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Dengue Outbreak: देश में फिर बढ़ा डेंगू का खतरा, डॉक्टर बोले- बच्चों में गंभीर हो सकते हैं लक्षण, रहें अलर्ट
dengue fever: मौसम बदलते ही देश की राजधानी के अलावा देशभर में एक बार फिर से डेंगू का खतरा गहराता जा रहा है। उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार समेत महाराष्ट्र के कई जिलों में डेंगू बेकाबू हो गया है। आए दिन देशभर में कई डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। सिर्फ बात करें दिल्ली की तो पिछले एक सप्ताह में ही देश की राजधानी में डेंगू के 300 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें से दो लोगों की मौत हो चुकी हैं। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने डेंगू को महामारी घोषित कर दिया था।
नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (एनसीवीबीडीसी) के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक देश में 19,447 से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए वहीं डेंगू से 16 लोगों की मौत हो चुकी हैं। हेल्थ एक्टपर्ट की मानें तो सितंबर-अक्तूबर के महीनों में डेंगू का प्रकोप अधिक देखने को मिलता होता है। अगर बुखार आने के चार पांच दिन तक डेंगू का टेस्ट नहीं कराते हैं तो ऐसे में खतरा और बढ़ जाता है।

अमेरी हेल्थ होम हेल्थकेयर एशियन अस्पताल, फरीदाबाद के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. चारुदत्त अरोड़ा डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए बताते हैं कि हमें बचाव और इलाज पर ज्यादा फोकस करने की जरुरत हैं। आइए जानते हैं कि डेंगू से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं।
अचानक से डेंगू के मामले बढ़ने की वजह?
डॉ. चारु दत्त अरोड़ा बताते हैं कि अचानक से डेंगू बढ़ने के पीछे की वजह से इस बार हुई अनुमान से ज्यादा बारिश है। जिस वजह से लोगों की इम्यूनिटी पर इसका असर पड़ा है। इसके अलावा कई जगह पर जल भराव की वजह से मच्छर पैदा होने लगे और इसकी वजह से न सिर्फ डेंगू बल्कि मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले में बढ़ोतरी हुई है।
दिखाई दे रहे हैं ये चार मुख्य लक्षण
डॉक्टर ने बताया कि डेंगू के वैसे कई सारे अलग-अलग लक्षण होते हैं लेकिन अभी ज्यादात्तर जो केस सामने आ रहे हैं उनमें चार मुख्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं। सिरदर्द, तेज बुखार और ठंड, बैकपेन और जोड़ों में दर्द। अगर इस मौसम में किसी को भी ये 4 लक्षण महसूस हो तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं।
कम इम्यूनिटी भी है एक वजह
डॉ. चारु दत्त अरोड़ा बताते हैं कि इस मौसमी बीमारी का ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों में देखने को मिल रहा है। क्योंकि इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। फिलहाल अभी बहुत सारे डेंगू के मामलों में देखा या है कि अगर घर में किसी एक को बुखार है, तो दूसरा भी जल्दी चपेट में आ जाता है। यह कम इम्यूनिटी को दर्शाता हैं। इसके लिए मरीज को प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेड रिच डाइट का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में कमजोरी न रहें और इम्यूनिटी बरकरार रहें।
डेंगू के मरीजों को हो सकती हैं इलेक्ट्रोलाइट डेफिशिएंसी
डॉक्टर बताते हैं कि इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में मौजूद खनिज हैं, जो कि पानी और दूसरे बॉडी फ्लूइड के साथ मिलकर शरीर को एनर्जेटिक बनाए रखते हैं। डेंगू होने की स्थिति में मरीज की भूख बहुत कम हो जाती है। जिसकी वजह से मरीज के शरीर में सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है और मरीज को इलेक्ट्रोलाइट डिफिशिएंसी से जूझना पड़ता है। इसकी वजह से मरीज के शरीर में ऐंठन होने लगती है। ऐसे में मरीज की बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट को मैंटेन रखने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा फ्लूइड का सेवन कराएं। जैसे नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस।
डेंगू के लिए कौनसा टेस्ट करवाना चाहिए?
कई बार मरीजों में डेंगू के लक्षण देर से नजर आते हैं लेकिन बुखार तेज होता है। ऐसे में डेंगू का सही तरह से पता लगाने के लिए NS1 एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए, यह टेस्ट 3 से 4 दिन के बुखार को पकड़कर एक्यूरेट रिजल्ट देता है। अगर इस टेस्ट को कराने के बाद रिजल्ट नेगेटिव आता है, तो सावधानी के तौर पर दोबारा इस टेस्ट को करना चाहिए।
डेंगू से बचाव
डेंगू के लिए अभी तक कोई सटीक टीका या इलाज नहीं है, इसलिए मच्छरों से बचाव ही इससे बचने का एकमात्र उपाय हैं, इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें।
- मच्छरदानी का प्रयोग करें, खासकर सोते समय।
- शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें।
- मच्छर भगाने वाले क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें, विशेषकर - दिन में जब एडीज मच्छर ज्यादा सक्रिय होते हैं।
- खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं।
- खाली बर्तनों को साफ रखें।
- पानी जमा न होने दें, जैसे कि कूलर, गमले, और टायरों में।
- पानी के बर्तन ढक कर रखें और समय-समय पर साफ करें।
- मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई रखें और पानी जमा न होने दें।
- फॉगिंग या कीटनाशक का छिड़काव करें, विशेष रूप से उन जगहों पर जहां मच्छर अधिक होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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