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International women’s day 2023: भारत की 10 महिलाएं जो बनीं महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

भीड़ का अनुसरण करने वाली महिला आमतौर पर भीड़ से आगे नहीं जाती। जो महिला अकेली चलती है वह खुद को उन जगहों पर पाती है जहां पहले कभी कोई नहीं गया था। अल्बर्ट आइंस्टीन की ये लाइन्स आज भी महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देने के लिए काफी है। हमारा देश पुरुष-प्रधान है। जहां महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की चलती है। लेकिन आज के समय में देश की महिलाएं भी पुरुषों से कदम से कदम मिला कर चल रही हैं और कई क्षेत्रों में पुरुषों को भी पीछे छोड़ रही हैं।
इंटरनेशनल वुमन्स डे आ रहा है। इस मौके पर आइए भारत की कुछ ऐसी महान महिलाओं के बारे में जानते हैं। जिन्होंने न सिर्फ अपने कार्य क्षेत्र बल्कि दुनियाभर में अपना और देश का नाम रोशन किया है। ऐसी महिलाएं जो न सिर्फ खुद के लिए बल्कि दुनियाभर की महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही महिलाओं के बारे में जो हम सभी के लिए एक इंस्पिरेशन हैं।
1. गीता गोपीनाथ
गीता गोपीनाथ एक हार्वर्ड अर्थशास्त्री हैं जो IMF - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में मुख्य अर्थशास्त्री का पद पाने वाली भारत की पहली भारतीय बनीं। वह मूल रूप से केरल की रहने वाली हैं और एक किसान की बेटी हैं। गीता गोपीनाथ IMF के उप प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्यरत हैं।
2. हिमा दास
हिमा दास फ़िनलैंड के टाम्परे में आयोजित IAAF वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2018 में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट (स्प्रिंट रनर) हैं। बाद में, उन्होने जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किया। हिमा दास ने 400 मीटर की दौड़ को 51.46 सेकेंड में पूरा कर गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया। हिमा दास असम के ढिंग शहर के एक किसान की बेटी है। जिन्होने 18 साल की छोटी उम्र में महज 20 दिनों में 5 गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
3. मैरी कॉम
चुंग्नेइजैंग मैरी कॉम ह्मंगते मणिपुर की एक भारतीय ओलंपिक मुक्केबाज़ हैं। मैरी कॉम एशियाई खेलों में बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। मैरी कॉम एशियन वूमेंस बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 5 गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। आखिरी बार 2017 में उन्होंने हो ची मिन्ह सिटी को हराकर गोल्ड मेडल जीता था।
4.अवनी चतुर्वेदी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अवनी चतुर्वेदी, एक युवा भारतीय वायु सेना अधिकारी, 'मिग -21 बाइसन' को अकेले उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला फाइटर पायलट बनीं। मिग-21 बाइसन दुनिया में 340 किमी प्रति घंटे की अपनी सबसे ऊंचे टेक-ऑफ और लैंडिंग स्पीड के लिए जानी जाती हैं। अवनी ने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर कई महिलाओं को प्रेरित किया है।
5. किरण मजूमदार-शॉ
किरण मजूमदार-शॉ ने 1978 में अपना उद्यम- बायोकॉन शुरू किया। आज वह फोर्ब्स की दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में 60वें स्थान पर हैं और भारत की सबसे अमीर सेल्फ मेड महिला अरबपति हैं। वह वर्तमान में बायोकॉन लिमिटेड की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं और भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर की अध्यक्ष भी हैं। भारत सरकार ने उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया है और उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित भी किया गया है।
6. मदर टेरेसा
मदर टेरेसा एक कैथोलिक नन हैं जिन्होंने अपना जीवन गरीबों और बीमारों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। मदर टेरेसा को उनके मानवीय कार्यों के लिए 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।
7. कल्पना चावला
कल्पना चावला के बारे में हम सभी बचपन से अपनी किताबों में पढ़ते आ रहे हैं। अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला, कल्पना चावला नासा की अंतरिक्ष यात्री थीं, जिनकी 2003 में स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी।
8. किरण बेदी
भारत की पहली महिला पुलिस अधिकारी, किरण बेदी लॉ एनफोर्समेंट के प्रति अपने सख्त रवैये के लिए जानी जाती हैं और उन्होंने अपने काम के लिए कई पुरस्कार भी जीते हैं। वर्तमान में किरन बेदी पुदुचेरी की उपराज्यपाल हैं। सन 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में सम्मिलित होने वाली वे पहली महिला अधिकारी हैं।
9. सुनीता विलियम्स
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में 300 से अधिक दिन बिताए हैं और कई स्पेसवॉक किए हैं। आज के समय में वो कई महिलाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हैं।
10. लता मंगेशकर
एक प्रसिद्ध गायिका और संगीतकार, लता मंगेशकर अपनी सुरीली आवाज के लिए जानी जाती हैं और उन्होंने विभिन्न भाषाओं में हजारों गाने रिकॉर्ड किए हैं। बच्चे से लेकर बुजुर्ग सभी लोगों के जुबां पर हमें इनके गाने मिल जाएंगे। संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर ने अलग ही मुकाम हासिल किया।



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