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Shri Ram Aarti: हर संकट से 'राम' नाम ही लगाएगा बेड़ा पार, इस राम स्तुति से बजरंगबली का भी मिलेगा आशीर्वाद
प्रभु श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका मर्यादित और आदर्श जीवन आज भी लोगों को प्रेरित करता है। उनका जन्म भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ।
प्रभु श्री राम के परम भक्त के रूप में बजरंगबली को ही याद किया जाता है। पवनसुत हनुमान केवल जय श्री राम का जप कर लंका का नाश कर आए थे।

भगवान राम का आशीर्वाद जिस जातक को मिलता है उसके जीवन की समस्याएं भी स्वाहा होते देर नहीं लगती हैं। आज हम भगवान श्री राम को प्रसन्न करने के लिए उनकी आरती लेकर आए हैं। इस स्तुति से भगवान राम के साथ उनके भक्त हनुमान जी भी प्रसन्न होते हैं। प्रभु श्री राम की विधि विधान से पूजा के बाद ये आरती जरूर पढ़ें।
श्री राम जी की आरती
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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