलता है। यह पर्व पौष माह की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है और महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होता है। यानी, 13 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ मेला शुरू होगा और इसका समापन 26 फरवरी 2025 को होगा।

हर बार 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस महाकुंभ का महत्व इस बार और भी अधिक बढ़ जाता है। शाही स्नान का इस मेले में विशेष स्थान है, क्योंकि इसे अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि बिना शाही स्नान किए महाकुंभ के सभी लाभ प्राप्त नहीं हो पाते।
कौन करता है महाकुम्भ का सबसे पहला शाही स्नान?
महाकुंभ मेला एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है, जो भारतीयों की गहरी आस्था का प्रतीक भी है। इस भव्य मेले का मुख्य आकर्षण शाही स्नान होता है, जिसमें सबसे पहले स्नान करने का विशेष अधिकार नागा साधुओं को प्राप्त होता है। इसके पीछे धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कारण निहित हैं। शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महाकुंभ के शाही स्नान का पहला अवसर केवल नागा साधुओं को ही प्राप्त होता है। नागाओं का विशेष स्नान एक धार्मिक, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक परंपराओं का मिलन होता है।
शाही स्नान में अगला क्रम
महाकुंभ में नागा साधुओं के बाद स्नान करने का अधिकार संत समाज को होता है। संत समाज के स्नान के बाद ही सामान्य गृहस्थों को संगम नदी में स्नान करना चाहिए। यह जरूरी है कि किसी भी स्थिति में नागा साधुओं या संतों से पहले स्नान नहीं किया जाए।
गृहस्थ लोगों को शाही स्नान के समय यह ध्यान देना चाहिए कि वे किसी भी अशुद्ध चीज़ का प्रयोग ना करें। साबुन या शैम्पू का उपयोग ना करें, और ना ही इसे नदी में डालें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











