Black turmeric benefits: सांप या बिच्‍छू काटने पर मरहम का काम करती है काली हल्‍दी, जानें इसे खाने के 5 फायदे

Black Turmeric : अभी तक आपने सिर्फ पीली हल्‍दी के गुणों के बारे में सुना होगा, अब आप सोच रहे होंगे क‍ि हल्‍दी पीली के अलावा भी क‍िसी दूसरे रंग की होती है क्‍या? जी हां, हल्दी सिर्फ पीले रंग की नहीं होती है। एक काले और नीले रंग के कॉम्बिनेशन में भी हल्‍दी होती है। ज‍िसे काली हल्‍दी कहते हैं।

पीली हल्दी को खाने की चीज में डालते ही उसका रंग पीला हो जाता है, ठीक वैसे ही काली हल्दी को भोजन या दूध में डालने पर उसका रंग बैगनी हो जाएगा। ये हल्‍दी गुणों के मामले में पीली हल्‍दी को भी पछाड़ देता है। आइए जानते हैं काली हल्‍दी के बारे में।

Black turmeric benefits

सांप व बिच्छू के काटने पर करते हैं इस्‍तेमाल

काली हल्दी आमतौर पर भारत के पूर्वोत्तर और मध्य प्रदेश में उगायी जाती है। काली हल्दी को एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Curcuma caesia है। मणिपुर और कुछ अन्य राज्यों में जनजातियों के लिए इस पौधे का विशेष महत्व है, यहां इसके जड़ों से तैयार पेस्ट को घावों और सांप व बिच्छू के काटने पर भी लगाया जाता है।

माइग्रेन को भगाएं

माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति तेज आवाज और रोशनी से संवेदनशील हो जाता है। काली हल्दी इससे राहत दिलाने का काम कर सकती है। राहत के लिए ताजा हल्दी को कुचकर माथे पर लेप के रूप में लगाएं।

पीरियड क्रैम्‍प को दूर भगाए

काली हल्दी गैस्ट्रिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने का काम करती है। एसिड रिफ्लक्स, गैस, सूजन, हिचकी, अपच, अल्सर गैस्ट्रिक इशू हैं। कई बार असंतुलित दिनचर्या और खान-पान के वजह से यह समस्या हो जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए काली हल्दी की कुछ मात्रा खाने के साथ या पानी के साथ ले सकते हैं।

दर्द निवारक

काली हल्दी एक बेहतरीन दर्द निवारक के रूप में जानी जाती है। काली हल्दी का उपयोग दांत दर्द, चकत्ते, पेट की समस्याओं और ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए किया जाता है। लेकिन इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

रक्त शर्करा और वजन घटाने को नियंत्रित करती है

काली हल्दी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह शरीर में पित्त उत्पादन को बनाए रखता है और उचित पाचन में मदद करता है। यह लीवर की समस्याओं से भी बचाता है। इससे शरीर में इंसुलिन विकसित होने का खतरा कम हो जाता है। काली हल्दी शरीर के वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।

भरपूर होता है एंथोसायनिन की मात्रा

इसमें एंथोसायनिन की मात्रा प्रचुर होती है, इसलिए इसका रंग गहरा बैंगनी होता है। हालांकि इसे काली हल्दी कहा जाता है। जहां एक तरफ एंथोसायनिन, कैंसर सेल को बनने से रोकता हैं, तो वहीं दूसरी ओर इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

सांस संबंधी समस्‍याओं से राहत द‍िलाता है

सांस संबंधित बीमारियों में काली हल्दी का बहुत फायदेमंद होती है। इसमें एंटी इंफ्लेमेट्री गुण पाया जाता है जो सर्दी, जुकाम, खांसी, अस्थमा जैसी बीमारियों से राहत दिलाता है। सिर्फ इतना ही नहीं काली हल्दी में एंटीफंगल, एंटी अस्थमा, एंटीऑक्सिडेंट, एनाल्जेसिक, एंटी-कॉन्वेलसेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटी-अल्सर जैसे खास गुण पाए जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Friday, August 25, 2023, 14:27 [IST]
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