Latest Updates
-
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी -
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें
World Thalassaemia Day 2023: शरीर के विकास में हो रही रुकावट, कहीं आपके बच्चे को तो नहीं थैलेसीमिया डिसऑर्डर
थैलेसीमिया एक जेनेटिक डिसऑर्डर है जो ब्लड में होता है। इस बीमारी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। जिस कारण हर साल 8 मई के दिन वर्ल्ड थैलेसीमिया डे मनाया जाता है। थैलेसीमिया का अर्थ है "खून का सागर। थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जो उत्परिवर्तित जीन के कारण होती है और हमारे ब्लड फ्लो में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
थैलेसीमिया के परिणामस्वरूप एनीमिया हो सकता है और पीड़ित को नियमित रूप से रेड ब्लड सेल्स ट्रांसफ्यूज करना पड़ता है। थैलेसीमिया डिसऑर्डर आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं। पहला मेजर थैलेसीमिया, ये शब्द उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता है जो इस बीमारी से पीड़ित है और दूसरा थैलेसीमिया माइनर, ये शब्द उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिसमें उत्परिवर्तित हीमोग्लोबिन जीन है लेकिन वो बीमारी से पीड़ित नहीं है। ऐसे में आइए जानते हैं थैलेसीमिया मेजर और माइनर डिसऑर्डर क्या है और दोनों में क्या अंतर है।

क्या है थैलेसीमिया मेजर?
थैलेसीमिया मेजर में दो जीन है जो इस डिसऑर्डर में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं और अगर एक उत्परिवर्तित होता है तो दूसरा थैलेसीमिया मेजर में हीमोग्लोबिन को संश्लेषित करने में सक्षम होता है, ये दोनों जीन उत्परिवर्तित होते हैं इसलिए शरीर हीमोग्लोबिन बनाने में सक्षम नहीं होता है और ट्रांसफ्यूज्ड आरबीसी पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर महिला और पुरुष दोनों व्यक्तियों के क्रोमोजोम खराब हो जाते हैं तो यह मेजर थैलेसीमिया की स्थिति बन जाती है। जिसके कारण बच्चे के जन्म लेने के 6 महीने बाद उसके शरीर में खून बनना बंद हो जाता है और उसे बार-बार खून चढ़वाने की जरूरत पड़ने लगती है। ऐसे में जो लोग थौलेसीमिया मेजर से पीड़ित होते हैं उन्हें हेल्दी रहने के लिए शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ट्रांसफ्यूज करना पड़ता है।

क्या है थैलेसीमिया माइनर?
थैलेसीमिया माइनर शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है जिनके हीमोग्लोबिन जीन में से एक उत्परिवर्तित होता है लेकिन दूसरा पूरी तरह से स्वस्थ रहता है। ऐसे मामले में हीमोग्लोबिन पर्याप्त मात्रा में संश्लेषित होता है, लेकिन थोड़ा कम होता है। ऐसे व्यक्तियों को 'कैरियर' भी कहा जाता है क्योंकि उनमें थैलेसीमिया के लक्षण होते हैं लेकिन वे हेल्दी रहते हैं। ऐसे में अगर पति और पत्नी दोनों थैलेसीमिया माइनर हैं, तो उन्हें थैलेसीमिया मेजर के रूप में बच्चा पैदा होने की 25 प्रतिशत संभावना होती है और थैलेसीमिया माइनर के रूप में 50 प्रतिशत संभावना होती है।

थैलेसीमिया मेजर और माइनर में अंतर?
1. थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित मरीज जीवन भर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूज पर निर्भर रहता है जबकि थैलेसीमिया माइनर एक स्वस्थ व्यक्ति होता है लेकिन उसमें हीमोग्लोबिन का स्तर थोड़ा कम होता है।
2. थैलेसीमिया मेजर दोनों हीमोग्लोबिन जीनों के उत्परिवर्तन के कारण होता है जबकि थैलेसीमिया माइनर एक जीन के उत्परिवर्तन के कारण होता है।
3. थैलेसीमिया मेजर वास्तविक बीमारी की स्थिति है और थैलेसीमिया माइनर डिसऑर्डर के संभावित स्थिति है।
4. उचित परीक्षणों द्वारा अभी तक पैदा होने वाले बच्चे में थैलेसीमिया मेजर की घटना को रोकना जरूरी है जबकि थैलेसीमिया माइनर की घटना खतरनाक नहीं है।
थैलेसीमिया के लक्षण
थैलेसीमिया असामान्य हीमोग्लोबिन और रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन से जुड़ा एक ब्लड डिसऑर्डर है। इस बीमारी में रोगी के शरीर में रेड ब्लड सेल्स कम होने की वजह से वो एनीमिया का शिकार बन जाता है। ऐसे में उसके अंदर ये लक्षण दिखने नजर आने लगते हैं जैसे-
* कमजोरी होना
* थकावट महसूस करना
* पेट में सूजन
* डार्क यूरिन
* त्वचा का रंग पीला पड़ना
* शरीर का तेजी से बढ़ना या रुक जाना
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications