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Heatwave Alert : 3 महीने झेलनी पड़ सकती हैं गर्मी की मार! ये लोग रहे बचके, जानें क्या करें और क्या नहीं
Heatwave Alert : उत्तर भारत में तापमान की बढ़ती तल्खियों ने लोगों के पसीने छुड़वा दिए। अप्रैल की शुरुआत से तापमान के तीखे तेवर देख लोगों ने घरों से बाहर निकलना छोड़ दिया है। इसी बीच मौसम विभाग (IMD) ने 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हीटवेव को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
IMD के मुताबिक अप्रैल से जून तक इन जगहों पर प्रचंड गर्मी पड़ेगी। हीटवेब से निपटने के लिए IMD और NDMA (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ) ने मिलकर एक्शन प्लान भी तैयार किया है। इस प्लान के तहत लू को देखते हुए ORS के पैकेट्स की उपलब्धता और शहरों और कस्बों में सार्वजनिक स्थलों पर कूलर और कूल रूफ की व्यवस्था करने जैसी चीजें शामिल हैं।

वैसे तो हीटवेव की वजह से हर किसी का हाल-बेहाल हो रखा हैं, लेकिन जानते हैं इससे सबसे ज्यादा खतरा किसे है और कैसे इससे बचाव करें? आइए जानते हैं-
हीटवेव क्या है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो लू चलने लगती है। 47 डिग्री टेम्परेचर को खतरनाक हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं तटीय क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस हो जाता है तो हीट
किन्हें होता है लू लगने का खतरा
डब्लूएचओ के मुताबिक बच्चे, बुजुर्ग, प्रेग्नेंट महिलाएं और बीमार व्यक्तियों को बढ़ते तापमान से सबसे ज्यादा खतरा है। इसके अलावा एथलीट और बाहर मजदूरी का काम करते हैं, भीषण गर्मी से उनका शरीर प्रभावित होता है। अगर आपके पास पेट्स है, तो उनका भी खास ख्याल रखने की जरुरत होती है।
क्या हो सकता है खतरा?
गर्मी में तेज तापमान की वजह से शरीर में भी हीट उत्पन्न होती है। जिसका दुष्प्रभाव शरीर में अलग-अलग तरह से नजर आता है जैसे-
- सामान्य से ज्यादा तापमान होने पर शरीर में तापमान को संतुलित करने की क्षमता कमजोर होने लगती है। जिसका मेटाबोलिक प्रोसेस पर असर पड़ता है।
- हीट क्रैंप (हाथ, पैरों या पेट की मांसपेशियों में ऐंठन), हीट एक्जॉसेशन, हीट स्ट्रोक और हाइपरथर्मियां का खतरा बढ़ जाता है।
- 8 घंटे तक मूत्र न आना या गर्मियों में उच्च बुखा - ये सभी लू के खतरे के संकेत हैं। ये संकेत दिखते ही आपको तुरंत मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।

ऐसे करें लू से बचाव
गर्मी में सबसे ज़रूरी है शरीर में पानी की कमी न होने दें। शरीर में जरुरी इलेक्ट्रॉलाइट्स को मैंटेन करने के लिए लिक्विड पर ध्यान दें। गर्मियों में ज़्यादातर बीमारियां जैसे डायरिया, एसिडिटी इत्यादि कम पानी पीने और गलत खान पान के कारण होती हैं।
इसलिए इन बातों का ध्यान रखें-
* गर्मी में जब भी घर से बाहर निकले अपने पास पानी की बोतल जरूर रखें।
* गर्मी के मौसम में मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन अधिक करें।
* सब्जी में लौकी, तोरी, टिंडा, कद्दू आदि गर्मियों की सब्जियां हैं, जो बेलों पर उगती हैं, इन सभी में पानी की मात्रा अधिक होती है और ये मूत्रवर्धक होती हैं।
* ज्यादा तला-भुना न खाएं।
* कोल्ड ड्रिंक और कैफीन के सेवन से बचें।
* चाय और कॉफी की जगह दही और छाछ पीएं।
* धूप में निकलते समय स्कार्फ, सनग्लासेस और जूतों से खुद को ढ़ककर रखें। -
* ओआरएस, लस्सी और नींबू पानी जैसी नेचुरल चीजें पीएं।
* दोपहर को 12 से 3 के बीच जानें से बचें।
* कार को धूप में पार्क करने से बचें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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