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कहीं आप असली के नाम पर डुप्लीकेट कांजीवरम साड़ी तो नहीं पहन रही हैं, इन 5 तरीकों से ठगने से बचें
How To Identify a Pure Kanjivaram Silk Saree : साउथ इंडिया की फेमस कांजीवरम साड़ियां अपनी भव्यता की वजह से देश- विदेश में फेमस हे। ये साड़ियां 100% शुद्ध सिल्क से बनती हैं। कई महिलाओं में कांजीवरम साड़ी को लेकर क्रेज देखने को मिलता है।
इन सुंदर साड़ियों की लोकप्रियता को देखते हुए बाज़ार में इनकी नकली कॉपियां भी काफी मिलने लगी हैं। ऐसे में एक असली कांजीवरम साड़ी की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। हालाँकि, कुछ बातों का ध्यान रखकर आप आसानी से असली कांजीवरम साड़ी की पहचान कर सकते हैं। आइए जानते कि कैसे कांजीवरम साड़ी खरीदते वक्त आप असली और नकली में पहचान कर खुद को ठगने से बचा सकते हैं।

कांचीपुरम से नाम मिला कांजीवरम
कांजीवरम साड़ियां दक्षिण भारत से संबंधित हैं। कांजीवरम साड़ी का ताल्लुक तमिलनाडु के छोटे से कस्बे कांचीपुरम से है। इसे कांचीपुरम सिल्क भी कहते हैं। इसकी विशेषता मुगल-प्रेरित डिजाइन है जैसे कि जटिल इंटरलीनिंग फ्लोरल और फोलेट मोटिफ्स और बेल, ऊपर की ओर पत्तियों वाला डिजाइन जिसे झालर कहते है। अपने डिजाइन और पैटर्न की गहनता के आधार पर एक साड़ी को बनाने में 15 दिन से एक महीने तक और कभी-कभी तो छह महीने तक का समय लगता है। साथ ही, इसकी क्वालिटी और धागों के डिजाइन के अनुसार इसकी कीमत भी निर्धारित होती है।
वजन
असली कांजीवरम साड़ी भारी नहीं होती है क्योंकि इसमें अधिकतर सिल्क का प्रयोग किया जाता है। असली कांजीवरम साड़ियां बहुत हल्की होती हैं क्योंकि ये शुद्ध सिल्क से बनी होती हैं। नकली साड़ियों में मिश्रित सिल्क का इस्तेमाल होता है जिससे वे भारी हो जाती हैं। इसलिए अगर आपको साड़ी का वजन ज्यादा लगें तो समझ जाइए कि वह असली नहीं है।
धागा
असली कांजीवरम साड़ियों में रेशमी धागे का इस्तेमाल होता है जो बहुत ही महीन और चमकीले होते हैं, नकली साड़ियों में सस्ते और घटिया क्वालिटी के धागे लगे होते हैं। असली साड़ी के धागे मजबूत भी होते हैं और आसानी से टूटते नहीं। इसलिए धागों की क्वालिटी और टिकाऊपन की जांच कर लें। यह असली कांजीवरम साड़ी की पहचान का एक अच्छा तरीका है।
डिजाइन और पैटर्न
कांजीवरम साड़ियों में आमतौर पर बड़े डिजाइन और परंपरागत पैटर्न होते हैं। असली कांजीवरम साड़ियों पर बुने गए डिजाइन और पैटर्न बेहद जटिल और खूबसूरत होते है। इन डिजाइनों में सिल्क पर हाथ से की गई बारीक कढ़ाई दिखती है। नकली साड़ियों पर आसान और सरल डिजाइन होते हैं जो मशीन से बने होते हैं।
रिवर्स साइड पर डिज़ाइन
असली कांजीवरम साड़ी की पहचान के लिए उसके पल्लू या डिज़ाइन वाले हिस्से को उलटकर देखें। अगर आपको डिज़ाइन की दूसरी तरफ धागे ही धागे दिखाई दे, तो यह असली है।
जरी से भी की जाती है पहचान
असली और नकली कांजीवरम की पहचान जरी से भी की जा सकती है। इसके लिए साड़ी में जरी के ढीले सिरे को देखें कि जरी को खींचने पर अगर रेशम का धागा लाल नहीं बल्कि सफेद या किसी अन्य रंग का है, तो समझ जाएं कि वह असली कांजीवरम रेशम की साड़ी नहीं है। क्योंकि शुद्ध जरी लाल रेशमी धागे से बनी होती है, जिसे चांदी के धागे से घुमाया जाता है और फिर 22 कैरेट शुद्ध सोने में डुबोया जाता है।
धागे को जलाकर देखें
कांजीवरम की शुद्धता जांचने के लिए उसके धागे को जलाकर कर सकते हैं। इसके लिए आप ताने और बाने से कुछ धागे निकाल लें और धागों के सिरे पर आग लगा दें। जब आग बंद हो जाए, तो आपको राख का एक गोला पीछे छूटा हुआ मिलेगा। इस गेंद को अपने हाथ में लें और इसे सूंघने के लिए रगड़ें। आपको जले हुए बालों या जले हुए चमड़े की गंध जैसी गंध आएगी।
अगर ऐसा है, तो आप असली कांजीवरम सिल्क साड़ी खरीद रहे हैं। अगर साड़ी को कृत्रिम रेशों का उपयोग करके बनाया गया है, तो जलने पर कोई राख नहीं होगी। आप ऐसे रेशों को जलाने पर एक चमक देखेंगे जो आम है। ऐसे में बालों के जलने की गंध नहीं आएगी।



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