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Rudrabhishek Vidhi: घर पर शिव जी का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें सरल पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और जरूरी नियम
Ghar Par Rudrabhishek Karne Ki Vidhi: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं, लेकिन कई लोग समय या अन्य कारणों से मंदिर नहीं जा पाते। ऐसे में घर पर भी विधि-विधान के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्ची श्रद्धा, पवित्र मन और सही पूजा विधि से किया गया रुद्राभिषेक भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय होता है। शिव पुराण और अन्य शैव ग्रंथों में भी अभिषेक, मंत्र जाप और पूजा के क्रम का विशेष महत्व बताया गया है। आइए, जानते हैं कि घर पर रुद्राभिषेक करने की सही विधि क्या है और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए -

रुद्राभिषेक के लिए आवश्यक सामग्री
तांबे या पीतल का कलश अथवा लोटा
शुद्ध जल और गंगाजल
कच्चा गाय का दूध
दही, शुद्ध घी और शहद
पंचामृत बनाने के लिए मिश्री या शक्कर
गन्ने का रस या मौसमी फलों का रस (यदि उपलब्ध हो)
चंदन और अष्टगंध
भस्म (विभूति)
अक्षत (साबुत चावल)
इत्र
बेलपत्र
धतूरा, भांग, शमी पत्र और बेलफल
कमल, आक, कनेर या अन्य सुगंधित पुष्प
फूलों की माला
मौसमी फल और नैवेद्य
धूप, दीप और कपूर
जनेऊ और सफेद वस्त्र (यदि अर्पित करना चाहें)
श्रद्धानुसार दक्षिणा
अभिषेक शुरू करने से पहले करें ये तैयारी
पूजा आरंभ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और वहां दीपक तथा धूप जलाएं। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करें और रुद्राभिषेक का संकल्प लें।
सबसे पहले करें शिव परिवार का पूजन
रुद्राभिषेक से पहले भगवान शिव के पूरे परिवार का पूजन करना शुभ माना जाता है।
सबसे पहले भगवान गणेश को जल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री और पुष्प अर्पित करें। फिर भगवान कार्तिकेय का पूजन करें और अंत में नंदी महाराज को बेलपत्र तथा प्रसाद समर्पित करें।
ध्यान रखें कि भांग और धतूरा केवल भगवान शिव को ही अर्पित किए जाते हैं।
अब उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके "ॐ नमः शिवाय" का स्मरण करते हुए अभिषेक आरंभ करें।
12 ज्योतिर्लिंगों का करें स्मरण
अभिषेक शुरू करने से पहले 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
रुद्राभिषेक करने का सही क्रम
जलाभिषेक
सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें। चाहें तो लगातार जलधारा प्रवाहित करें या 3, 5 अथवा 11 बार जल चढ़ा सकते हैं।
दूध से अभिषेक
इसके बाद कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें और फिर जल अर्पित करके उसे शुद्ध करें।
घी अर्पित करें
अब शुद्ध घी चढ़ाएं और उसके बाद दोबारा जल से स्नान कराएं।
शहद अर्पित करें
इसके बाद शहद से अभिषेक करें और फिर स्वच्छ जल चढ़ाएं।
फलों के रस से अभिषेक
यदि संभव हो तो गन्ने या अन्य फलों के रस से अभिषेक करें। इसके बाद पुनः जल अर्पित करें।
मिश्री या शक्कर
अब मिश्री अथवा शक्कर अर्पित करें और फिर जल से शिवलिंग को शुद्ध करें।
दही से अभिषेक
इसके बाद दही चढ़ाकर पुनः स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
अंत में गंगाजल
पूरे अभिषेक के अंत में गंगाजल अर्पित करें। इसे अभिषेक का पूर्ण और पवित्र समापन माना जाता है।
अब करें भगवान शिव का श्रृंगार
अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग को हल्के हाथों से साफ करें। इसके बाद जनेऊ और वस्त्र अर्पित करें। फिर क्रमशः इत्र, भस्म, अष्टगंध और चंदन चढ़ाएं। अंत में अक्षत अर्पित करें। ध्यान रखें कि अक्षत टूटे हुए न हों। चाहें तो जौ, साबुत मूंग और काले तिल भी अर्पित कर सकते हैं।
पूजन सामग्री अर्पित करें
अब भगवान शिव को फूलों की माला, कमल, सुगंधित पुष्प, आक के फूल, धतूरा, भांग, शमी पत्र, बेलफल, मौसमी फल तथा नैवेद्य अर्पित करें।
बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका
बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है। इसे चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें। प्रत्येक बेलपत्र के साथ यह मंत्र बोलें
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
मंत्र जाप करें
रुद्राभिषेक के बाद कम से कम 108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। यदि समय हो तो 11 या 21 बार महामृत्युंजय मंत्र का भी उच्चारण करें।
धूप, दीप, आरती और दक्षिणा
अब धूप और घी का दीपक अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें तो इसे और भी शुभ माना जाता है। यदि आपने संकल्प लेकर पूजा की है, तो श्रद्धानुसार दक्षिणा अलग रखें और बाद में उसे मंदिर, गौशाला या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
पूजा के अंत में करें क्षमा प्रार्थना
पूजा समाप्त होने के बाद भगवान शिव से अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा मांगें और सुख, शांति, आरोग्य तथा सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अंत में भगवान शिव को प्रणाम करें और नैवेद्य को प्रसाद के रूप में परिवार तथा अन्य श्रद्धालुओं में वितरित करें।



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