रिसर्च : ज्यादा शराब पीना महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए है ज्यादा खतरनाक

By Lekhaka

मेट्रो शहरों में आजकल वीकेंड पर शराब पीने का चलन काफी प्रचलन में है और इसमें पुरुष और महिलायें दोनों शामिल हैं। लोग अपने वीकेंड को शराब के साथ पार्टी मनाते हुए सेलिब्रेट करते हैं।

वैसे तो आपको बता दें कि शराब पीना किसी के लिए भी खराब है लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार लम्बे समय तक शराब का सेवन करने से पुरुषों और महिलाओं के दिमाग पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है।

इस रिसर्च में यह बताया गया कि शराब का अधिक सेवन महिलाओं कि तुलना में पुरुषों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। ईस्टर्न फ़िनलैंड और कुओपियो यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में मिलकर यह रिसर्च किया और इसमें 11 यंग लड़के और 16 यंग महिलाओं को शामिल किया गया जो पिछले 10 सालों से शराब पी रहे हैं और उनकी तुलना ऐसे 12 यंग लड़कों और 13 यंग लड़कियों से की गयी है जो शराब नहीं पीते हैं। इसके अलावा जो आंकड़ें दर्ज किये गए हैं वे 23 से 28 साल की उम्र के बीच में किये गये हैं।

 Heavy Drinking May Be More Harmful For Man Than Women

इस रिसर्च में ब्रेन की एक्टिविटी को ईईजी (electroencephalogram) द्वारा चेक किया गया है। शुरुवात में वैज्ञानिकों को यह पता चला था कि ज्यादा अल्कोहल का सेवन करने वाले लोगों के ब्रेन के कोर्टेक्स में अल्कोहल ना पीने वालों की तुलना में ज्यादा इलेक्ट्रिक रिस्पांस होता है। जबकि इस बार किये हुए शोध में यह पता चला कि यंग लड़के और लड़कियों में इसका अलग अलग प्रभाव है और ब्रेन में अलग एक्टिविटी दर्ज की गयी।

ईस्टर्न फ़िनलैंड यूनिवर्सिटी के ओटी कार्रे ने बताया कि “रिसर्च में पुरुषों के दिमाग की ब्रेन एक्टिविटी और न्यूरोट्रांसमिशन में ज्यादा बदलाव दिखे जबकि महिलाओं की ब्रेन एक्टिविटी सामान्य थी। यह बहुत चौकाने वाली बात है और हम सब इसका उल्टा सोच रहे थे। इसका यह मतलब है कि लम्बे समय तक शराब पीने से पुरुषों के दिमाग पर महिलाओं की तुलना में ज्यादा फर्क पड़ता है।“

कार्रे बताते हैं कि सामान्यतः हम सबका यही मानना था कि शराब का लम्बे समय तक सेवन पुरुष और महिलाओं दोनों पर एक ही प्रभाव डालता है लेकिन इस रिसर्च से नयी चीजं सामने आ रही हैं। खासतौर पर यह रिसर्च युवाओं पर की गयी है जिससे उनके ऊपर पड़ने वाले असर की जांच की जा सके।

इस रिसर्च के बाद हम चाहते हैं कि युवा शराब का सेवन कम कर दें हालांकि इस सर्वे में भाग लेने वाले किसी भी प्रतिभागी ने अल्कोहल से होने वाले डिसऑर्डर के डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया को हासिल नहीं किया था फिर भी उनके दिमाग में ये बदलाव पाए गये। इसलिए बेहतर होगा कि वे अभी से सचेत हो जायें जिससे आगे भविष्य में उन्हें किसी तरह का सामना न करना पड़े।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Thursday, September 7, 2017, 9:30 [IST]
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