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डायबिटीज रोगियों को मछली खाना चाहिए या नहीं, जानें सही जवाब
मछली खाने से डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है, ये बात कई अध्ययन में साबित हुई है। ज्यादा मछली खाने से मधुमेह के खतरे को पूरी तरह कम नहीं किया जा सकता है, लेकिन मोटे और ओबेसिटी के शिकार लोगों में इसके खतरे को कम किया जा सकता है। इसके सेवन से मोटे लोगों में डायबिटीज के खतरे को बढ़ने से रोका जा सकता है। मछली में ओमेगा -3 फैटी एसिड, प्रोटीन और विटामिन डी जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत होता है जो मरीजों में शुगर को नियंत्रित करने के साथ ही दिल के खतरे से भी बचाता है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि मछली और डायबिटीज के बीच क्या संबंध है?

ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से भरपूर
ओमेगा 3 फैटी एसिड को डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है। ओमेगा 3 प्रो इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइंस को कम करते हैं। इसकी वजह से डायबिटीज में बढ़ोत्तरी होती है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी नियंत्रित करने के साथ हृदय रोग व मधुमेह के रिस्क को कम करने में सहायक हैं।

विटामिन डी
साल्मन और हेरिंग जैसी फैटी फिश में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 और विटामिन डी मौजूद होता है। विटामिन डी आपके डायबिटीज के खतरे को कम करता है। साथ ही इंसुलिन की संवेदशीलता में सुधार करता है इससे डायबिटीज का रिस्क कम होता है।

विटामिन बी 12 से भरपूर
एक स्टडी के अनुसार बहुत से डायबिटीज के मरीजों में विटामिन बी 12 की कमी देखने को मिलती है। अगर आप मछली खाते हैं तो इससे आपके शरीर में प्रयाप्त मात्रा में विटामिन बी 12 पहुंचता है और इसकी कमी के कारण आपका डायबिटीज होने का रिस्क बहुत कम हो जाता है।

प्रोटीन से भरपूर
मछली प्रोटीन का भी एक स्त्रोत है। बीफ और चिकन की तुलना में इसमें उच्च स्तर का प्रोटीन मौजूद होता है। टूना मछली खाने से आपका पेट भी जल्दी भर जाता है और ये इंसुलिन बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए मछली में मौजूद डायटरी प्रोटीन भी डायबिटीज के खतरे को कम करता है।

कम कैलोरिज होती है
मोटापा एक मुख्य वजह है जिसकी वजह से डायबिटीज की समस्या होती है। इसलिए आपको उन चीजों का सेवन करना चाहिए, जिसमें कम कैलरी हों और आपका पेट भी भर जाएं। तिलापिया, कोड और सोल जैसी मछलियों में कैलोरीज़ की संख्या काफी कम होती है जिसकी वजह से ज्यादा फैट नहीं हो तो आपका मोटापा नहीं बढ़ता है और डायबिटीज होने का रिस्क भी कम होता है।

फाइबर होता है भरपूर
मछली में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। एक स्टडी के अनुसार डाइटरी फाइबर का सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल में कमी आती है, जिससे प्लाज्मा लिपिड लेवल भी कम होता हैं। इस प्रक्रिया से इंसुलिन नियंत्रित होता है। फाइबर के सेवन पेट काफी समय तक भरा हुआ रहता है।
कितनी मछली खानी चाहिए
एनएचएस के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को हफ्ते में कम से कम दो से एक बार फैटी फिश का सेवन करना चाहिए। इसमें 140 ग्राम पकी हुई मछली खानी चाहिए।
डायबिटीज मरीजों को कौनसी मछली खानी चाहिए?
यहां आपको हम कुछ अच्छी किस्म की मछली के प्रकार बता रहे है जो डायबिटीज के मरीजों को खानी चाहिए
- तिलापिया
- ट्राउट कॉड
- टूना सैल्मन
- सार्डिन मैकेरल हेरिंग
मधुमेह को मैनेज करने के लिए मछली खाने से हालांकि, इसकी अधिक मात्रा प्रतिकूल प्रभाव पैदा कर सकती है। बहुत अधिक वसायुक्त मछली और पारा युक्त मछली का सेवन करने से बचें। इसके अलावा, ओमेगा -3 की खुराक या मछली के तेल की खुराक शुरू करने से पहले, एक चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लें।



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