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दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'!
AC Explosion Reasons In Hindi: जैसे ही भीषण गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू किया है, लगातार एसी ब्लास्ट की खबरें आ रही हैं। विवेक विहार में एसी ब्लास्ट हादसे में कई लोगों की जिंदगी खत्म हो गई तो इंदिरापुरम में कई घर जलकर खाक हो गए। अब फिर दक्षिण दिल्ली के पॉश हौज खास इलाके में एसी ब्लास्ट के बाद लगी आग से विश्व बैंक के पूर्व एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार गर्ग (80) की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से झुलस गया। इन हादसों ने आम जनता के मन में ऐसा खौफ पैदा कर दिया है कि लोग अब इसका इस्तेमाल करने से भी डरने लगे हैं। आइए जानते हैं कि भीषण गर्मी के कारण फटता है एसी या वे कौन सी 4 बड़ी गलतियां हैं जिन्हें आपको आज ही सुधारने की जरूरत है ताकी ऐसे हादसों को रोका जा सके।

क्यों ठंडक देने की जगह बम साबित हो रहे हैं AC?
प्रचंड गर्मी से राहत के लिए लोग एसी चलाते हैं लेकिन अब वही एसी मौत का कारण बन रहे हैं। दरअसल, एक एयर कंडीशनर के काम करने का तरीका रेफ्रिजरेटर से काफी मिलता-जुलता है। इसमें एक कंप्रेसर होता है, जो हाई-प्रेशर पर गैस (रेफ्रिजरेट) को पूरे सिस्टम में घुमाता है ताकि कमरा ठंडा हो सके। इस पूरी प्रक्रिया में भारी मात्रा में हीट यानी गर्मी पैदा होती है, जिसे आउटडोर यूनिट के जरिए बाहर फेंक दिया जाता है। समस्या तब शुरू होती है जब लगातार चलने के कारण या किसी खराबी की वजह से यह पैदा होने वाली गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। ऐसी स्थिति में कंप्रेसर के अंदर का तापमान और दबाव बर्दाश्त की सीमा से बाहर हो जाता है। जब दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो कंप्रेसर मेटल बॉडी को फाड़ते हुए एक जोरदार धमाके के साथ फट जाता है।

क्या नई R-32 गैस है ब्लास्ट की असली वजह?
आजकल बाजार में मिलने वाले ज्यादातर नए इनवर्टर एसी में R-32 रेफ्रिजरेटर गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पहले पुरानी मशीनों में R-22 या R-410A जैसी गैसें भारी मात्रा में इस्तेमाल होती थीं। सवाल ये उठता है कि क्यों चुनी गई R-32? दरअसल, यह गैस पर्यावरण के अनुकूल है, ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचाती और इसकी कूलिंग क्षमता भी बहुत शानदार है। हालांकि ये गैस पहले वाली गैस से ज्यादा ज्वलनशील है लेकिन एक्पर्ट्स का मानना है कि सिर्फ गैस का मौजूद होना ब्लास्ट की वजह नहीं बन सकता। जब तक एसी की वायरिंग में कोई बड़ा शॉर्ट सर्किट न हो या गैस लीक होकर कंप्रेसर की अत्यधिक गर्मी के संपर्क में न आए, तब तक R-32 गैस अपने आप कभी नहीं फटती। इसलिए गैस से डरने के बजाय सिस्टम के रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है।

आपकी ये 4 बड़ी गलतियां AC को बना रही हैं 'टाइम बम'
अगर आप भी नीचे दी गई गलतियों में से कोई एक कर रहे हैं, तो आप अनजाने में एक बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं:
1. बिना ब्रेक के लगातार 24-24 घंटे AC चलाना
मशीनों की भी अपनी एक सीमा होती है। इस भीषण गर्मी में जब एसी लगातार बिना किसी ब्रेक के चलता रहता है, तो उसके कंप्रेसर को ठंडा होने का समय नहीं मिलता। लगातार ओवरहीटिंग के कारण कंप्रेसर के अंदर का ऑयल सूख जाता है, घर्षण बढ़ता है और अंततः वह ब्लास्ट हो जाता है।
2. आउटडोर यूनिट के वेंटिलेशन को ब्लॉक करना
घरों में अक्सर लोग जगह बचाने या सुरक्षा के चक्कर में आउटडोर यूनिट को बहुत तंग बालकनी, लोहे के पिंजरों या ऐसी जगह फिट कर देते हैं जहां हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन नहीं होता। जब आउटडोर यूनिट अपनी गर्म हवा बाहर नहीं फेंक पाती, तो वही गर्म हवा दोबारा सिस्टम के अंदर घूमने लगती है, जिससे तापमान जानलेवा स्तर तक बढ़ जाता है।
3. गंदे फिल्टर्स और सर्विसिंग में भयंकर लापरवाही
अगर आपने सीजन शुरू होने से पहले अपने एसी की प्रोफेशनल सर्विसिंग नहीं कराई है, तो आप रिस्क ले रहे हैं। एसी के इनडोर और आउटडोर फिल्टर्स में जमी धूल हवा के फ्लो को रोक देती है। हवा न मिलने के कारण कंप्रेसर को कमरा ठंडा करने के लिए दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है, जिससे वह बहुत जल्दी गर्म होकर ट्रिप होने या फटने की कगार पर पहुंच जाता है।
4. लोकल स्पेयर पार्ट्स, गैस रीफिलिंग और बिना स्टेबलाइजर के चलाना
पैसे बचाने के चक्कर में किसी भी लोकल मैकेनिक से घटिया क्वालिटी की रेफ्रिजरेट गैस भरवा लेना या लोकल वायर लगवाना सबसे घातक साबित होता है। इसके अलावा, गर्मियों में होने वाले वोल्टेज फ्लक्चुएशन से निपटने के लिए अगर अच्छे ब्रांड का स्टेबलाइजर न लगा हो, तो शॉर्ट सर्किट के कारण सीधे कंप्रेसर में आग लग जाती है।
5. हमेशा ब्रांडेड AC चुनें और BEE रेटिंग जरूर देखें
सस्ते के चक्कर में किसी भी लोकल या अनब्रांडेड असेंबल्ड एसी को खरीदने की गलती कभी न करें। हमेशा भरोसेमंद और स्थापित ब्रांड्स का ही चुनाव करें। इनके सुरक्षा फीचर्स (जैसे ऑटो-कट ऑफ और थर्मल ओवरलोड प्रोटेक्टर) बहुत एडवांस होते हैं। साथ ही, बिजली की बचत और बेहतर कंप्रेसर लाइफ के लिए BEE (Bureau of Energy Efficiency) स्टार रेटिंग देखकर ही एसी खरीदें।
दुर्घटना किसी भी एसी में हो सकती है यदि उसकी सर्विसिंग न की गई हो। हालांकि, पुराने नॉन-इन्वर्टर एसी का कंप्रेसर बार-बार पूरी ताकत से चालू और बंद होता है, जिससे बिजली के लोड पर ज्यादा असर पड़ता है। वहीं नए इनवर्टर एसी में R-32 जैसी हल्की ज्वलनशील गैस होने के कारण यदि उसमें गैस लीकेज के साथ शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो आग तेजी से फैल सकती है। इसलिए दोनों ही मामलों में रखरखाव और सही वायरिंग सबसे ज्यादा मायने रखती है।
सी में कोई भी बड़ा हादसा होने से पहले कुछ चेतावनी भरे संकेत मिलते हैं:
इनडोर या आउटडोर यूनिट से कुछ जलने (प्लास्टिक या तार) की बदबू आना।
कंप्रेसर से सामान्य से बहुत ज्यादा तेज या अजीब गड़गड़ाहट की आवाज आना।
एसी ऑन करते ही बार-बार घर की लाइट डिम होना या एमसीबी (MCB) का ट्रिप होना।
कूलिंग का अचानक पूरी तरह से बंद हो जाना।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत एसी बंद करें और टेक्नीशियन को बुलाएं।
तापमान को 16 या 18 डिग्री पर सेट करने से कंप्रेसर सीधे तौर पर ब्लास्ट नहीं होता, लेकिन इस पर काम का बोझ (Load) अत्यधिक बढ़ जाता है। कंप्रेसर तब तक बिना रुके लगातार चलता रहता है जब तक कमरा उतना ठंडा न हो जाए। भीषण गर्मी में इतना कम तापमान हासिल करना मुश्किल होता है, जिससे कंप्रेसर लगातार ओवरहीट होने लगता है और ट्रिप या ब्लास्ट होने की संभावना बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स गर्मियों में 24°C से 26°C का तापमान सबसे सुरक्षित मानते हैं।



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