पुरानी कब्ज और बवासीर से पाना है छुटकारा, तो इस पौधे की जड़ का करें इस्तेमाल

Piles Ka Gharelu Ilaj: बवासीर (Piles) एक ऐसी कष्टदायक स्थिति है जो गलत खान-पान और कब्ज की वजह से आज एक आम समस्या बन चुकी है। सबसे दुखदायी बात ये है कि इस बीमारी का कोई टेंपरेरी इलाज भी नहीं है। हालांकि कहा जाता है कि ऑपरेशन करवाने से ये समस्या खत्म हो जाती है लेकिन ऐसा कहना बिल्कुल गलत है। दरअसल, ऑपरेशन के दौरान सिर्फ मस्से के ऊपरी हिस्से को काट दिया जाता है लेकिन वो बीमारी जड़ से खत्म नहीं होती है बल्कि कुछ समय बाद मस्से दोबारा आ जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी को जड़ से खत्म करने पर ध्यान दिया जाए। इसलिए आज हम आपको एक ऐसे पेड़ की जड़ के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका सेवन करने से बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी। हम बात कर रहे हैं कचनार के पेड़ की जड़ के बारे में। चाहे खून गिरने वाली 'खूनी बवासीर' हो या असहनीय दर्द और सूजन वाली 'बादी बवासीर', कचनार (Bauhinia variegata) का पेड़ इन दोनों ही स्थितियों में रामबाण की तरह काम करता है। आइए जानते हैं कि बवासीर के खात्मे के लिए आप कचनार की जड़ और छाल का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।

बवासीर में कचनार कैसे है फायदेमंद? (Benefits of Kachnar)

कचनार की जड़ और छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी और हीलिंग गुण पाए जाते हैं। यह न केवल पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है, बल्कि मसों के आकार को धीरे-धीरे छोटा कर उन्हें सुखा देता है। इसलिए तो कचनार के पेड़ की जड़ को बवासीर का काल भी कहा जाता है।

इस्तेमाल करने का सही तरीका

1. खूनी बवासीर के लिए विशेष काढ़ा

अगर आपको शौच के दौरान ब्लीडिंग होती है, यानी आप खूनी बवासीर का दर्द सहन कर रहे हैं और दवाई से कोई आराम नहीं हो रहा तो कचनार की जड़ का सेवन करें। इसके लिए आप कचनार की सूखी छाल या जड़ का चूर्ण बना लें। अब एक गिलास पानी में 5-10 ग्राम कचनार की छाल/जड़ का पाउडर डालकर उसे तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। इसे छानकर सुबह-शाम खाली पेट पिएं। यह ब्लीडिंग को तुरंत रोकने में मदद करता है।

2. बादी बवासीर और मसों की सूजन

मस्सों के दर्द और सूजन को कम करने के लिए कचनार की जड़ का लेप बहुत प्रभावी है। इसके लिए आप कचनार की ताजी जड़ को पीसकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को प्रभावित जगह यानी मस्सों पर लगाएं। ऐसा करने से सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है।

3. कचनार और छाछ का मेल

आयुर्वेद में बवासीर के लिए छाछ को अमृत माना गया है। आप जल्दी आराम पाने के लिए कचनार की छाल के चूर्ण को एक गिलास ताजी छाछ (Buttermilk) में मिलाकर दोपहर के भोजन के बाद लें। यह पेट को ठंडा रखता है और कब्ज को खत्म करता है।

इलाज के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

ज्यादा पानी पिएं: बवासीर का मुख्य कारण कब्ज है, इसलिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं।

फाइबर युक्त आहार: अपने भोजन में दलिया, ओट्स, हरी सब्जियां और फलों को शामिल करें।

मिर्च-मसालों से तौबा: जब तक इलाज चल रहा हो, लाल मिर्च, गरम मसाला और बाहर के जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Sunday, April 19, 2026, 16:15 [IST]
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