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Mpox New strain: अचानक से दुनियाभर में क्यों बढ़ने लगे मंकीपॉक्स के मामले? कहीं इसके पीछे यह वजह तो नहीं?
Mpox New strain: कोरोना के बाद अब मंकीपॉक्स वैश्विक स्तर पर एक नया खतरा बनता जा रहा है। अफ्रीकी देशों के बाद मंकीपॉक्स अब कई देशों तक पहुंच चुका है। इसी भविष्य के लिए खतरा मानते हुए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर कर दिया है। अफ्रीका से बाहर एशियाई देशों में भी इस वायरस की खतरे की घंटी बज चुकी हैं। पाकिस्तान में इस वायरस के अब तक 4 मरीज मिले हैं।
इसके अलावा थाईलैंड में एक मंकीपॉक्स का एक नया मामला सामने आया है। हालांकि भारत में इसे लेकर अभी कोई खतरा सामने नहीं आया हैं लेकिन इसके खतरे को भांपते हुए कई शहरों में इससे निपटने के लिए तैयारियां शुरू की दी हे। इसी बीच सवाल उठता हैं कि अचानक से मंकी पॉक्स के इतने मामले सामने क्यों आ रहे हैं? जिसे लेकर WHO भी चिंता जाहिर कर चुका है।

नया स्ट्रेन हैं इसकी पीछे की वजह
अब इस वायरस को एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक Mpox का जो स्ट्रेन फैल रहा है, वो क्लेड 1 बी (Clade 1b) भी है। ये पहले के स्ट्रेन क्लेड 1 से ज़्यादा संक्रामक है। यही वजह है कि यह तेजी से फैल रहा है। ये स्ट्रेन इतना खतरनाक हैं कि इस पर मंकीपॉक्स पर असर करने वाली एंटीवायरल दवा टेकोविरिमैट भी काम नहीं कर रही हैं। इस स्ट्रेन के अफ्रीका में 18700 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। ब
क्लेड 1 बी के 100 से ज़्यादा मामले तो सिर्फ कॉन्गो के पड़ोसी देशों जैसे बुरुंडी, केन्या, रवांडा और युगांडा से ही से ही सामने आए। चौंकान्ने वाली बात तो ये है कि इन चारों देशों में पहले कभी भी मंकीपॉक्स का कोई केस सामने नहीं आया था।
नए स्ट्रेन की मुत्युदर है कितनी?
बताया जा रहा है कि जुलाई 2022 में जो मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे, उसके पीछे क्लेड-2 स्ट्रेन था, जिसमें मृत्यु दर 0.1 प्रतिशत थी और इस बार क्लेड- 1 में मृत्यु दर का आकलन 3 प्रतिशत तक बताया जा रहा है।

एमपॉक्स क्या है? (What is Mpox)
एमपॉक्स यानी मंकीपॉक्स के हाल ही में 116 से ज़्यादा देशों में इसके मामले सामने आए हैं। मंकीपॉक्स एक ज़ूनोटिक बीमारी है। ये जानवरों से इंसानों में होती है। फिर एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है। एमपॉक्स एक वायरल इंफेक्शन है यानी ये एक से दूसरे में होता है।
एमपॉक्स के लक्षण
- बुखार आना
- सिरदर्द होना
- स्किन में घाव पड़ना फिर बड़े होकर फफोले बन जाते हैं
- फिर मरीज़ तब तक संक्रमित रहता है, जब तक कि फफोले सूख न जाएं, ये एक से दूसरे मरीज में भी फैल सकता है।
- मंकीपॉक्स का इनक्यूबेशन पीरियड 5 से 21 दिनों का होता है यानी वो समय जो वायरस के संपर्क में आने के बाद लक्षणों के विकसित होने में लगता है।
एमपॉक्स से बचाव और इलाज
एमपॉक्स का इलाज इसके लक्षणों पर निर्भर करता है।
- अगर लक्षण हल्के हैं, तो अक्सर मरीज़ जल्द ठीक हो जाते हैं, वहीं कम से कम मरीज को पूरी तरह स्वस्थ होने में 4 हफ्ते लगते हैं।
- बुखार और दूसरे लक्षण कम नहीं होने तक आपको आइसोलेशन वॉर्ड में रखा जाता है।
- आपकी मॉनिटरिंग होगी और इस दौरान आपके कई तरह के टेस्ट होते है, जैसे लिवर फंक्शन टेस्ट और किडनी फंक्शन टेस्ट।
- इन टेस्ट के जरिए ये देखा जाता है कि इससे किसी दूसरे अंग पर तो असर नहीं पड़ रहा।
- जिन लोगों की इम्यूनिटी बहुत कमज़ोर होती है जैसे बच्चे, बुज़ुर्ग और प्रेग्नेंट महिलाएं, उनके लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
- अगर किसी को मंकीपॉक्स हो जाता है, तो उसे हाइड्रेटेड रखना जरूरी होता है। आईवी फ्लूइड देने की जरुरत होती है।
- अगर ज़रूरत हुई तो ऑक्सीज़न देना पड़ सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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