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Sheikh Hasina Saree: लाखों में होती है उस साड़ी की कीमत जो शेख हसीना पहनती हैं, मिल चुका हैं GI टैग
इसी साल की शुरुआत में बांग्लादेश में आम चुनाव हुए थे जिसमें शेख हसीना ने एक बार फिर जीत हासिल करते हुए पांचवी बार प्रधानमंत्री बनी थी। अब बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन के हिंसक होने के बाद पीएम शेख हसीना ने सोमवार, 5 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है।
शेख हसीना की दुनिया की अकेली ऐसी महिला प्रधानमंत्री थी, जो सिर पर पल्ला लेते हुए गरिमामयी तरीके से साड़ी में नजर आती थी। वो इन साड़ियों के माध्यम से अपने देश के आर्ट एंड कल्चर को भी प्रमोट करती थी।
भारत और बांग्लादेश के बीच साड़ी डिप्लोमेसी भी हमेशा खूब चर्चा में रही हैं। दरअसल जब भी हसीना शेख भारत आई वो हर बार तोहफे में जामदानी साड़ी साथ में लाई हैं। दरअसल बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री को जामदानी साड़ी बेहद पसंद हैं। उन्हें हर मौके पर इस खास साड़ी में देखा जा चुका हैं।

क्या है जामदानी साड़ी?
जामदानी बुनाई परंपरा बंगाली मूल की है। इसका सेंटर बांग्लादेश का नारायणगंज है। लंबे समय तक इसे कपास और सोने के धागों को मिलाकर बुना जाता रहा। अब भी इस साड़ी को बनाने में सोने का इस्तेमाल होता है लेकिन बहुत कम मात्रा में। जामदानी को ढाकाई भी कहते हैं, जो बांग्लादेश की राजधानी ढाका के नाम पर है।
इन साड़ियों की खासियत यह है कि यह मशीनों से तैयार नहीं होती है बल्कि जामदानी की बुनाई बेहद कुशल कारीगरों द्वारा की जाती है। इसे बुनने से पहले उनके दिमाग में एक पूरा पैटर्न होता है कि वे क्या बनाएंगे। पहले जहां जामदानी पर सिर्फ फूल उकेरे जाते थे, अब इसमें जियोमेट्रिकल पैटर्न या लैंडस्केप पैटन भी नजर आने लगे हैं। एक साड़ी को बनने में तकरीबन 20 दिन का समय लगता है। कुछ साल पहले ही यूनेस्को ने बुनाई के इस पैटर्न को सांस्कृतिक विरासत घोषित किया। वर्ष 2016 में जामदानी साड़ी को जीआई टैग मिला। आइए जानते हैं क्या होती है जामदानी साड़ी और क्यों है शेख हसीना को इतनी पसंद-
जामदानी साड़ी को करती हैं प्रमोट
इसके अलावा दुनियाभर में जब भी वो कहीं जाती हैं तो इन साड़ियों को बतौर पर गिफ्ट भी देती हैं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए वह खास जामदानी साड़ी बतौर उपहार दे चुकी हैं। इसके अलावा वो इस साड़ी को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, विदेश मंत्री रह चुकी सुषमा स्वराज और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी हसीना शेख ये साड़ी उपहार में दे चुकी हैं।

तंगेल साड़ी पर सियासी मतमेद
दरअसल फरवरी में तंगेल साड़ियों के लिए पश्चिम बंगाल को जीआई टैग मिला था। जिसके बाद बांग्लादेश इस बात से खफा हो गया। दरअसल पूर्व बर्धमान और नदिया जिलों में बुनी जाने वाली इस साड़ी पर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों ही अपना हक जमाते हैं। भारत को इसका जीआई टैग मिलने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया में खूब हल्ला हुआ।
शेख हसीना आमतौर पर जामदानी साड़ियां पहनती हैं, लेकिन इसी साल फरवरी में जर्मनी में एक कॉफ्रेंस के दौरान उन्होंने तंगेल साड़ी पहनी थी ताकि वो बता सकें कि वो इशारों इशारों में साफ कर दें कि इस साड़ी पर भी बांग्लादेश का हक हैं।
लाखों में होती है कीमत
वैसे जामदानी आपको 2 हजार रूपए से मिलना शुरू हो जाता है लेकिन सोने के वर्क से काम की गई इन साड़ियों की कीमत लाखों में होती है।



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