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मोबाइल के बिना खुद को समझते हैं अधूरा, कहीं आपको नोमोफोबिया तो नहीं
जब मोबाइल का आविष्कार हुआ था तो इसने लोगों का जीवन बेहद ही आसान बना दिया था। मोबाइल फोन की वजह से लोगों की आपस में कनेक्टिविटी बहुत अधिक बढ़ गई थी। धीरे-धीरे इसमें कई तरह से फीचर्स शामिल होते चले गए और आज के समय में व्यक्ति अपने अधिकतर काम इस मोबाइल की मदद से ही पूरे कर लेता है। इसकी मदद से पूरी दुनिया को आपस में जोड़ने का काम काफी आसान हो गया।
हालांकि, आज के समय में लोगों ने इसका दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है। वे अपने मोबाइल फोन पर इतना निर्भर हो चुके हैं कि अगर उनका फोन आसपास ना हो तो वे बुरी तरह घबरा जाते हैं।

फोन की बैटरी कम होने पर उन्हें अपने फोन से अलग होने का डर सताता है। लोगों के मन के इसी डर व घबराहट ने एक नए तरह के फोबिया को जन्म दिया है, जिसे नोमोफोबिया कहा जाता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको नोमोफोबिया के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-
नोमोफोबिया क्या है?
नोमोफोबिया एक शब्द है जो मोबाइल फोन के बिना रहने या किसी कारण से इसका इस्तेमाल ना पाने के डर डर या चिंता के बारे में बताता है। मसलन, फोन में कम बैटरी, कोई नेटवर्क कवरेज ना होना या फिर फोन खो जाने के ख्याल से ही लोगों में एक डर, घबराहट या चिंता होने लगती है। आसान शब्दों में कहा जाए तो नोमोफोबिया वास्तव में मोबाइल फोन की लत है। यह शब्द "नो सेल फोन फोबिया" का एक कॉम्बिनेशन है। जब लोगों को ऐसा लगता है जैसे उन्होंने सेल फोन के बिना अपना एक हिस्सा खो दिया है। ऐसे लोग अपने फोन के बिना रहना तो दूर बल्कि उसके ख्याल से भी डरते हैं।
क्या कहती है रिसर्च
रिसर्च में भी यह बात साबित हुई है कि जो लोग सेल्फ-सेंटर्ड होते हैं, वे अपने फोन के आदी अधिक होते हैं। कुछ समय पहले की गई यह रिसर्च द जर्नल ऑफ़ साइकोलॉजी में पब्लिश हुई। दरसअल, रोमानिया में अलेक्जेंड्रू इओन कुज़ा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि खुद में खोए रहने वाले लोगों में स्वार्थ की भावना अधिक होती है, जो प्रशंसा की आवश्यकता और अधिकार की भावना के रूप में प्रकट हो सकती है। अधिकतर लोग सोशल मीडिया इंटरैक्शन के माध्यम से इसे प्राप्त करते हैं, जैसे कि उनके पोस्ट पर लाइक। 18 से 45 वर्ष की आयु के बीच के 559 पोस्ट-सेकेंडरी स्कूल और कॉलेज के छात्रों में से, जिन्होंने सेल्फ सेंटर्ड होने के पैमाने पर अधिक स्कोर हासिल किए, उनमें नोमोफोबिया के होने की अधिक संभावना थी। इतना ही नहीं, इन व्यक्तियों में तनाव के अधिक लक्षण दिखे और उनमें सोशल मीडिया की लत के भी लक्षण नजर आए। शोधकर्ताओं का मानना है कि नोमोफोबिया, आत्ममुग्धता, तनाव और सोशल मीडिया की लत सभी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
नोमोफोबिया के लक्षण क्या हैं?
नोमोफोबिया में व्यक्ति को अपने फोन की ही लत होती है। ऐसे व्यक्ति में कुछ खास लक्षण नजर आ सकते हैं। मसलन-
• अपने मोबाइल फोन से अलग होने पर बेचैनी या चिड़चिड़ापन होना।
• लगातार अपने फ़ोन स्क्रीन को देखते रहना, फिर भले ही फोन का कोई काम ना हो।
• हर समय सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप से जुड़े रहने की जरूरत महसूस होना।
• फोन के बिना किसी भी काम को करने में मुश्किल महसूस करना।
• मोबाइल फोन आसपास ना होने पर हार्ट रेट बढ़ना, पसीना आना, कांपना या चिंता से जुड़े अन्य शारीरिक लक्षण नजर आना।
• सोने में कठिनाई होना या फिर रात में जागकर फोन चेक करना।
• उन एक्टिविटीज का हिस्सा ना बनना, जहां पर फोन इस्तेमाल करने की मनाही है।
• बहुत अधिक फ़ोन इस्तेमाल करने से काम या डेली एक्टिविटीज में प्रोडक्टिविटी कम होना।
• फ़ोन की बैटरी कम होने या कोई सिग्नल न होने पर घबराहट या एंग्जाइटी होना।
नोमोफोबिया को कैसे हैंडल करें?
अगर आपको नोमोफोबिया है तो कुछ आसान टिप्स आपको इस लत से बाहर निकलने में काफी मदद कर सकते हैं-
• नोमोफोबिया को समझें और अपने जीवन पर इसके नेगेटिव इफेक्ट को स्वीकारें।
• छुट्टी के दिन डिजिटल डिटॉक्स लें। इससे धीरे-धीरे आपकी निर्भरता फोन पर कम होती चली जाएगी।
• डिजिटल कम्युनिकेशन कम करके व्यक्तिगत संबंधों और संचार को बढ़ावा दें।अपने फोन के इस्तेमाल के पैटर्न पर नजर रखें और स्क्रीन टाइम लिमिट करें।
• अपनी स्लीप के लिए सोने से पहले अपने फोन का उपयोग करने से बचें।
• हर दिन कुछ समय ऐसा फिक्स करें, जहां आप जानबूझकर अपने फ़ोन का उपयोग करने से बचें।
• ऐसे ऐप्स का उपयोग करें जो आपके फ़ोन के इस्तेमाल को ट्रैक और सीमित करने में मदद करते हैं।
• इस फोबिया ने निजात पाने के लिए आप थेरेपिस्ट या काउंसलर से मदद भी ले सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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