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Nipah Virus: केरल में निपाह वायरस ने दी फिर से दस्तक, जानें इस खतरनाक बीमारी के लक्षण और बचाव
Nipah virus in Kerala: केरल में निपाह वायरस ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। केरल के कोझिकोड जिले में दो लोगों की मौत हुई है। दक्षिणी राज्य केरल में एक बार फिर निपाह वायरस फैलने की आशंका है। कोझिकोड जिले में बुखार से दो मरीजों की मौत हुई है। ऐसी आशंका जताई जा रही हैं कि दोनों की मौत निपाह वायरस से हुई है।
इन दोनों मौत के बाद से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। आइए जानते हैं निपाह वायरस क्या है? ये कितना खतरनाक है? और इससे कैसे बचा जा सकता है?

क्या है निपाह वायरस
निपाह वायरस चमगादड़ और सुअर जैसे जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इस बीमारी की मरने वालों की दर बहुत ज्यादा है। अब तक इसका कोई ट्रीटमेंट या टीका (इंजेक्शन) उपलब्ध नहीं है। जूनोटिक वायरस उसे कहते हैं, जो जानवरों से इंसानों में या इंसानों से जानवरों में फैलता है।
कैसे फैलता है निपाह वायरस?
निपाह वायरस जानवरों और इंसानों के बीच फैलता है, यह मुख्य रूप से चमगादड़ों के माध्यम से फैलता है हालांकि कुछ मामलों में सुअर, बकरी, घोड़े जैसे अन्य जानवरों के माध्यम से भी इसका संक्रमण हो सकता है। चमगादड़ की कुछ प्रजातियां रेबीज, इबोला और निपाह वायरस की भी वाहक रही हैं। संक्रमित जानवरों के संपर्क में रहने वालों में इस संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता है। संक्रमित जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ (रक्त, मल, पेशाब या लार) के माध्यम से इसका संक्रमण इंसानों को हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से भी आप वायरस की चपेट में आ सकते हैं। सभी लोगों को इस संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास करते रहने की सलाह दी जाती है।
लक्षण
WHO की मानें तो निपाह वायरस से संक्रमित होने वाले मरीजों में वायरल फीवर होने के साथ सिरदर्द, उल्टी जैसा लगना, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर ये लक्षण 1-2 हफ्ते तक रहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या है इलाज
निपाह संक्रमण का कोई इलाज नहीं है, इसमें सहायक उपचार के माध्यम से लक्षणों को सुधारने के लिए प्रयास किए जाते हैं। रोगियों को कुछ उपाय करके सेहत में सुधार के लिए प्रयास करते रहने की सलाह दी जाती है। लक्षणों में सुधार के लिए बहुत सारा पानी पीने, भरपूर आराम करने को लाभकारी माना जाता है। मतली या उल्टी को नियंत्रित करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। जिन रोगियों को सांस लेने में कठिनाई होती है उन्हें इन्हेलर या नेब्युलाइज़र दी जा सकती है। फिलहाल रिसर्चर निपाह वायरस के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार तैयार करने के लिए शोध कर रहे हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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