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5 दाल और उनके छुपे गुण
दाल का हमारे भोजन में विषेश स्थान होता है। तरह-तरह की दालें हम अक्सर खाते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इन दालों में कितने गुण छुपे हुए हैं? दाल जैसे, राजमा, उरद, मूंग आदि में खूब सारा प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और आयरन आदि जैसे ढेर सारे पोषक तत्व मिले होते हैं। अगर आप वेजिटेरियन हैं तो दालों को अपने खाने में हर रोज़ शामिल कीजिये। आइये देखते हैं कि कौन सी दाल में कौन से गुण छुपे हुए हैं।

प्रोटीन का भंडार राजमा
राजमा (किडनी बीन्स) में बहुत सारा प्रोटीन होता है। यही नहीं इसमें आयरन, फॉसफोरस, मैगनीशियम और विटामिन बी9 पाया जाता है। साथ ही यह सोडियम और पोटैशियम में सबसे लो आहार हैं। राजमा में सोया प्रोडक्ट के मुकाबले अधिक प्रोटीन होता है।

मसूर दाल
मसूर दाल की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवर्द्धक एवं रक्त में गाढ़ापन लाने वाली होती है। इस दाल को खाने से बहुत शक्ति मिलती है। दस्त, बहुमूत्र, प्रदर, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। सौदर्य के हिसाब से भी यह दाल बहुत उपयोगी है।

काबुली चना, हरा चना और लाल चना
काबुली चना, हरा चना और लाल चना नाम से जाना जाने वाला यह चना तीन प्रकार का होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, केल्शिय, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। रक्ताल्पता, कब्ज, डायबिटिज और पीलिया जैसे रोगों में चने का प्रयोग लाभकारी होता है। बालों और त्वचा की सौंदर्य वृद्धि के लिए चने के आटे का प्रयोग हितकारी होता है। चना एक प्रमुख फसल है।

काली बीन्स
गभवर्ती महिलाओं के लिये काला बीन्स बहुत लाभकारी होता है क्योंकि इसमें फोलेट पाया जाता है। जो कि बच्चे के विकास के लिये एक जरुरी तत्व होता है। एक कटोरी काला बीन्स आपको 90 प्रतिशत तक के फोलेट तक की जरुरत पूरी कर देगा। इसमें फाइबर और प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। रोजना इसे स्प्राउट के तौर पर जरुर खाइये।

मूँग दाल
मूँग साबुत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है। अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों केल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है। मूँग शक्तिवर्द्धक होती है। ज्वर और कब्ज के रोगियों के लिए इसका सेवन करना लाभदायक होता है।
प्रोटीन का भंडार राजमा
राजमा (किडनी बीन्स) में बहुत सारा प्रोटीन होता है। यही नहीं इसमें आयरन, फॉसफोरस, मैगनीशियम और विटामिन बी9 पाया जाता है। साथ ही यह सोडियम और पोटैशियम में सबसे लो आहार हैं। राजमा में सोया प्रोडक्ट के मुकाबले अधिक प्रोटीन होता है।
मसूर दाल
मसूर दाल की प्रकृति गर्म, शुष्क, रक्तवर्द्धक एवं रक्त में गाढ़ापन लाने वाली होती है। इस दाल को खाने से बहुत शक्ति मिलती है। दस्त, बहुमूत्र, प्रदर, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में मसूर की दाल का सेवन लाभकारी होता है। सौदर्य के हिसाब से भी यह दाल बहुत उपयोगी है।
काबुली चना, हरा चना और लाल चना
काबुली चना, हरा चना और लाल चना नाम से जाना जाने वाला यह चना तीन प्रकार का होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, केल्शिय, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। रक्ताल्पता, कब्ज, डायबिटिज और पीलिया जैसे रोगों में चने का प्रयोग लाभकारी होता है। बालों और त्वचा की सौंदर्य वृद्धि के लिए चने के आटे का प्रयोग हितकारी होता है। चना एक प्रमुख फसल है।
काली बीन्स
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मूँग दाल
मूँग साबुत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है। अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों केल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है। मूँग शक्तिवर्द्धक होती है। ज्वर और कब्ज के रोगियों के लिए इसका सेवन करना लाभदायक होता है।



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