मानसून में डायबिटीज के मरीज पैरों का ख्याल कैसे रखें? डॉक्टर से जानें आसान फुट केयर टिप्स

मानसून आते ही मौसम सुहाना जरूर हो जाता है, लकिन इस दौरान नमी और गंदगी बढ़ने से इंफेक्शन और स्किन से जुड़ी दिक्कतों का खतरा भी बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीजों को इस मौसम में अपने पैरों की खास देखभाल करनी चाहिए। दरअसल, हाई ब्लड शुगर के कारण पैरों में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है और नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। ऐसे में, पैर पर लगी एक मामूली सी चोट, छोटा सा फफोला या फंगल इंफेक्शन भी बड़ी समस्या बन सकता है। यही वजह है कि बरसात के मौसम में पैरों की देखभाल को डायबिटीज मैनेजमेंट का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है।

'ज्ञान बाय गणेश - मेकिंग इंडिया विन ओवर डायबिटीज' (Gyaan by Ganesh - Making India Win Over Diabetes), सन फार्मा और अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की एक जागरूकता पहल है। इसका मकसद विशेषज्ञों की जानकारी के ज़रिए भारतीयों को डायबिटीज को बेहतर ढंग से समझने, उससे बचाव करने और उसे मैनेज करने में मदद करना है।

Monsoon Diabetes Foot Care

मानसून में डायबिटीज के मरीजों के पैरों को खतरा ज्यादा क्यों रहता है?

"बरसात में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे पैरों में पसीना, गीलापन और गंदगी आसानी से जमा होने लगती है. यही माहौल बैक्टीरिया और फंगस को पनपने के लिए एकदम अनुकूल होता है। अब अगर डायबिटीज़ की वजह से पैरों में सुन्नपन आ चुका हो, तो व्यक्ति को छोटी चोट, कट या छाले का एहसास तक नहीं हो पाता। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है और कई बार अस्पताल भर्ती होने तक की नौबत ला सकती है।"

Dr. Mohammad Aquiqe, MBBS MD Medicine, Bareilly

Dr Mohammad Aquiqe

मानसून में डायबिटीज के मरीज कैसे करें फुट केयर

पैरों को साफ और सूखा रखना न भूलें

बारिश में बाहर से घर लौटते ही पैरों को साफ पानी और हल्के साबुन से धोएं। इसके बाद मुलायम तौलिये से पैरों को अच्छी तरह सुखाएं। उंगलियों के बीच की जगह को खास तौर पर सुखाना जरूरी है, क्योंकि वहां नमी रह जाने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। गीले मोजे या जूते ज्यादा देर तक पहनकर न रखें। अगर मोजे गीले हो जाएं तो उन्हें तुरंत बदल लें।

रोज अपने पैरों की जांच करें

अगर आपको डायबिटीज है, तो रोज पैरों की जांच करने की आदत डाल लीजिए। पैरों पर कट, छाला, लाल निशान, सूजन, फटी एड़ियां, स्किन के रंग में बदलाव या किसी तरह का घाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें।

जूते-चप्पल चुनते समय रखें ध्यान

मानसून में कई लोग गीले जूते या चप्पल घंटों पहने रहते हैं, जो इंफेक्शन को न्योता देने जैसा है। डायबिटीज के मरीजों को ऐसे जूते चुनने चाहिए जो पहनने में आरामदायक हों, पैरों को अच्छा सपोर्ट दें और जल्दी सूख जाएं। बहुत टाइट या बहुत ढीले जूते न पहनें, क्योंकि इससे पैरों में रगड़ और छाले हो सकते हैं। घर के अंदर भी नंगे पैर घूमने से बचें, क्योंकि पैरों में चोट लगने पर डायबिटीज के मरीजों में समस्या गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है।

फंगल इंफेक्शन के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर उंगलियों के बीच खुजली, जलन, सफेद परत, लालिमा या बदबू जैसी समस्या हो रही है, तो यह फंगल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। डायबिटीज में किसी भी इंफेक्शन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से कोई क्रीम या दवा लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

ब्लड शुगर कंट्रोल में रहना है सबसे जरूरी

फुट केयर सिर्फ बाहरी सफाई तक सीमित नहीं है। अगर ब्लड शुगर लगातार हाई बना रहे, तो घाव भरने में ज्यादा समय लग सकता है और इंफेक्शन का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं या इंसुलिन लें, ब्लड शुगर की नियमित जांच करें, संतुलित डाइट लें और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित एक्सरसाइज करें।

नाखूनों का भी रखें ख्याल

पैरों के नाखून काटते समय उन्हें बहुत छोटा न करें और कोशिश करें कि उन्हें सीधा काटें। नाखूनों के कोनों को बहुत गहराई से काटने पर इनग्रोन नेल की समस्या हो सकती है। इससे त्वचा में चोट और इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। अगर नाखून बहुत मोटे हो गए हैं या उन्हें काटने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर या प्रशिक्षित फुट केयर एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर है।

घरेलू नुस्खों के भरोसे न बैठें

पैर में कोई घाव, छाला या इंफेक्शन हो जाए तो घरेलू नुस्खे, हर्बल लेप या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक क्रीम लगाने से बचना चाहिए। इससे कई बारसमस्या बढ़ सकती है। अगर घाव 24-48 घंटे में ठीक न हो, या दर्द, सूजन, मवाद, बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

छोटी सावधानियां अपनाकर टाल सकते हैं खतरा

मानसून के दौरान डायबिटीज मरीजों के लिए पैरों की देखभाल कोई मामूली आदत नहीं, बल्कि बड़ी दिक्कतों से बचने का एक कारगर तरीका है। पैर साफ-सूखे रखना, रोज उनकी जांच करना, सही जूते पहनना, शुगर कंट्रोल में रखना, और किसी भी घाव या इंफेक्शन को नजरअंदाज न करना छोटी लेकिन जरूरी सावधानियां हैं। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर डायबिटीज से जुड़ी पैरों की गंभीर समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) सटीक एवं समयानुकूल जानकारी उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन इसकी पूर्ण सटीकता होने की कोई गारंटी नहीं देता। कृपया अपने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए केवल अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर ही भरोसा करें। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) को पूर्व सूचना दिए बिना इस सामग्री के किसी भी भाग को यांत्रिक या इलेक्ट्रॉनिक किसी भी माध्यम से पुनर्प्रकाशित, प्रसारित या संग्रहित नहीं किया जा सकता। SPI-IN-CVD-ZT---08-20260330

Story first published: Tuesday, October 6, 2026, 20:03 [IST]
Desktop Bottom Promotion