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तलाक बच्चों पर भी पड़ता है बुरा असर, इन तरीकों से करें उन्हें हैंडल
शादी को यूं तो सात जन्मों का बंधन माना जाता है। लेकिन कभी-कभी चीजें उस तरह से नहीं होती हैं, जैसा हम सोचते हैं। ऐसे में कपल तलाक का रास्ता अपनाते हैं। तलाक सिर्फ पति-पत्नी के जीवन को ही प्रभावित नहीं करता है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है। अपने माता-पिता को अलग होते हुए देखना बच्चों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता है।

यह देखने में आता है कि जो बच्चे कम उम्र में अपने माता-पिता का तलाक या अलगाव देखते हैं, तो उनके मन-मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यह माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों के मन पर तलाक की नेगेटिविटी का प्रभाव ना पड़ने दें। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही छोटे-छोटे टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चों को तलाक के इस दर्द से दूर रख सकते हैं-
बच्चे के साथ वक्त बिताएं
यह देखने में आता है कि जब पैरेंट्स तलाक के दर्द से गुजर रहे होते हैं, तो वे सिर्फ और सिर्फ अपनी ही स्थिति के बारे में सोचते हैं। ऐसे में बच्चे के मन में अकेलापन गहराने लगता है। याद रखें कि आपका बच्चा चाहता है कि माता-पिता दोनों उसके जीवन का हिस्सा बनें। लेकिन जब आप ऐसा करने में नाकाम रहते हैं तो इससे बच्चे का दुख कई गुना बढ़ जाता है।
को-पैरेंटिंग का अपनाएं रास्ता
तलाक का असर बच्चे पर सबसे अधिक इसलिए भी पड़ता है, क्योंकि अक्सर तलाक के बाद बच्चे को माता या पिता में से किसी एक को चुनना पड़ता है। जब वह दूसरे के प्यार से वंचित रहता है तो उसे लगता है कि शायद उसने ही कुछ गलत किया है। इस तरह अपराधबोध की भावना के चलते बच्चा और भी अधिक दुखी हो जाता है। इसलिए, कोशिश करें के आप तलाक का असर बच्चे पर ना पड़ने दें। इसके लिए को-पैरेंटिंग का रास्ता अपनाएं। जिससे आपके अलग होने के बाद भी बच्चे को आप दोनों का पयार मिलता रहे।
नेगेटिव बातों से रखें दूर
जब कोई कपल तलाक से गुजर रहा होता है तो ऐसे में ना केवल सिर्फ घर-परिवार या रिश्तेदारी में ही नहीं, बल्कि अनजान लोग भी तरह-तरह की बातें करते हैं। जब बच्चा इन्हें सुनता है तो उसके मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, बेहतर होगा कि आप बच्चे को इसके लिए पहले से ही तैयार करें। बच्चों को यह सच्चाई जानने का हक है कि आप तलाक क्यों ले रहे हैं, लेकिन इसे बच्चे के लिए थोड़ा आसान बनाएं। जिससे बच्चे को बाद में दूसरों की नेगेटिव बातों का असर ना हो।
बच्चे की सुनें
जब बच्चा अपने पैरेंट्स को अलग होते हुए देखता है तो उसके मन में काफी कुछ चल रहा होता है। लेकिन वह अपनी बात किसी से नहीं कह पाता है। जिससे वह मन ही मन परेशान रहने लगता है। कई बार तो बच्चा नेगेटिविटी के कारण सबसे अलग भी रहने लगता है। इसलिए, बच्चे के मन की बात सुनना बेेहद जरूरी होता है। कोशिश करें कि आप उनसे अधिक से अधिक बात करें और उन्हें अपनी बात कहने का मौका दें। हो सकता है कि उन्हें गुस्सा, नाराजगी, डिप्रेशन या चिंता हो, ऐसे में उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने दें।
रहें पॉजिटिव
तलाक के दौरान मन में नेगेटिविटी आना सामान्य बात है। लेकिन आपको यह याद रखना होगा कि इसका सीधा असर आपके बच्चे पर भी पड़ रहा है। इसलिए, खुद भी पॉजिटिव रहें और बच्चे को भी पॉजिटिव रखें। उन्हें बताएं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। यकीनन जीवन में आने वाले परिवर्तन कठिन है। लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा। इस तरह की पॉजिटिव बातें बच्चे के मन की नेगेटिविटी को दूर करने में मदद करेंगी।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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