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Trending: भोजपुरी सिंगर ने बिना शादी के बेटे को जन्म दिया, IVF से सिंगल मदर बनने की पूरी प्रक्रिया जानें
Bhojpuri Singer Devi Becomes a Single Mother : हाल ही में मशहूर भोजपुरी सिंगर देवी ने इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया है। देवी अविवाहित (Unmarried) हैं, लेकिन उन्होंने हाल ही में एक बेटे को जन्म दिया है। उनकी डिलीवरी ऋषिकेश एम्स में हुई और इसके बाद उन्होंने अपने बच्चे के साथ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की।
इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई कि आखिर बिना शादी किए कोई महिला मां कैसे बन सकती है? इसका सीधा सा जवाब है, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक। आइए जानते हैं इस प्रोसेस के बारे में?

कैसे बनीं देवी सिंगल मदर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, देवी ने अपनी प्रेग्नेंसी के लिए IVF तकनीक का सहारा लिया। इसके लिए उन्होंने जर्मनी की स्पर्म बैंक से डोनर स्पर्म लिया और उसी से लैब में एम्ब्रायो तैयार किया गया। बाद में इस एम्ब्रायो को उनके गर्भाशय में रखा गया और पूरी मेडिकल देखरेख में उनकी प्रेग्नेंसी आगे बढ़ी। इस तरह देवी ने सफलतापूर्वक एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
क्या कहता है भारतीय कानून?
भारत में साल 2021 में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) रेगुलेशन एक्ट लागू किया गया है। इस कानून के तहत अब केवल शादीशुदा कपल ही नहीं, बल्कि अविवाहित महिलाएं, तलाकशुदा महिलाएं और विधवाएं भी IVF तकनीक की मदद से मां बन सकती हैं। इस कानून ने महिलाओं को मातृत्व का अधिकार दिया है, चाहे वे शादीशुदा हों या नहीं।
IVF तकनीक कैसे काम करती है?
IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है। इसमें महिला के अंडाशय से एग्स निकाले जाते हैं और उन्हें पुरुष के स्पर्म के साथ लैब में मिलाकर एम्ब्रायो तैयार किया जाता है। बाद में इस एम्ब्रायो को महिला के गर्भाशय में प्लांट कर दिया जाता है। कुछ ही दिनों में भ्रूण (Embryo) विकसित होने लगता है और सामान्य तरीके से गर्भावस्था आगे बढ़ती है।
सिंगल महिलाएं IVF के लिए स्पर्म बैंक से डोनर स्पर्म ले सकती हैं। यही कारण है कि बिना शादी किए भी कोई महिला IVF के जरिए मां बन सकती है।
IVF की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है?
IVF एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, लेकिन इसकी सफलता दर कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है।
महिला की उम्र - 20 से 30 साल की उम्र में IVF का सक्सेस रेट सबसे अधिक होता है।
35 से 40 की उम्र - इस समय IVF का सफलता प्रतिशत कम होने लगता है।
40 के बाद - महिलाओं को प्रेग्नेंसी के लिए डोनर एग्स का सहारा लेना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य और जीवनशैली - महिला की हेल्थ कंडीशन, हार्मोनल बैलेंस और जीवनशैली भी IVF की सफलता पर असर डालते हैं।
क्यों बढ़ रही है IVF की डिमांड?
आज के दौर में कई महिलाएं देर से शादी कर रही हैं, कुछ शादी नहीं करना चाहतीं, तो कुछ व्यक्तिगत कारणों से अकेले ही मातृत्व का सुख पाना चाहती हैं। ऐसे में IVF उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है। भारत में नए ART कानून के लागू होने के बाद से ऐसी महिलाओं की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है, जो IVF का सहारा लेकर सिंगल मदर बन रही हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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