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Ravi Pradosh Vrat Katha: रवि प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर मनोकामना
Ravi Pradosh Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस साल फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 को पड़ रहा है। इस दिन रविवार है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए तभी व्रत सम्पूर्ण माना जाता है। तो आइए, जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की कथा -

प्रदोष व्रत 2026 तिथि व मुहूर्त
प्रदोष व्रत - 1 मार्च 2026, रविवार
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - 28 फरवरी 2026 को रात में 08 बजकर 43 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 01 मार्च 2026 को शाम 07 बजकर 09 मिनट तक
प्रदोष पूजा मुहूर्त - शाम 06 बजकर 21 मिनट से शाम 07 बजकर 09 मिनट तक
रवि प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की पत्नी भगवान शिव की बड़ी भक्त थी। वह हर प्रदोष व्रत पूरे विधि-विधान से रखती और भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा करती थी। एक दिन उनका बेटा किसी काम से दूसरे गांव जा रहा था। रास्ते में कुछ चोरों ने उसे रोक लिया और उसका सामान छीन लिया। चोरों ने उससे पूछा कि तुम्हारे घर में जो छिपा हुआ धन है, वह कहां रखा है? लड़के ने घबराते हुए कहा कि उसकी पोटली में सिर्फ रोटियां थीं, जो वे लोग ले चुके हैं। उसके घर में कोई गुप्त धन नहीं है, क्योंकि उनका परिवार बहुत गरीब है। लड़के की बात सुनकर चोर उसे छोड़कर चले गए।
वह लड़का आगे बढ़ा और एक नगर में पहुंच गया। थकान के कारण वह एक बरगद के पेड़ के नीचे सो गया। उसी समय राजा के सैनिक वहां आए। वे किसी चोर की तलाश कर रहे थे। सोते हुए लड़के को देखकर उन्होंने उसे ही चोर समझ लिया और पकड़कर जेल में डाल दिया। शाम तक जब लड़का घर नहीं लौटा, तो उसके माता-पिता बहुत चिंतित हो गए।
उस दिन प्रदोष व्रत था। उसकी मां ने व्रत रखते हुए भगवान शिव से अपने बेटे की रक्षा के लिए प्रार्थना की। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसकी पुकार सुन ली। रात में भगवान शिव राजा के सपने में आए और कहा कि जेल में बंद लड़का निर्दोष है, उसे तुरंत रिहा कर दो। यदि ऐसा नहीं किया, तो तुम्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
अगले दिन राजा ने उस लड़के को जेल से आजाद करने का आदेश दिया। उस लड़के को राजा के सामने लाया गया तो उसने सारी बात बताई। उस दरबार में लड़के के माता-पिता भी आए थे। राजा ने उनको उनका बेटा सौंप दिया और पांच गांव जीवनयापन के लिए दान कर दिया। भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से वह ब्राह्मण परिवार सुख-शांति से जीवन बिताने लगा।



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