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कुछ मिनटों के लिए धरती पर छा जाएगा अंधेरा, जानें कब लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण?
Solar Eclipse 2027: ब्रह्मांड की असीम गहराइयों में होने वाली खगोलीय घटनाओं को लेकर भारत सहित पूरी दुनिया में हमेशा से एक अलग कौतूहल रहा है। जब बात सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण की हो, तो लोगों के अपने-अपने तर्क होते हैं। आधुनिक सोच रखने वाले लोग जहां इसे एक वैज्ञानिक और अद्भुत खगोलीय घटना के रूप में देखते हैं, वहीं पुरानी मान्यताओं और ज्योतिष विज्ञान में विश्वास रखने वाले लोग इसे शुभ और अशुभ की दृष्टि से आंकते हैं। लेकिन बहुत जल्द आसमान में एक ऐसी दुर्लभ और अनोखी घटना घटने जा रही है, जिसे देखने के बाद विज्ञान और परंपरा दोनों से जुड़े लोग हैरान रह जाएंगे। हम बात कर रहे हैं इस सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) की, जिसके लगते ही दिन के उजाले में भी धरती पर कुछ मिनटों के लिए पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा। आसमान और सितारों को निहारने का शौक रखने वालों के लिए यह नजारा बेहद खास होने वाला है। हालांकि, इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना होगा, क्योंकि यह घटना साल 2026 में नहीं बल्कि साल 2027 में घटने वाली है। आइए जानते हैं कब लगेगा यह ऐतिहासिक सूर्य ग्रहण, यह इतना लंबा क्यों होने वाला है और क्या भारत के लोग इस अद्भुत नजारे के गवाह बन पाएंगे या नहीं?

कब लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण?
खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले दुनिया भर के वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। नासा की गणना के मुताबिक, 2 अगस्त 2027 को इस सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस ग्रहण की सबसे खास बात इसकी अवधि है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण अपनी अधिकतम सीमा पर पूरे 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगा। इतनी लंबी अवधि का पूर्ण सूर्य ग्रहण इससे पहले साल 1991 में देखा गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि 2027 के बाद इतना लंबा और गहरा सूर्य ग्रहण देखने के लिए इंसानों को अगली सदी यानी साल 2114 तक का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। यही वजह है कि इसे 'सदी का सबसे खास सूर्य ग्रहण' कहा जा रहा है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह शानदार नजारा? (Will it be visible in India?)
अब सबसे बड़ा सवाल जो हर भारतीय के मन में उठ रहा है, वह यह कि क्या हम इस अद्भुत नजारे को भारत से देख पाएंगे? तो इसका जवाब है नहीं। यह दुर्लभ सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोलविदों के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग दक्षिणी स्पेन से शुरू होकर उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व (Middle East) के देशों तक फैलेगा। यह ट्यूनीशिया, लीबिया और मिस्र (Egypt) जैसे देशों में सबसे साफ और सबसे लंबी अवधि तक दिखाई देगा। मिस्र का ऐतिहासिक शहर लक्सर (Luxor) इस अद्भुत घटना का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। यहां पूर्ण सूर्य ग्रहण करीब 6 मिनट 19 सेकंड तक दिखाई देगा। प्राचीन मिस्र के पिरामिडों, मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के पीछे जब दिन में अंधेरा छाएगा, तो वह नजारा दुनिया भर के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए अविस्मरणीय होगा।
आखिर इतना लंबा क्यों होगा यह सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच इस तरह आ जाता है कि वह सूर्य की रोशनी को पूरी तरह से रोक लेता है। 2 अगस्त 2027 को होने वाले ग्रहण के लंबा होने के पीछे एक विशेष भौगोलिक कारण है। उस दिन चंद्रमा अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के सबसे नजदीक यानी 'पेरिजी' (Perigee) के आसपास होगा। जब चंद्रमा पृथ्वी के करीब होता है, तो वह आसमान में अपने सामान्य आकार से थोड़ा बड़ा दिखाई देता है। बड़ा दिखने के कारण वह सूर्य की चक्रिका को ज्यादा देर तक ढक कर रख पाएगा, जिससे ग्रहण की अवधि सामान्य सूर्य ग्रहणों की तुलना में काफी लंबी हो जाएगी।
NASA क्यों मान रहा है इसे इस सदी की सबसे बड़ी घटना?
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस ग्रहण की विशेषता सिर्फ इसका समय नहीं है, बल्कि इसकी स्थिति भी है। इस ग्रहण का जो 'अधिकतम बिंदु' होगा, वह ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में पड़ेगा जहां सूर्य लगभग सिर के ठीक ऊपर होगा। जब सूर्य बिल्कुल ऊपर होता है, तो चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ती है। इस धीमी गति के कारण उस क्षेत्र में पूर्ण अंधेरे का समय बढ़ जाता है। इसी अद्भुत तालमेल के कारण वैज्ञानिक इसे 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खगोलीय घटनाओं में से एक मान रहे हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।
2 अगस्त 2027 को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक यानी 'पेरिजी' (Perigee) की स्थिति में होगा। बड़ा दिखने के कारण चंद्रमा सूर्य को ज्यादा देर तक ढक कर रख पाएगा, जिससे ग्रहण की अवधि बढ़ जाएगी।
नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका मुख्य मार्ग दक्षिणी स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों से होकर गुजरेगा।



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