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कोविड -19 डाल सकता है आपके दिमाग पर असर बढ़ सकती है न्यूरोलॉजिकल परेशानियां
पूरी दुनिया में कोई व्यक्ति कोविड-19 से अछूता नहीं है। कही न कही सभी ने कोविड के दुष्प्रभाव झेलें हैं, मगर अभी भी कुछ ऐसी बातें है जो हम नहीं जानते। कोविड-19 को अभी भी हम सांस से जुड़ी परेशानियों के लिए जानते है पर यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रभाव डालता है। जिसमें सबसे ज्यादा यह मस्तिष्क को परेशानी पहुंचाता है जिससे अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग तेज हो सकते हैं या ट्रिगर हो सकते हैं।

कोविड-19 से जुड़ी कई स्टडी में पता चलता है कि कोविड-19 84 प्रतिशत रोगियों में से 36 प्रतिशत व्यक्तियों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं पायी जाती हैं, जिसमें अजीब तरह से, बहुत से लोग पैनिक अटैक, कंपल्सिव डिसऑर्डर और मस्तिष्क से जुड़ें अन्य अवसादों जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं। यह अस्वास्थ्यकर व्यवहारों की एक श्रृंखला को भी ट्रिगर कर सकते हैं, जैसे कि अत्यधिक शराब का सेवन, मादक द्रव्यों का सेवन, या बार बार सुसाईडल यानि आत्महत्या का ख्याल आना। रिसर्च और स्टडी इस बात को साबित कर चुकी हैं कि मल्टी-वैरिएंट कोरोनावायरस मस्तिष्क के कार्य, व्यवहार और बौद्धिक क्षमताओं को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। इसलिए जो व्यक्ति कोविड से संक्रमित थे उन्हें न्यूरो यानि मस्तिष से जुड़ी किसी भी परेशानी में तुरंत डॉक्टर से सलाह मशवरा करना चाहिए। यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और पैरा मेडिकल के डीन डॉ अग्रवाल कहते हैं, "इनमें से कुछ प्रभाव तीव्र होते हैं, और थोड़े समय में दूर हो जाते हैं, अन्य लंबे समय तक चलने वाले होते हैं और रोगी के जीवन को दुख के थैले में बदल सकते हैं। ऐसे में हर तरीके से अपना ख्याल रखना बहुत जरुरी है।
डीन डॉ अग्रवाल की माने तो अब कोविड से जुड़ें सभी परिणाम हमारे सामने सबूत के साथ हैं की कैसे यह शरीर, सांस और मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है ऐसे में खतरे की घंटी बजन से पहले पूरी तरह अपना ध्यान रखें। यह व्यक्ति के जीवन पर एक प्रभावशाली प्रभाव डाल सकता है और उनके जीवन को समाप्त कर सकता है, ऐसी परिस्थतियों से बचने के लिए आपको संक्रमित होने के बाद से ही अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए और समय समय पर डॉक्टर से संपर्क करते रहना चाहिए।
अगर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों की माने तो रिसर्च में यह बात सामने आयी हैं कि कोरोना का असर 10 IQ अंक खोने के बराबर है। वही ब्रिटेन की एक स्टडी की बात करें तो दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमण का मस्तिष्क पर असर 20 साल तक बना रह सकता है, जिससे उम्र कम होने की संभावनाएं बढ़ जाती साथ ही रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी है कि कोरोना से संक्रमित मरीजों में संक्रमण के बाद भी थकान, शब्दों को याद करने में समस्या, नींद की समस्या, चिंता और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस रिसर्च के दौरान 46 मरीजों के डेटा का अध्ययन किया गया।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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