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महिलाओं को क्यों होता है बवासीर? जानें पाइल्स के शुरुआती लक्षण, कारण और बचाव के उपाय
Piles Symptoms In Women: बवासीर को मेडिकल भाषा में हेमोरॉइड्स (Hemorrhoids) या आम बोलचाल में पाइल्स (Piles) कहा जाता है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें गुदा (Anus) के अंदर या बाहर मौजूद नसें सूज जाती हैं। इसके कारण स्किन की गांठें बनने लगती हैं और कई बार मलत्याग के दौरान खून भी निकल सकता है। यह समस्या पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी आम है। पहले तो ये परेशानी पुरुषों में ही ज्यादा नजर आती थी लेकिन अब महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रही है।
कई बार तो महिलाएं समझ ही नहीं पाती हैं कि उन्हें आखिर हो क्या रहा है और इस बीमारी को नजरअंदाज कर देती हैं। आगे चलकर बवासीर की समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि ऑपरेशन तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में हर महिला के लिए ये जानना जरूरी है कि महिलाओं में बवासीर के शुरुआती लक्षण क्या हैं? ये बीमारी क्यों होती है और इसका इलाज क्या है?

बवासीर की पहली स्टेज में क्या होता है?
बवासीर की शुरुआत को फर्स्ट स्टेज पाइल्स कहा जाता है। इस स्टेज में हेमोरॉइड्स गुदा के अंदर होते हैं और बाहर दिखाई नहीं देते। इस दौरान सूजी हुई नसें छोटी होती हैं और कई बार दर्द महसूस नहीं होता। हालांकि, मलत्याग के समय खून आना इसका पहला संकेत हो सकता है। महिलाओं में इस स्टेज पर लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर हो सकते हैं।
महिलाओं में बवासीर के शुरुआती लक्षण
गुदा में खुजली, जलन या असहजता महसूस होना
मलत्याग के दौरान या बाद में खून दिखना
शौच करते समय दर्द या चुभन महसूस होना
मल के साथ म्यूकस आना
अंडरवियर पर सफेद डिस्चार्ज के निशान दिखना
टॉयलेट जाने के बाद भी दोबारा मलत्याग की इच्छा होना
इन लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या आगे बढ़ सकती है।
महिलाओं को बवासीर होने के मुख्य कारण
प्रेग्नेंसी के दौरान दबाव
गर्भावस्था में बढ़ते वजन और पेल्विक एरिया पर दबाव के कारण रेक्टम की नसों पर प्रेशर पड़ता है, जिससे बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है।
लंबे समय तक कब्ज रहना
फाइबर की कमी और कम पानी पीने से कब्ज की समस्या होती है। कड़ा मल बाहर निकालने के लिए जोर लगाने से गुदा की नसों पर दबाव पड़ता है और बवासीर विकसित हो सकता है।
बार-बार दस्त लगना
लगातार दस्त होने से गुदा क्षेत्र में इरिटेशन बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर हेमोरॉइड्स की समस्या हो सकती है।
ज्यादा देर तक बैठकर काम करना
लंबे समय तक बैठने से हिप्स और गुदा क्षेत्र पर दबाव बढ़ता है। इससे नसें सूज जाती हैं और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।
उम्र बढ़ना या भारी सामान उठाना
50 साल के बाद महिलाओं में बवासीर का खतरा ज्यादा होता है। वहीं कम उम्र में भी भारी वजन उठाने या हैवी वर्कआउट करने से यह समस्या हो सकती है।
बवासीर से बचाव के लिए क्या करें?
बवासीर से बचने और शुरुआती स्टेज में इसे बढ़ने से रोकने के लिए ये उपाय अपनाएं:
अपने आहार में फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें जैसे सेब, अमरूद, पपीता और हरी सब्जियां खाएं। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। मल को ज्यादा देर तक रोककर न रखें और सफाई का ध्यान रखें। प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूरी बनाएं व नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज करें साथ ही वजन को कंट्रोल में रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर मलत्याग के दौरान बार-बार खून आए, दर्द बढ़ने लगे या घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती स्टेज में इलाज शुरू करने से सर्जरी की जरूरत से बचा जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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