Latest Updates
-
Fried Onion Special Egg Do Pyaza Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा लाजवाब स्वाद -
International Yoga Day 2026 Quotes: योग दिवस पर इन 30+ कोट्स के जरिए प्रियजनों को दें स्वस्थ रहने का संदेश -
Tandoor Style at Home Paneer Tikka Recipe: अब घर पर पाएं होटल जैसा स्मोकी स्वाद -
Yoga Day 2026 Wishes In Sanskrit: नित्यं योगाभ्यासः...इन संस्कृत संदेशों से अपनों को दें योग दिवस की बधाई -
Father's Day 2026: किसी ने छोड़ी स्मोकिंग, तो कोई निभाता है नैपी ड्यूटी, ये हैं बॉलीवुड के Super Dads -
Simple Aromatic Peas Pulao Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा खिला-खिला मटर पुलाव -
International Yoga Day 2026: रोजाना योग करने से मिलेंगे ये 10 जबरदस्त फायदे, तन और मन रहेगा स्वस्थ -
Jamai Sasthi 2026: दामाद की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत, जानें जमाई षष्ठी का महत्व और मनाने का तरीका -
5 Minute Protein Masala Omelette Recipe: झटपट बनाएं होटल जैसा टेस्टी और हेल्दी नाश्ता -
Aaj Ka Rashifal 20 June 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
22 दिन तक अकेले लड़ी कैंसर से जंग, आज दूसरों को दे रहीं हौसला, ये है ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर आंचल शर्मा की कहानी
कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर घर कर जाता है। लेकिन कुछ लोग इस डर को हिम्मत में बदल देते है। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। पिछले कुछ सालों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। हर साल लाखों महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देती हैं। ऐसे में, इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और बचाव के तरीके बताने के उद्देश्य से हर साल अक्टूबर महीने को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। आज इस लेख में हम आपको ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने न सिर्फ कैंसर का डटकर सामना किया, बल्कि उसे हराया भी।
दिल्ली की रहने वाली आंचल शर्मा ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। आंचल न ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतकर न केवल खुद को संभाला, बल्कि अब दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं। उनकी ये जर्नी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है। जो जिंदगी की किसी मुश्किल से लड़ रही है। तो आइए, जानते हैं आंचल के इस सफर के बारे में -

भाई की शादी के दौरान ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज हुआ
जनवरी 2016 में जब आंचल को पता चला कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है, तो जैसे उनकी दुनिया रुक गई। डॉक्टर की बात सुनते समय वे बिल्कुल शॉक में थीं। आंचल बताती हैं कि, "मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो।" आंचल ने बताया कि उस वक्त उनके घर में भाई की शादी थी और खुशियों का माहौल था। आंचल नहीं चाहती थीं कि उनके घरवाले परेशान हो, इसलिए उन्होंने अपने दर्द को छुपाए रखा। 22 दिनों तक उन्होंने अकेले टेस्ट, बायोप्सी और डॉक्टर की विजिट की। शादी के सारे फंक्शन पूरे होने के बाद ही उन्होंने परिवार को सच्चाई बताई और पहली सर्जरी करवाने चली गईं।

इलाज के दौरान हिम्मत से किया तकलीफों का सामना
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज आसान नहीं होता। आंचल ने 6 बार कीमोथेरेपी, 32 बार रेडिएशन और 2 सर्जरी झेली। ट्रीटमेंट के दौरान उनका शरीर कमजोर पड़ता गया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। इलाज के साथ-साथ उन्होंने नौकरी भी जारी रखी ताकि ट्रीटमेंट रुक न जाए।आंचल बताती हैं कि "मैंने अपने इलाज के लिए अपनी गाड़ी और ज्वेलरी तक बेच दी, लेकिन इलाज रुकने नहीं दिया। क्योंकि मुझे पता था कि अगर हिम्मत हार गई तो सब खत्म हो जाएगा।"" कई बार काम के दौरान लंबे समय तक खड़े रहने के कारण उन्हें पैरों में पस तक हो गया, फिर भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी की।
खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखा
आंचल का कहना है कि शरीर की तकलीफें तो झेल ली जाती हैं, लेकिन मन को मजबूत रखना सबसे जरूरी है। वे बताती हैं कि कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स से बाल झड़ने लगे। "ज्यादातर लोग उस पल टूट जाते हैं, लेकिन मैंने बाल झड़ने का इंतजार नहीं किया। मैंने खुद ही बाल कटवा लिए ताकि मुझे अपने टूटते बालों को देखकर दर्द न हो। वो मेरे लिए आत्मविश्वास की परीक्षा थी।"
परिवार का सबसे ज्यादा सपोर्ट था
इस जंग में आंचल का सबसे बड़ा सहारा उनका परिवार बना। आंचल का कहना है कि, "मेरी मम्मी और भाई ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। उन्होंने मुझे कभी मरीज की तरह नहीं देखा। उनके विश्वास ने ही मुझे जिंदा रखा।" जब कभी डर लगता, तो मां कहती थीं कि तू ठीक हो जाएगी बेटा, भगवान तुझे बचाएगा। यही शब्द आंचल के लिए सबसे बड़ी दवा साबित हुए। उन्होने कभी मुझे यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं बचूंगी नहीं, बल्कि उन्हें पूरा यकीन था कि मुझे कुछ नहीं होगा और मैं इस जंग को जरूर जीत कर रहूंगी।"
अब दूसरों की जिंदगी में भर रही उम्मीद
कैंसर से जंग जीतने के बाद आंचल ने अपनी जिंदगी को एक नया मकसद दिया। उन्होंने "Can Heal" और "Meals of Happiness" नाम की कम्यूनिटी और एनजीओ की शुरुआत की। इनके जरिए वे कैंसर पेशेंट्स के लिए वर्कशॉप आयोजित करती हैं, जहां उन्हें हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने, पॉजिटिव रहने और मानसिक तौर पर मजबूत बनने की प्रेरणा देती हैं। इसके अलावा, वे अपनी एनजीओ की मदद से कैंसर पीड़ितों के लिए खाने और जरूरी सहायता उपलब्ध करवाती हैं।

आंचल का संदेश - "हिम्मत मत हारो"
आंचल मानती हैं कि कैंसर का मतलब मौत नहीं है, बल्कि ये एक लड़ाई है जिसे जीता जा सकता है। उनका कहना है कि, "चाहे मुश्किल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। आज के समय में कैंसर का इलाज संभव है। यह जर्नी आपके लिए बहुत मुश्किल हो सकती है, आपको कई चुनैतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आपकी हिम्मत और दिमाग ही आपको इस बीमारी से बाहर ले आएगा। अगर आप पॉजिटिव सोच के साथ आगे बढ़ें, तो कोई भी बीमारी आपको हरा नहीं सकती। इसलिए अपने शरीर को सुनो, नियमित जांच कराओ और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज मत करो।"
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications