किडनी की समस्‍याओं को दूर करना है तो बढ़ाइये विटामिन डी का लेवल

By Super Admin

एक खोज से पता चला है कि शरीर में विटामिन डी की कमी से खासकर बच्चों को कई जानलेवा बीमारियां होने का रिस्क होता है। जिन बच्चों में क्रोनिक किडनी की बीमारी होती है उनमें विटामिन डी की कमी पायी जाती है जिसमें किडनी की दीर्घकालिक बिमारी से गुर्दे समबन्धी खराबी सामने आती है।

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शोधकर्ताओं के अनुसार कुछ मोडिफाएबल और कुछ नॉन मोडिफाएबल कारन हो सकते हैं जिससे क्रोनिक किडनी की बीमारी वाले बच्चों में विटामिन डी की कमी हो सकती है। शोध के अनुसार विटामिन डी की कमी से जूझने वाले करीबन दो तिहाई बच्चे कुछ असामान्य थे। उन्हें ग्लोमेरुलोपैथी थी जो कई बीमारियों का मिश्रण है और नेफ्रॉन पर असर डालता है।

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साल में और मौसमों की तुलना में सर्दी के मौसम में विटामिन डी का स्तर नीचे पाया गया। "विटामिन डी का स्तर विटामिन डी रेगुलेटिंग जीन में भिन्नता से ज़्यादा मौसम, बिमारी का प्रकार और पोषण सम्बन्धी पूरकता से निर्धारित होता है", जर्मनी के हैडलबर्ग यूनिवर्सिटी के एन्के डोयों कहते हैं।

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शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि विटामिन डी की कमी से ओस्टेओपोरोसिस, कैंसर, ह्रदय सम्बन्धी और ऑटो इम्यून गड़बड़ी हो सकती है।

जिन बच्चों को किडनी की बीमारी रही है और जिन्होंने विटामिन डी सप्लीमेंट लिए हुए थे उनके विटामिन डी का स्तर उन बच्चों से दो गुना था जिन्होंने कोई सप्लीमेंट नहीं लिया था।

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"सप्लीमेंट लेने पर फिर से सोचना चाहिए और विटामिन डी की कमी को क्रोनिक किडनी की बीमारी वाले बच्चों में कैसे पकड़ा और ठीक किया जाए इसपर हस्तक्षेप होना चाहिए" डोयों ने संकेत दिया। टीम ने 12 यूरोपीय देशों में किडनी की बिमारी वाले 500 बच्चों पर खोज किया।

क्लीनिकल जर्नल ऑफ़ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ नेफ्रोलॉजी ने जो निष्कर्ष दिया उससे इन जवान बच्चों के स्वास्थ्य को बचाया जा सका, शोधकर्ताओं ने बताया।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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