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नोएडा में दूध पीने से महिला की मौत, क्या गाय के दूध से भी फैल सकती है ये बीमारी?
ग्रेटर नोएडा में रेबीज से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के पास स्थित एक गांव में रहने वाली महिला की मौत रेबीज के कारण हो गई। बताया जा रहा है कि महिला ने कुछ दिन पहले एक संक्रमित गाय का दूध पिया था, जिसे रेबीज हो चुका था। इस घटना ने इलाके में दहशत फैला दी है और कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वास्तव में दूध पीने से रेबीज हो सकता है।

कैसे फैला संक्रमण?
महिला का परिवार पशुपालन से जुड़ा था। उनकी एक गाय को पागल कुत्ते ने काट लिया था, लेकिन परिवार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि गाय को रेबीज हो गया है। बाद में जब गाय में लक्षण दिखाई देने लगे, तब उसे वैक्सीन दी गई। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। रेबीज के लक्षण दिखने के कुछ दिनों बाद महिला की मौत हो गई।
गाय ने दो महीने पहले एक बछड़े को जन्म दिया था और उसका दूध नियमित रूप से परिवार और गांव के अन्य लोग भी पी रहे थे। संक्रमण के खतरे को देखते हुए, गांव के कम से कम दस लोगों को पोस्ट-एक्सपोज़र रेबीज के टीके लगाए गए। हालांकि, महिला ने किसी कारणवश वैक्सीन नहीं लगवाई, जिससे वह गंभीर रूप से बीमार हो गई और अंततः उसकी जान चली गई।
रेबीज के लक्षण और उनका असर
रेबीज वायरस से संक्रमित व्यक्ति में शुरुआत में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, यह गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।
प्रारंभिक लक्षण
फ्लू जैसे लक्षण: बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख न लगना।
काटने या खरोंच वाली जगह पर दर्द, झुनझुनी या खुजली।
सुन्नता या झुनझुनी।
गंभीर (न्यूरोलॉजिकल) लक्षण:
चिंता और बेचैनी।
भ्रम और प्रलाप।
मतिभ्रम और लकवा।
हाइड्रोफोबिया (पानी का डर), जिसमें व्यक्ति को निगलने में कठिनाई होती है और पानी या अन्य तरल पदार्थ के सामने घबराहट महसूस होती है।
क्या दूध पीने से रेबीज हो सकता है?
अधिकांश मामलों में, रेबीज संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैलता है, जैसे कि काटने या खरोंचने से। हालांकि, संक्रमित जानवर के दूध में भी वायरस मौजूद हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता, खासकर अगर दूध उबाला गया हो। हालांकि, कच्चे दूध के सेवन से संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।
किन जानवरों से फैल सकता है रेबीज?
- कुत्ते (भारत में रेबीज का सबसे आम स्रोत)
- बिल्ली
- बंदर
- चमगादड़
- लोमड़ी और अन्य जंगली जानवर
संक्रमित जानवर के काटने से वायरस सीधे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है और मस्तिष्क तक पहुंचकर घातक बन सकता है।
रेबीज का इलाज और बचाव
रेबीज का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन अगर समय पर उचित वैक्सीन दी जाए, तो इसे रोका जा सकता है। रेबीज से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाए जा सकते हैं:
यदि किसी को रेबीज संक्रमित जानवर काट ले, तो तुरंत घाव को साबुन और पानी से धोकर डॉक्टर से संपर्क करें।
पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) वैक्सीन की समय पर खुराक लें।
किसी भी संदिग्ध या जंगली जानवर के संपर्क से बचें।
अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं।
वैक्सीनेशन
अगर आप पालतू जानवर पालते हैं, तो उनके रेबीज टीकाकरण का विशेष ध्यान रखें। वैक्सीनेशन से न केवल जानवर सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनके संपर्क में आने वाले इंसान भी इस गंभीर बीमारी से बचे रह सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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